नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई कब?

सत्ता बदलने से स्थितियां बदल जाएं, यह जरूरी नहीं. इसका सटीक उदाहरण है, छत्तीसगढ़. राज्य में जब भारतीय जनता पार्टी सत्ता में थी, तो नक्सलियों ने झीरम घाटी में एक बड़ा हमला करके कई कांग्रेसी नेताओं की हत्या कर दी थी? तब कांग्रेस को नक्सली हमले में साजिश की बू आती थी. अब कांग्रेस सत्ता में है, तो नक्सलियों ने फिर एक बड़ा हमला करके भाजपा विधायक की हत्या कर दी. अब भाजपा को इसमें साजिश की बू आ रही है. लेकिन, सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इन हिंसक नक्सलियों के खिलाफ सरकार निर्णायक कार्रवाई कब करेगी?

हाल में छत्तीसगढ़ में हुए नक्सली हमले में एक भाजपा विधायक और चार पुलिसकर्मियों की जान चली गई. नक्सलियों (भाकपा-माओवादी) द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि बीते 9 अप्रैल को हुआ हमला पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी ने अंजाम दिया था. हमले में दंतेवाड़ा के भाजपा विधायक भीमा मांडवी एवं उनके चार सुरक्षाकर्मी मारे गए थे. यह बयान नक्सलियों के दंडकारण्य स्पेशल रीजन की दरभा डिवीजन कमेटी के सचिव साई नाथ के नाम से जारी किया गया. इससे पहले नक्सलियों ने बस्तर की झीरम घाटी में 25 मई 2013 को एक बड़ा हमला किया था, जिसमें विद्याचरण शुक्ल एवं महेंद्र कर्मा समेत छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस के कई बड़े नेता मारे गए थे. माना जा रहा है कि भाजपा विधायक एवं उनके अंगरक्षकों की हत्या को अंजाम देने वाले दल में तकरीबन 100 नक्सली शामिल थे. पुलिस ने घटनास्थल से बारूदी सुरंग का स्थान बताने वाला एक जीपीएस भी बरामद किया. इस क्षेत्र में माओवादियों की मलांगिर एरिया कमेटी सक्रिय है. इस कमेटी के साथ घटना में केरलापाल एरिया कमेटी एवं जगरगुंडा एरिया कमेटी के नक्सली भी शामिल थे. विधायक मंडावी क्षेत्र में चुनावी दौरे पर थे. यह उनका तीसरा चुनावी दौरा था. हमले में शहीद हुए पुलिसकर्मी दंतेश्वर मौर्य भाजपा विधायक के साथ उनकी सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात थे. मौर्य उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जनपद के माहोपर गांव के रहने वाले थे.

शहादत व्यर्थ नहीं जाएगी: राजनाथ सिंह

केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि विधायक भीमा मंडावी एवं पुलिस कर्मियों की बस्तर में हुई शहादत व्यर्थ नहीं जाने दी जाएगी, इसके लिए जिम्मेदार नक्सलियों को माफ नहीं किया जाएगा. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लोकतांत्रिक तरीके से ही परिवर्तन लाया जा सकता है, बंदूक से परिवर्तन संभव नहीं है. हमले के विरोध में छत्तीसगढ़ के भाजपा नेताओं ने अपने सोशल मीडिया एकाउंट की प्रोफाइल पिक्चर काली कर दी.

हमले के लिए कांग्रेस जिम्मेदार: भाजपा

रमन सिंह सरकार में गृह मंत्री रहे बृज मोहन अग्रवाल का मानना है कि नक्सलवाद के प्रति कांग्रेस सरकार के ढुलमुल रवैये के चलते ही ऐसी घटना हुई. अग्रवाल ने कहा कि मामले की सीबीआई जांच होनी चाहिए. दूसरी तरफ राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह ने कहा कि कांग्रेस की बोली और गोली का असर दिखने लगा है. विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष धरम लाल कौशिक ने दंतेवाड़ा नक्सली हमले की सीबीआई जांच कराने की मांग दोहराई है. उनका आरोप है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सीबीआई जांच से डर रहे हैं. नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि भीमा मंडावी की शहादत पर कांग्रेस जिस तरह का आचरण कर रही है, उससे हमारे इस आरोप को बल मिलता है कि मंडावी के काफिले पर हुआ हमला एक बड़ी साजिश का हिस्सा है. उन्होंने कहा कि क्या नक्सलियों के साथ अपने छिपे रिश्ते जगजाहिर हो जाने का डर मुख्यमंत्री एवं अन्य कांग्रेसी नेताओं को सता रहा है? आखिर कांग्रेस सरकार आने के बाद ही नक्सली वारदातों में इजाफा क्यों हो गया? क्यों नक्सलियों को ऐसा लगने लगा कि अब छत्तीसगढ़ में हमारी सरकार आ गई है? उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार भीमा मंडावी पर हुए नक्सली हमले की सीबीआई जांच कराए, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके.

रमन सरकार पर नक्सलियों को पैसे भेजने का आरोप

साल 2013 में झीरम घाटी में हुए नक्सली हमले में कांग्रेस के कई बड़े नेताओं की मौत होने के बाद उस समय छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे भूपेश बघेल ने दावा किया था कि उन्हें ऐसी जानकारी मिली है कि झीरम घाटी हमले से पहले राज्य सरकार ने किसी शख्स के माध्यम से नक्सलियों को करोड़ों रुपये भिजवाए थे. बघेल ने राज्य में पुलिस और नक्सलियों के बीच साठगांठ के आरोप लगाए थे. उन्होंने तब मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग उठाई थी. कांग्रेस ने कहा था कि राज्य में नक्सली-पुलिस साठगांठ की पूरी जांच अविलंब सीबीआई को सौंप दी जाए. सीबीआई ही पता लगा सकती है कि वह शख्स कौन है, जिसने सरकार के कहने पर झीरम कांड से पहले नक्सलियों को मोटी रकम पहुंचाई थी और सरकार में ऐसा शख्स कौन है, जो नक्सलियों को पैसे भेजता है. तब भाजपा ने इस आरोप को अनर्गल बताया था. सच्चाई तो यह है कि जब झीरम घाटी हमला हुआ था, तब केंद्र में यूपीए सरकार थी और उसने ही मामले की एनआईए जांच कराने का ऐलान किया था. और, जांच में ऐसा कुछ सामने नहीं आया था, जिससे बघेल के आरोपों की पुष्टि हो सके.

माओवादी कमांडर ढेर

इसी बीच एक अच्छी खबर यह आई कि दंतेवाड़ा में पुलिस और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में पांच लाख रुपये का ईनामी माओवादी कमांडर वर्गीस मारा गया. विधायक भीमा मंडावी के काफिले पर हमले के लिए लैंडमाइन लगाने का काम वर्गीस ने ही किया था. डीजी एंटी नक्सल ऑपरेशन गिरिधारी नायक ने बताया कि दंतेवाड़ा के कुआकोंडा जंगल में नक्सलियों की पुलिस के साथ मुठभेड़ हुई, जिसमें लैंडमाइन एक्सपर्ट वर्गीस के साथ-साथ उसका एक साथी माओवादी भी मारा गया. लेकिन, सवाल अब भी वही है कि न तो भाजपा और न कांग्रेस की सरकार, नक्सल हिंसा के खिलाफ कोई निर्णायक कार्रवाई करती दिख रही है. क्या कांग्रेस या भाजपा के पास नक्सली समस्या का कोई समाधान नहीं है?

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