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क्या कोच को लेकर टीम इंडिया में फिर छिड़ेगी रार

जहीर खान को बॉलिंग कोच बनाने पर रवि शास्त्री और सौरव गांगुली में हुई तीखी बहस, शास्त्री जहीर की जगह भरत अरुण को बनाना चाहते थे बॉलिंग कोच

ओपिनियन पोस्ट ब्यूरो।

कोहली-कुंबले विवाद के करीब एक महीने बाद आखिरकार टीम इंडिया को अगले क्रिकेट विश्व कप 2019 तक के लिए रवि शास्त्री के रूप में नया मुख्य कोच मिल गया। शास्त्री टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली की पहली पसंद थे और उनकी पसंद का क्रिकेट सलाहकार समिति (सीएसी) खासकर समिति के सदस्य सचिन तेंदुलकर ने खास ख्याल रखा। कोच चुने जाने की जिम्मेदारी इसी समिति पर थी। सचिन का मानना था कि कोच के रूप में टीम की पसंद का ध्यान रखा जाना चाहिए। शास्त्री के अलावा बॉलिंग कोच के रूप में पूर्व तेज गेंदबाज जहीर खान और विदेशी दौरों के लिए पूर्व कप्तान राहुल द्रविड़ को बैटिंग कोच (सलाहकार) के तौर पर चुना गया है। मौजूदा बैटिंग कोच संजय बांगड़ भी टीम के साथ बने रहेंगे।

मगर इसके साथ ही विवाद की शुरुआत हो गई है क्योंकि रवि शास्त्री जहीर खान की जगह अपने पसंदीदा भरत अरुण को बॉलिंग कोच बनवाना चाहते थे। इसे लेकर सीएसी के एक अन्य सदस्य और टीम इंडिया के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली से शास्त्री की तीखी बहस भी हो गई क्योंकि गांगुली ने ही जहीर खान का नाम प्रस्तावित किया था। एक बॉलर के रूप में भरत अरुण की तुलना में जहीर खान की उपलब्धि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और टीम इंडिया में कहीं ज्यादा रही है। शास्त्री और गांगुली के बीच छत्तीस का आंकड़ा पिछले साल ही सामने आ गया था जब शास्त्री की जगह अनिल कुंबले को मुख्य कोच चुन लिया गया था।

तब शास्त्री ने कोच नहीं चुने जाने के लिए सीधे-सीधे गागुंली को जिम्मेदार ठहरा दिया था और गांगुली ने भी सोशल मीडिया के जरिये उन्हें करारा जवाब दिया था। उसके बाद से ही दोनों के रिश्ते तनावपूर्ण बने हुए हैं। इस बार भी सौरव गांगुली रवि शास्त्री को मुख्य कोच बनाए जाने के खिलाफ थे और वे वीरेंद्र सहवाग का समर्थन कर रहे थे। मगर जहीर खान को बॉलिंग कोच बनाने की शर्त पर वे शास्त्री को मुख्य कोच बनाने को राजी हुए। सचिन तेंदुलकर ने उन्हें इसके लिए राजी किया। हालांकि कहा जा रहा है कि कप्तान कोहली भी जहीर खान को ही चाहते थे।

जरा याद करें पिछले साल की उस घटना को जब कप्तान कोहली की रजामंदी के बगैर अनिल कुंबले को मुख्य कोच चुन लिया गया था। कोहली ने जब इसका विरोध किया तो बचाव में बीसीसीआई को सामने आना पड़ा था। तब बीसीसीआई के समझाने पर कोहली कुंबले के साथ एक साल के लिए काम करने को राजी हो गए थे। मगर कोहली और कुंबले का रिश्ता कैसा रहा और कुंबले को किस तरह से टीम का साथ छोड़ना पड़ा इसे बताने की जरूरत शायद नहीं है।

अब एक बार फिर से उसी तरह की स्थिति पैदा हो रही है। रवि शास्त्री के न चाहने के बावजूद जहीर खान को बॉलिंग कोच बना दिया गया है मगर मुख्य कोच होने के नाते शास्त्री के निर्देशों पर ही जहीर को काम करना होगा। ऐसा न होने पर दोनों के बीच टकराव बढ़ेगा जिससे विवाद पैदा होगा और इसका खामियाजा कहीं न कहीं टीम इंडिया और क्रिकेट को उठाना पड़ सकता है। अगर ऐसा हुआ तो अगले विश्व कप की तैयारियों पर भी इसका असर पड़ना तय है।

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