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बढ़ सकती हैं वाड्रा की मुश्किलें

नई दिल्ली। रॉबर्ट वाड्रा और डीएलएफ लैंड डील मामले में कार्यकाल पूरा हो जाने के बाद जस्टिस एसएन ढींगरा आयोग ने बुधवार को दोपहर बाद 4 बजे सीएम मनोहर लाल खट्टर से मुलाकात कर 182 पेज की अपनी रिपोर्ट सौंप दी। बाद में जस्टिस ढींगरा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, मैंने अपना काम कर दिया है, अब जिम्मेदारी सरकार की है। रिपोर्ट में जस्टिस ढींगरा ने सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा और प्रदेश के पूर्व मुख्‍यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा पर सख्त टिप्पणी की है। जस्टिस ढींगरा ने वाड्रा और हुड्डा पर सख्त कार्रवाई की सिफारिश भी की है। अब गेंद हरियाणा की खट्टर सरकार के पाले में है, जिसे यह तय करना है कि रॉबर्ट वाड्रा और भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ क्या कार्रवाई करनी है। इतना तो तय माना जा रहा है कि वाड्रा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

जस्टिस ढींगरा ने अपनी रिपोर्ट में रॉबर्ट वाड्रा के साथ-साथ हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ जो रिपोर्ट दी है,  उसके मुताबिक दोनों के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र के तहत मामला तक दर्ज हो सकता है। रिपोर्ट में हरियाणा सरकार के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा समेत अनेक सरकारी अधिकारियों पर तमाम नियम कानूनों को ताक पर रख कर प्रभावशाली लोगों को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया गया है। इसमें सोनिया गांधी के दामाद राबर्ट वाड्रा की कंपनी भी शामिल बताई जा रही है।

वाड्रा पर आरोप है कि उनकी कंपनी स्काईलाइट ने जो जमीन गुरूग्राम के शिकोहपुर में साढ़े सात करोड़ रुपये में खरीदी थी, वही जमीन लैंड यूज चेंज होने के बाद 55 करोड़ रूपये से ज्यादा में बेच दी। कुछ ऐसे ही आरोप हुड्डा सरकार के दौरान दूसरी कंपनियों पर भी लगे हैं। जिन कंपनियों को ये सीएलयू सर्टिफिकेट दिए गए, उनकी कीमतों में जिस दर से जमीन खरीदी गई थी उसमें पांच सौ से लेकर आठ सौ प्रतिशत तक का इजाफा हुआ।

अपनी रिपोर्ट में जस्टिस ढींगरा ने साफ तौर पर कहा है कि अनेक प्रभावशाली कंपनियों को जिनमें राबर्ट वाड्रा की कंपनी भी शामिल है उन्हें सीएलयू यानी चेंज आफ लैंड यूज सर्टिफिकेट जारी किए गए जिसके चलते जमीनों की कीमतें बढ़ गईं। सीएलयू सर्टिफिकेट का मतलब है खेती की जमीन पर व्यावसायिक इस्तेमाल की अनुमति देना। आय़ोग ने अपनी रिपोर्ट में हरियाणा के टाउन एंड कंट्री प्लानिंग अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं और इस विभाग की जिम्मेदारी देख रहे तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को भी कठघरे में खड़ा किया है।

आयोग ने गुरूग्राम के सेक्टर 83 समेत शिकोहपुर गांव सिकदंरपुर खेड़की दौला और सिही में जमीनों को वाणिज्यिक लाइसेंस दिए जाने की जांच की है। अपनी जांच के दौरान ढीगरा आय़ोग ने राबर्ट वाड्रा की कंपनी से सीधे नाता रखने वाली कंपनियों और अन्य प्राइवेट लोगों से भी पूछताछ की है। आय़ोग ने 50 से ज्यादा लोगों से पूछताछ की, जिनमें दो दर्जन सरकारी अधिकारी भी शामिल हैं। इनमें से कई लोगों के बयान गवाहों के तौर पर और कुछ लोगों के बयान पार्टी के तौर पर दर्ज किए गए हैं।

इसलिए बना ढींगरा आयोग

हरियाणा की खट्टर सरकार ने 14 मई 2015 को हरियाणा,  खासकर गुरुग्राम और उसके आसपास की विवादास्पद जमीन सौदों की जांच के लिए जस्टिस एसएन ढींगरा आयोग का गठन किया था। इस आयोग को जून 2016 में अपनी रिपोर्ट दाखिल करनी थी, लेकिन अंतिम समय पर आय़ोग के सामने कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज आ गए और उसके आधार पर आयोग को जांच के लिए आठ सप्ताह का और समय मिल गया।

ढींगरा आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कई जमीन सौदों की जांच की, लेकिन लोगों की सबसे ज्यादा दिलचस्पी रॉबर्ट वाड्रा और भूपेंद्र सिंह हुड्डा के केस में है। जस्टिस ढींगरा आयोग ने जांच के दौरान राबर्ट वाड्रा और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को भी पेश होने के नोटिस जारी किए थे, लेकिन दोनों पेश नहीं हुए थे। अब धींगरा आयोग की रिपोर्ट के बाद गेंद हरियाणा सरकार के पाले में है और उसे तय करना है कि रॉबर्ट वाड्रा और भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ क्या कार्रवाई करनी है।

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