न्यूज फ्लैश

क्या अमेरिका में थम जाएगी मीटू की हवा

डॉ. संतोष कुमार तिवारी

वैसे तो अमेरिका में मीटू आंदोलन की शुरुआत 2006 में हुई थी, परंतु इसने अक्टूबर 2017 से जोर पकड़ा। अक्टूबर 2017 में हॉलीवुड के मशहूर अभिनेता और फिल्म प्रोड्यूसर हार्वी वीनस्टीन के खिलाफ यौन शोषण के आरोप लगे। तब से अब तक वहां कोई 200 से अधिक हस्तियों के विरुद्ध इस प्रकार के आरोप लग चुके हैं। हार्वी को ब्रिटेन का ‘आॅर्डर आॅफ ब्रिटिश एंपायर’ का सम्मान भी मिल चुका है।
दो औरतों के साथ बलात्कार के आरोपों से घिरे हार्वी वीनस्टीन ने 25 मई 2018 को पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। बाद में उसे 10 लाख डॉलर (लगभग 7 करोड़ तीस लाख रुपये) की जमानत पर छोड़ दिया गया। उसका पासपोर्ट जब्त कर लिया गया और पैर की एड़ी के अंदर एक कम्प्यूटर चिप लगा दी गई ताकि वह न्यूयार्क और कोनेक्टिकट की सीमा से बाहर न जा सके।
मीटू आंदोलन की हवा निकलने की बात इसलिए उठी क्योंकि हार्वी के खिलाफ जिस औरत ने बलात्कार का आरोप सार्वजनिक तौर से लगाया था, वह खुद यौन उत्पीड़न के आरोपों में घिर गई। आसिया अरजेंटो नाम की इस इटैलियन अभिनेत्री के खिलाफ आरोप है कि उसने जिमी बेनेट नामक अभिनेता और संगीतज्ञ के साथ उस समय यौन दुराचार किया था जब जिमी 17 वर्ष का था। 43 वर्षीय अभिनेत्री आसिया उस समय 37 वर्ष की थी। …क्या सही क्या गलत- यह तो वक्त बताएगा। परंतु इतना जरूर है कि कई मीटू समर्थकों ने अब असिया से कन्नी काट कर दूरी बना ली है।
हॉलीवुड की मशहूर हस्ती हार्वी वीनस्टीन पर आरोप लगाने वालों में रोज मैकगोवन भी शामिल हैं। रोज मैकगोवन मशहूर अभिनेत्री, मॉडल और सिंगर रही हैं। रोज ने अक्टूबर 2017 में हार्वी पर आरोप लगाया कि उसने वर्ष 1997 में उसके साथ बलात्कार किया था। न्यूयार्क टाइम्स के अनुसार हार्वी ने कम से कम आठ औरतों को अपना मुंह बंद रखने के लिए धनराशि दी थी। इनमें रोज मैकगोवन भी शामिल थीं। उसके साथ हार्वी का यह समझौता हुआ था कि हार्वी उसे एक लाख डॉलर देगा। वर्ष 1997 में उस कथित बलात्कार के समय रोज मैकगोवन की मैनेजर एक महिला थी- जिल मेस्सिक। उसने 7 फरवरी 2018 को आत्महत्या कर ली थी। रोज का आरोप था कि उसके यौन उत्पीड़न में जिल की भी मिलीभगत थी। जिल के परिवारवालों ने इस खुदकुशी के लिए हार्वी वीनस्टीन, रोज मैकगोवन और मीडिया को जिम्मेदार ठहराया।
ब्रिटेन के नेशनल सेक्सुअल वायलेंस रिसोर्स सेंटर की संचार निदेशक लौरा पालुम्बो का कहना है कि ‘कोई महिला यौन दुराचार की पीड़िता भी हो सकती है और स्वयं यौन दुराचारी भी हो सकती है।’ आसिया अरजेंटो और रोज मैकगोवन के उदाहरणों से तो ऐसा लगता है कि वहां दूध का धुला ढूंढना मुश्किल है।
इस घटनाक्रम के बावजूद ऐसा नहीं लगता कि अमेरिका में मीटू आंदोलन थम जाएगा या इससे चली हवा का रुख तुरंत पलट जाएगा। कारण यह है कि इस आंदोलन को अब आर्थिक सहायता भी मिलने लगी है। मई 2018 में न्यूयार्क वूमेंस फाउंडेशन ने घोषणा की कि वह इस आंदोलन और इसके सहयोगियों को 25 मिलियन डॉलर की मदद अगले पांच वर्षों के दौरान देगा। 25 मिलियन डॉलर अर्थात एक अरब बयासी करोड़ पचास लाख रुपये की राशि कोई छोटी मोटी रकम नहीं है।
अमेरिका के मीडिया संगठन सीबीएस ने भी 20 मिलियन डॉलर (अर्थात एक अरब छियालीस करोड़ रुपये) देने की घोषणा की है। सीबीएस अमेरिका का बहुत पुराना रेडियो और टेलीविजन नेटवर्क है। पहले इसका नाम कोलम्बिया ब्रॉडकास्टिंग सिस्टम था। वर्ष 2018 में सीबीएस के चेयरमैन और चीफ एक्जीक्यूटिव लेस मूनवेस पर भी आधा दर्जन से अधिक महिलाओं ने यौन दुराचार के आरोप लगाए थे। इस कारण उन्हें पद से हटना पड़ा। उन्होंने इन आरोपों का खंडन किया है और मामले की जांच हो रही है। सीबीएस ने जो 20 मिलियन डॉलर की रकम देने की घोषणा की है वह लेस मूनवेस के संगठन छोड़ने पर उन्हें मिलने वाली राशि से काट कर ही दी जाएगी। लेस मूनवेस की 2017 में वार्षिक आय 69.3 मिलियन डॉलर थी और वह दुनिया के सर्वाधिक आय वाले चीफ एक्जीक्यूटिव्स में से एक थे।

मीटू के कारण आए परिवर्तन
मीटू आंदोलन के कारण अमेरिका और यूरोप आदि महाद्वीपों के देशों में डेटिंग (अर्थात अविवाहित स्त्री पुरुषों के सम्मिलन) में विशेष परिवर्तन आया है। अब पुरुष वर्ग पहले से ज्यादा सतर्क हो गया है। उसे यह ध्यान रखना पड़ रहा है कि उत्साह में वह कहीं अपने व्यवहार से यौन मर्यादा की सीमा रेखा लांघ तो नहीं रहा है। सीमा रेखा लांघने का मतलब यह है कि इस कारण बुढ़ापे में भी ऐसी तैसी हो सकती है। इससे डेटिंग करने वालों में एक दूसरे के प्रति भरोसा कम हुआ है।
दूसरा बड़ा परिवर्तन हॉलीवुड में देखने में आया है। बीबीसी न्यूज ने बताया है कि हॉलीवुड में अचानक महिला लेखकों और निर्देशकों की तलाश बढ़ गई है। हार्वी वीनस्टीन कांड ने पूरी हॉलीवुड और मनोरंजन इंडस्ट्री को बुरी तरह झकझोर दिया है। हॉलीवुड इंडस्ट्री को अगर इस समस्या से निकालना है तो सबसे आसान उपाय यह है कि ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को वहां स्थान दिया जाए। सैनडियागो स्टेट यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर द स्टडी आॅफ वुमन इन टेलीविजन एंड फिल्म द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार वर्ष 2017 की सौ बड़ी गॉसिप फिल्मों में महिलाओं की संख्या बहुत कम थी। सिर्फ 8 फीसदी निर्देशक, 10 फीसदी लेखक, 2 फीसदी सिनेमेटोग्राफर्स, 24 फीसदी प्रोड्यूसर्स और 14 फीसदी संपादक ही महिलाएं थीं।
मीटू आंदोलन ने अमेरिका की मीडिया और मनोरंजन को ही नहीं प्रभावित किया है, बल्कि इसका प्रभाव वहां चर्च, राजनीति, स्पोर्ट्स, मिलिट्री आदि क्षेत्रों में भी देखा जा रहा है।
मीटू आंदोलन में वेश्याओं को शामिल नहीं किया गया है, जबकि वे सेक्स उत्पीड़न का सबसे अधिक शिकार होती हैं। परंतु समाज में आमतौर पर यह समझा जाता है कि उन्होंने सेक्स उत्पीड़न स्वेच्छा से स्वीकार किया हुआ है।
मीटू आंदोलन को आगे बढ़ाने में सोशल मीडिया की बहुत बड़ी भूमिका रही है। पाकिस्तान जैसे देश के अपेक्षाकृत रूढ़िवादी समाज में भी महिलाओं को ट्विटर के जरिये अपनी आवाज उठाने का मौका मिला है। प्रसिद्ध पाकिस्तानी फिल्म अभिनेत्री मीशा शफी ने मशहूर अभिनेता और गायक अली जफर पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। अली जफर ने इस आरोप को बेबुनियाद बताया है और वह मीशा पर कानूनी कार्रवाई करेंगे। मीशा शफी का मामला शायद पाकिस्तान का पहला मीटू है। पाकिस्तान में समाजसेवी दिवंगत अब्दुल सत्तार इधी के बेटे फैजल इधी (इधी फाउंडेशन वाले) पर भी एक पूर्व पत्रकार ने दुराचार का आरोप लगाया है। पूर्व पत्रकार का कहना है कि इधी ने उसका हाथ मजबूती से पकड़ कर उसे वैन में खींचने की कोशिश की थी। फैजल इधी ने इस आरोप का खंडन किया है।
मीटू आंदोलन दुनिया के कई देशों में पैर पसार चुका है। कहीं कम, तो कहीं ज्यादा। इन देशों में शामिल हैं: अफगानिस्तान, आस्ट्रेलिया, कनाडा, चिली, चीन, इथोपिया, फ्रांस, जर्मनी, ईरान, भारत, इजराइल, फलस्तीन, इटली, जापान, केन्या, नाइजीरिया, नार्वे, पाकिस्तान, फिलीपींस, दक्षिण कोरिया, स्पेन, स्वीडन और ब्रिटेन आदि।
मीटू बगैर तलवार की लड़ाई है। मीटू ने स्त्रियों को सेक्स हिंसा के खिलाफ दुनियाभर में आवाज दी है। उनकी खामोशी को तोड़ने की कोशिश की है। सभ्य समाज में मीटू का असर ज्यादा है। अपेक्षाकृत कम सभ्य समाज में मीटू का असर कम है।

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