राजनीति की विषकन्याएं

लोकसभा चुनाव से पहले अगर मीडिया में नेताओं की सेक्स सीडीजकी बाढ़ आ जाए, तो चौंकिएगा नहीं. क्योंकि, विरोधियों को विषकन्याओं के जरिये फंसाने का नया ट्रेंड अब राजनीति का अहम हिस्सा बन गया है. ओपिनियन पोस्ट को राजनेताओं को फंसाने वाले ऐसे कई रैकेट्स का पता चला है, जो बड़े-बड़े नेताओं, मंत्रियों और अधिकारियों को अपने जाल में फंसाते हैं, उनकी सेक्स सीडी बनाकर उन्हें ब्लैकमेल करते हैं. हैरानी की बात यह है कि इस तरह के पांच रैकेट्स मुंबई और छह से ज्यादा रैकेट्स दिल्ली में सक्रिय हैं. लेकिन, इससे भी हैरतअंगेज बात यह है कि इन विषकन्याओं का इस्तेमाल राजनीतिक दलों के साथ-साथ आईबी, पुलिस और दूसरी एजेंसियां भी कर रही हैं. ये विषकन्याएं नेताओं, मंत्रियों और अधिकारियों को अपने जाल में फंसाने के लिए सुपारी लेती हैं. हमारी तहकीकात में विषकन्याओं की कार्यप्रणाली का भी खुलासा हुआ है. इतना ही नहीं, हमें पुख्ता जानकारी मिली है कि इन विषकन्याओं के चक्रव्यूह में एक गवर्नर, तीन मंत्रियों के अलावा कई हाईप्रोफाइल नेता और अधिकारी फंस चुके हैं. ओपिनियन पोस्ट को मिली जानकारी के मुताबिक, विषकन्याएं अपने शिकार को ब्लैकमेल भी कर रही हैं और ऐसी आशंका है कि चुनाव के दौरान उनकी सीडी सोशल मीडिया और मीडिया में जारी करके उन पर कीचड़ उछाला जा सकता है. ओपिनियन पोस्ट की इस एक्सक्लूसिव रिपोर्ट से यह खुलासा होगा कि सत्ता के गलियारों में घूमने वाली विषकन्याएं किस तरह अपना शिकार चुनती हैं और किस तरह ऑडियो-वीडियो का फर्जीवाड़ा करके उन्हें अपना शिकार बनाती हैं और फिर ब्लैकमेल करती हैं.

प्राचीन युग में विषकन्याओं का इस्तेमाल राजा अपने शत्रुओं का छलपूर्वक अंत करने के लिए किया करते थे. ये विषसे भरी होती थीं. ये संगीत और नृत्य में पारंगत होने के साथ-साथ पुरुषों को आकर्षित करने में माहिर होती थीं. लेकिन, इनका सबसे बड़ा हथियार छल से अपना शिकार फंसाना हुआ करता था. इनका इस्तेमाल ऐसे शत्रुओं के खिलाफ किया जाता था, जिन्हें आम तौर पर हराना नामुमकिन होता था. विषकन्याओं को शत्रु के पास भेज दिया जाता था. विषकन्याएं अपने शिकार को पहले आकर्षित करती थीं और फिर उनके साथ संबंध बनाती थीं, जिससे उस शख्स की मौत हो जाती थी. राजनीति में जिस अचूक हथियार का इस्तेमाल प्राचीन काल से होता रहा है, उन्हीं विषकन्याओं को हथियार की तरह इस्तेमाल करने का खेल आज भी जारी है. सिर्फ अंदाज बदल गया है.

आज की विषकन्याएं सत्ता के गलियारों में समाज सेविका बनकर घूमती हैं. ये एनजीओ चलाती हैं, कला-संस्कृति को लेकर कार्यक्रम आयोजित करती हैं. कुछ तो राष्ट्रीय पार्टियों के साथ भी जुड़ी हैं और बाकायदा पदों पर विराजमान हैं. सोशल मीडिया पर भी ये मौजूद हैं. जिस पर ये बड़े-बड़े नेताओं और मंत्रियों के साथ तस्वीरें शेयर करती हैं. कुछ तो ऐसी हैं, जिन्होंने अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर राष्ट्रपति और बड़े मंत्रियों के साथ तस्वीरें लगा रखी हैंै. उक्त तस्वीरें असली हैं या नकली, इसका खुलासा भी हम आगे करने वाले हैं. समझने वाली बात यह है कि ये विषकन्याएं दुनिया के सामने समाज सेविका होने का ढोंग करती हैं, लेकिन इनका असली काम नेताओं और अधिकारियों को न सिर्फ हमबिस्तर होने के लिए लड़कियां मुहैया कराना है, बल्कि ये सुपारी लेकर नेताओं और अधिकारियों को अपने जाल में फंसाती हैंै. इनके काम करने का तरीका बेहद अजूबा है. ये अपने शिकार से एक राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में जान-पहचान बनाती हैं. फिर मिलने-जुलने का सिलसिला शुरू होता है और नजदीकियां बढ़ती हैं. इसके बाद ये विषकन्याएं उनके ऑफिस और घर के अलावा उनकी यात्राओं पर भी साथ जाने लगती हैं. ये विषकन्याएं राजनीतिक पार्टियों से जुड़ी होती हैं, इसलिए नेता, मंत्री और अधिकारी इनसे राजनीतिक कार्यकर्ता की तरह बर्ताव करते हैं. उन्हें इनके मंसूबों का पता नहीं चल पाता और यह शक नहीं होता कि ये विषकन्याएं उन्हें ही डंसने वाली हैं. ओपिनियन पोस्ट के पास इनके बैंक एकाउंट्स, व्हाट्सऐप और फेसबुक की पर्याप्त जानकारियां हैं. हमें इनकी बातचीत की कई ऐसी ट्रांस्क्रिप्ट मिली हैं, जिनमें ऐसी- ऐसी बातें शामिल हैं, जिन्हें हम छाप भी नहीं सकते. हम आपको इन रैकेट्स के बारे में बताएं, उससे पहले एक विषकन्या की करतूत बताते हैं, जिसे जानकर आपके होश उड़ जाएंगे.

नरेंद्र मोदी सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री को फंसाने के लिए एक राजनीतिक दल ने एक विषकन्या को सुपारी दी. इस विषकन्या का नाम है किम (बदला हुआ नाम). किम एक राजनीतिक दल से जुड़ी हुई है. हमें पता चला कि एक राजनीतिक दल ने किम को एक मंत्री का स्टिंग ऑपरेशन करने के लिए हायर किया. यह सौदा ६० लाख रुपये में तय हुआ था. चूंकि किम इस कला में माहिर है, इसलिए उक्त पार्टी ने किम पर भरोसा करके उसे ३० लाख रुपये एडवांस भी दे दिए. सौदा इस बात पर तय हुआ था कि किम उस मंत्री का अश्लील वीडियो बनाएगी. कमरे के अंदर का वीडियो और सारे फोन कॉल्स की रिकॉर्डिंग के साथ-साथ फोन पर हुई बातचीत के सारे टेक्स्ट्समुहैया कराएगी. क्या यह विषकन्या मंत्री जीको अपना शिकार बनाने में कामयाब रही, यह हम आपको आगे बताएंगे, लेकिन पहले किम के बारे में जानना जरूरी है.

किम राजस्थान की रहने वाली है, गरीब परिवार की है. पिता मुंबई में फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े थे. इसलिए वह मुंबई पहुंच गई. वहां उसके रिश्ते कुछ ऐसी महिलाओं से जुड़े, जो वेश्यावृत्ति में लिप्त थीं. उसे लगा कि इस पेशे में अच्छा पैसा है, इसलिए वह वेश्यावृत्ति से जुड़ गई. कुछ ही दिनों में उसने कुछ अन्य लड़कियों को भी अपने साथ जोड़ लिया और बाकायदा रैकेट चलाने लगी. किम का मायाजाल इतना फैल गया कि वह बड़े-बड़े नेताओं और अधिकारियों को लड़कियां सप्लाई करने लगी. बताया जाता है कि उसकी चपेट में एक गवर्नर और तीन मंत्री आ चुके हैं. किम लड़कियां सप्लाई करने के साथ- साथ ब्लैकमेलिंग में भी माहिर है. इसी दौरान वह एक राष्ट्रीय पार्टी के नेता के संपर्क में आई. किम ने उस नेता को इतना ब्लैकमेल किया कि नेता जीने खौफ में आकर उससे गंधर्व विवाह कर लिया. उक्त नेता पहले से शादीशुदा था. उसकी बीवी उसे छोडक़र चली गई. उसके बाद किम उस नेता के साथ ही रहने लगी. कुछ दिनों बाद उस नेता की मौत हो गई. किम का रैकेट फलता-फूलता रहा. उसने बड़े-बड़े नेताओं के साथ गहरे संबंध बना लिए. इसके बाद उसने राजनीति में आने की कोशिश की. वह एक राष्ट्रीय पार्टी की स्थानीय स्तर की पदाधिकारी भी चुनी गई. इसके बाद वह चुनाव में टिकट पाने के लिए वरिष्ठ नेताओं के दरवाजे खटखटाने लगी. इसी दौरान उसने एक मुख्यमंत्री के बेटे पर भी डोरे डालने की कोशिश की. मुख्यमंत्री को जब यह खबर मिली, तो उन्होंने किम को भगा दिया. क्योंकि, तब तक लोगों को पता चल चुका था कि किम बिना शादी किए किसी के साथ लिव-इन रिलेशन में रहती है. साथ ही उस पर डायवोर्स का केस चल रहा था. इतना ही नहीं, पति की संदिग्ध हालत में मौत हुई, जिसकी वजह भी किसी को पता नहीं चल सकी. मतलब यह कि किम की जिंदगी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है. हैरानी की बात यह है कि इस दौरान उसने पुलिस, मीडिया, राजनेताओं और अधिकारियों के बीच पैठ बना ली तथा कई बड़े लोगों की हमराज बन गई.

इसके बाद किम दिल्ली आ गई. यहां सत्ता के गलियारों में उसने एक कला प्रेमी, सामाजिक कार्यकर्ता और राजनेता का चोला पहन रखा है. यही वजह है कि उसके रिश्ते बड़े-बड़े नेताओं से हैं. लेकिन, उसका असली काम पहले से ज्यादा बड़ा हो चुका है. सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली में उसके दो सेंटर्स हैं, जहां से वह जिस्मफरोशी का धंधा चलाती है. ये सेंटर्स साउथ दिल्ली में हैं. किम के रैकेट से 25 से 30 लड़कियां जुड़ी हैं, जिन्हें वह नेताओं, अधिकारियों और व्यापारियों के पास भेजती है. उक्त तमाम लड़कियां फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया एकाउंट्स से जुड़ी हैं. वे अपने शिकार की तलाश में हाई प्रोफाइल लोगों से अश्लील बातें करके उन्हें लुभाती हैंै. इतना ही नहीं, बताया यह भी जाता है कि किम के रिश्ते बड़े-बड़े पुलिस अधिकारियों से भी हैं. दावा तो यह भी किया जाता है कि सरकारी एजेंसियां भी उसका इस्तेमाल लोगों को घेरने के लिए करती हैं. इसी दौरान वह एक राष्ट्रीय पार्टी के नेताओं से मिली और एक मंत्री को फंसाने की साजिश का हिस्सा बन गई. उस पार्टी ने किम को उक्त मंत्री को ट्रैप करने के लिए कहा, लेकिन उन तक पहुंचना मुश्किल था. इसलिए उसने एक ऐसा रास्ता चुना, जो वाकई हैरान करने वाला है. किम ने उक्त मंत्री तक पहुंचने के लिए एक गवर्नर की मदद ली. सूत्रों के मुताबिक, गवर्नर साहब न सिर्फ किम को बहुत पहले से जानते हैं, बल्कि खुद उसके शिकार भी बन चुके हैं. अगर ऐसा न होता, तो गवर्नर साहब किसी मंत्री के पास किसी महिला को क्यों भेजते?

गवर्नर साहब ने मंत्री जी के पास उसे भेजा और उसकी मदद करने की गुजारिश की. गवर्नर से बातचीत होने के बाद किम मंत्री जी के पास पहुंची. उसने वहां खुद को एक सामाजिक कार्यकर्ता बताया. इसके बाद वह उन्हें लगातार फोन करने लगी, प्रलोभन देती रही, साथ यात्रा करने की गुजारिश करती रही. लेकिन, वहां उसकी दाल नहीं गली. समय बीतता गया, लेकिन किम मंत्री जी को अपने चक्रव्यूह में फांसने में असफल रही. इस बीच जिन लोगों से किम ने सुपारी ली थी, वे लगातार मंत्री जी के वीडियो की डिमांड करने लगे. किम तीस लाख रुपये एडवांस ले चुकी थी, लेकिन सुबूत के नाम पर उसके पास कुछ नहीं था. किम ने सुबूत के तौर पर सिर्फ कुछ मैसेज दिए, वे भी कागज पर प्रिंट किए हुए, जिसे कोई भी कंप्यूटर पर टाइप करके तैयार कर सकता है. इतना ही नहीं, इस केस में एक ट्विस्ट तब आया, जब मंत्री जी को किम की असलियत का पता चल गया और उन्होंने उसे गड़बड़ करते रंगे हाथों पकड़ कर भगा दिया. किम बुरी तरह फंस गई. जिस राजनीतिक पार्टी ने उसे इस काम के लिए 60 लाख रुपये देने का वादा किया था, वह एडवांस में दिए गए 30 लाख रुपये वापस मांगने लगी. किम का सारा प्लान चौपट हो चुका था. सूत्रों के मुताबिक, काफी दबाव पडऩे पर किम ने 20 लाख रुपये लौटा दिए और कहा कि बाकी 10 लाख रुपये खर्च हो गए हैं. किम ने यह आश्वासन दिया है कि वह एक तकनीक का इस्तेमाल कर वीडियो तैयार कर लेगी, जिसके जरिये मंत्री जी को आसानी से बदनाम किया जा सकता है. सूत्रों की मानें, तो किम ने कई नेताओं को इसी तरह फांसने की कोशिश की. कई तो बच गए और कई उसके जाल में फंस चुके हैं. उसके जाल में फंसे नेता डरे हुए हैं. ऐसी विषकन्याओं के पास खोने के लिए कुछ भी नहीं है, लेकिन केवल उनके आरोप लगा देने मात्र से नेताओं की सारी इज्जत चली जाएगी. जब तक सच और झूठ का फैसला होगा, तब तक के लिए नेताओं की जिंदगी दांव पर लग जाएगी. विषकन्याएं इस बात को अच्छी तरह जानती हैं, इसलिए वे सार्वजनिक जीवन में सक्रिय लोगों को अपना निशाना बनाती हैं.

दिल्ली में ऐसा रैकेट चलाने वाली किम अकेली महिला नहीं है. इस धंधे का एक और बड़ा नाम डॉली (बदला हुआ नाम) का है, जो अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर भारतीय जनता पार्टी की कार्यकर्ता होने का दावा करती है. बड़े-बड़े नेताओं के साथ उसकी तस्वीरें हैं. वह दिल्ली के लाजपत नगर के साथ-साथ साउथ दिल्ली में सेक्स रैकेट चलाती है. पहले उसने पुलिस के साथ मिलकर यह काम शुरू किया. धीरे-धीरे पुलिस महकमे में उसकी पैठ बन गई और फिर उसका इस्तेमाल आईबी भी करने लगी. हकीकत यह है कि उसका काम इतना बड़ा हो गया कि उसने पुलिस और अन्य अधिकारियों के साथ रिश्ते बना लिए. वह लोगों को ब्लैकमेल करने के साथ-साथ सुपारी लेकर नेताओं और अधिकारियों को बदनाम करने में भी माहिर है. वह सोशल मीडिया का जमकर इस्तेमाल करती है, समय-समय पर वीडियो जारी करके बड़े-बड़े नेताओं को बदनाम भी करती है. हाल में एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वह गडकरी, विजय गोयल जैसे बड़े भाजपा नेताओं के नाम लेकर कई दावे करती दिख रही है. ओपिनियन पोस्ट ने जब पुलिस विभाग के सूत्रों से इस रैकेट के बारे में पड़ताल की, तो चौंकाने वाली बातें सामने आईं. पता चला कि उक्त महिला का इस्तेमाल पुलिस के साथ-साथ आईबी भी करती है. यही वजह है कि उसे न तो पुलिस का खौफ है और न कानून का डर. वह फोटोशॉप और एडिटिंग करके फर्जी तस्वीरें और वीडियो बनाकर नेताओं को ब्लैकमेल करती है. सूत्र बताते हैं कि उसने दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान विभिन्न पार्टियों से टिकट के लिए भी कोशिश की, लेकिन उसे सफलता नहीं मिली. अब लोकसभा चुनाव के दौरान भी वह राजनीति में दखल देने की कोशिश में जुटी है. राजनीतिक पार्टियों, पुलिस एवं नौकरशाहों के साथ रिश्तों और खुफिया एजेंसियों के साथ पैठ होने की वजह से उसके खिलाफ न कोई एक्शन लेता है और न कोई कानूनी कार्रवाई करता है. यही वजह है कि वह बड़े-बड़े लोगों को खुलेआम धमकियां देती है और उनकी इज्जत तार-तार करती है.

ओपिनियन पोस्ट की तहकीकात में पता चला है कि ऐसे कई रैकेट्स दिल्ली में सक्रिय हैं, जो विषकन्याओं का इस्तेमाल कर नामचीन लोगों को ब्लैकमेल करते हंै. हमें यह भी पता चला कि दिल्ली में शालिनी गैंग, सपना गैंग और बॉबी गैंग जैसे कई रैकेट्स हैं, जो जिस्मफरोशी का धंधा तो करते ही हैं, साथ ही राजनीतिक दलों, पुलिस एवं आईबी के इशारे पर विषकन्याएं भेजकर नेताओं और नौकरशाहों को अपना शिकार बनाते हैं. इनके काम करने का तरीका भी हैरान करने वाला है. ज्यादातर लड़कियां फोटोशॉप के जरिये अपनी तस्वीरों को सुंदर बनाकर सोशल मीडिया में अपलोड करती हैं. राजनीतिक और सामाजिक पोस्ट डालकर खुद को समाज सेविका अथवा एक्टिविस्ट की तरह पेश करती हैं और अपने शिकार को फंसाती हैं. वे होटल में मिलती हैं, नेताओं के घर तक पहुंचती हैं और खुफिया कैमरे से सब कुछ रिकॉर्ड करती हैं. ओपिनियन पोस्ट को मिले उनके व्हाट्सऐप चैट के ट्रांसक्रिप्शन से पता चला कि उक्त सभी विषकन्याओं के कारोबार में पुलिस अधिकारियों, राजनीतिक दलों और नेताओं की मिलीभगत है. कई बार तो पुलिस वाले ही विषकन्याओं को होटल जाने के लिए कहते हैं. लडक़ी की उम्र, लंबाई, शारीरिक बनावट और रंग कैसा हो, यह भी बताया जाता है. लड़कियां अपने शिकार के पास सोने की चेन पहन कर जाती हैं, जिसमें एक खास पेंडेंट लटक रहा होता है. इसी खास पेंडेंट में ही खुफिया कैमरा छिपा होता है, जो सारे वीडियो और ऑडियो रिकॉर्ड कर लेता है. नोट करने वाली बात यह है कि हर रैकेट का पैसा एक खास एकाउंट में जमा होता है, जिसका पासवर्ड रैकेट से जुड़े लोगों के पास होता है. पैसा उसी एकाउंट में जमा होता है और उसी से निकाला जाता है. इसलिए विषकन्याओं को पकडऩा मुश्किल ही नहीं, बल्कि नामुमकिन हो जाता है. यह सब राजनीति का एक खेल और अपने विरोधियों को फंसाने का हथियार बन चुका है. उक्त विषकन्याएं खुलेआम घूमती और अपने काम को अंजाम देती हैं, क्योंकि उनका उठना-बैठना विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के बड़े-बड़े नेताओं के साथ है.

ओपिनियन पोस्ट की तहकीकात में एक और रैकेट का खुलासा हुआ, जिसे राखी (बदला हुआ नाम) नामक महिला चलाती है. सोशल मीडिया में उसकी तस्वीरें देखकर ऐसा लगता है कि जैसे वह कोई मॉडल या फिल्म एक्ट्रेस हो. हकीकत यह है कि उसने अपने चेहरे की प्लास्टिक सर्जरी करा रखी है. तस्वीरों से उसकी उम्र का पता नहीं चलता. इस कारोबार में उसे महारानी के नाम से पुकारा जाता है. हैरानी इस बात की है कि वह एक बड़ी नेशनल पार्टी के यूथ विंग से जुड़ी है. सूत्रों के मुताबिक, राखी अब तक कई नेताओं और अधिकारियों को फंसा चुकी है. उसके पास कई नेताओं के वीडियो मौजूद हैं, जिन्हें वीडियो एडिटिंग की तकनीक से तैयार किया गया है. राखी ब्लैकमेलिंग के धंधे में सबसे अव्वल है, क्योंकि उसका रैकेट केवल हिंदुस्तान नहीं, बल्कि दुबई और यूरोप तक फैला है. राखी एक गरीब परिवार से थी. सबसे पहले उसने खुद को जिस्मफरोशी के धंधे में उतारा. देखते ही देखते उसने अपना रैकेट बनाया और दिल्ली, मुंबई, जयपुर समेत देश के दूसरे शहरों में विषकन्याओं का एक नेटवर्क बना डाला. राखी का नेटवर्क देश के साथ-साथ विदेशों में भी है. मुंबई में रैकेट चलाने के बाद वह अंडरवल्र्ड के संपर्क में आई और फिर उसने दुबई में काम शुरू कर दिया. जो अधिकारी और नेता देश में राखी की सेवाएं नहीं ले पाते, उनके लिए वह दुबई में इंतजाम करती थी. इसी तरह उसने दुनिया के कई देशों में अपने ठिकाने बना लिए. हमारी तहकीकात में पता चला कि राखी को आईबी भी इस्तेमाल करती है. लेकिन, वह इसके लिए आईबी से भी पैसे लेती है. चूंकि राखी के रिश्ते बड़े-बड़े नेताओं और अधिकारियों से हैं, इसलिए वह अब राजनीति में अपनी किस्मत आजमाना चाहती है. इसी वजह से वह राजनीतिक कार्यकर्ता बनकर अपना कारोबार आगे बढ़ा रही है.

ओपिनियन पोस्ट के खुलासे से हिंदुस्तान में राजनीति के स्तर का पता चलता है. जिन विरोधियों को राजनीतिक लड़ाई में हराया नहीं जा सकता है, उन्हें अब विषकन्याओं के जरिये बदनाम करने की कोशिश की जा रही है, ताकि वे सार्वजनिक जीवन से अलग हो जाएं. इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि पुलिस और एजेंसियां भी उक्त विषकन्याओं का इस्तेमाल कर रही हैं. कई विषकन्याएं तो अब राजनीतिक पार्टियों का हिस्सा बन गई हैं. उनके बारे में नेताओं, पुलिस और अन्य आला अधिकारियों को सब कुछ पता है, लेकिन फिर भी वे खुलेआम राजनीति के क्षेत्र में विचरण कर रही हैं. अगर ऐसा ही चलता रहा, तो यकीन मानिए कि वह दिन दूर नहीं, जब चुनाव के दौरान राजनीतिक पार्टियां अपने विरोधियों के अश्लील वीडियो-ऑडियो रिलीज करना शुरू कर देंगी और वह दिन देश के लोकतंत्र के लिए सबसे शर्मनाक होगा.

डीप-फेक तकनीक : ब्लैकमेलिंग का नया हथियार

अभी तक सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली फर्जी खबरों, फोटोशॉप की हुई तस्वीरों एवं डॉक्टर्ड वीडियो को व्यक्तिगत आजादी और लोकतंत्र के लिए खतरा माना जा रहा था, लेकिन ऐसी फर्जी चीजों की हकीकत से लोग देर-सवेर अवगत हो जाते थे. फिलहाल बाजार में एक ऐसी तकनीक बहुत तेजी से फैल रही है, जिसके जरिये ऐसे फर्जी वीडियो बनाए जा सकते हैं, जिन्हें गलत साबित करना आने वाले दिनों में नामुमकिन हो जाएगा. यह तकनीक है डीप-फेक की. यह तकनीक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करके एक व्यक्ति का चेहरा या शरीर किसी दूसरे व्यक्ति के चेहरे या शरीर पर इस तरह लगा सकती है कि असली और नकली की पहचान मिट जाए. जिस तरह फोटोशॉप, वीडियो एडिटिंग और सोशल मीडिया का आविष्कार अच्छे कामों के लिए हुआ था, उसी तरह डीप-फेक तकनीक का ईजाद भी अच्छी नीयत के साथ और जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए हुआ था. शुरुआत में इस तकनीक का इस्तेमाल फिल्म इंडस्ट्री में हुआ था. मिसाल के तौर पर साल 2016 में बनी हॉलीवुड फिल्म ‘रोग वन- ए स्टार वार्स स्टोरी’ में अभिनेताओं के चेहरों की अदला-बदली की गई थी. उसी तरह भारतीय क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी के जीवन पर बनी फिल्म ‘धोनी’ में भी इस वीडियो सिंथेसिस तकनीक का इस्तेमाल करके क्रिकेट मैचों को विश्वसनीय ढंग से दिखाने के लिए हीरो सुशांत राजपूत का चेहरा धोनी के शरीर पर लगाया गया है. फिल्मों तक तो बात ठीक थी, लेकिन अगर वास्तविक जीवन में ऐसी तकनीक का इस्तेमाल होने लगे, तो उसका दुरुपयोग होना लाजिमी है. इस तकनीक का शिकार कई मशहूर सेलिब्रिटीज और बिजनेसमैन बन चुके हैं.

इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के इस युग में हर व्यक्ति के हाथ में मोबाइल फोन है, जिस पर वह एक ‘एप्प’ डाउनलोड करके किसी का भी अश्लील वीडियो बना सकता है और उसे वायरल भी कर सकता है. यह स्थिति ऐसे में और भी खतरनाक हो जाती है, जब डीप-फेक का सॉफ्टवेयर इंटरनेट पर आसानी से उपलब्ध हो और जिसमें कंप्यूटर का कोई भी जानकार बदलाव कर सकता हो. मिसाल के तौर पर इंटरनेट पर आसानी से उपलब्ध ‘फेकएप्प’ की मदद से कोई भी यूजर फेक वीडियो बना सकता है. लेकिन साइबर क्राइम के जानकारों के मुताबिक, सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि मशीन लर्निंग अलगोरिदम की मदद से ऐसे फर्जी वीडियो बनाए जा सकते हैं, जिन्हें खाली आंख से नहीं पहचाना जा सकता. जानकारों का यह भी कहना है कि आने वाले दिनों में डीप-फेक तकनीक इतनी उन्नत हो जाएगी कि मशीन की सहायता से भी असली और नकली को पहचानना मुश्किल हो जाएगा. जाहिर है, डीप-फेक तकनीक का इस्तेमाल कर ब्लैकमेलर्स किसी सेलिब्रिटी, नेता या किसी बड़े व्यापारी का अश्लील वीडियो बनाकर उसे ब्लैकमेल कर सकते हैं. लेकिन, यह स्थिति उस समय खतरनाक हो जाएगी, जब दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्षों के फर्जी वीडियो जारी होने लगेंगे. यही नहीं, चुनावों के दौरान भी इस तकनीक का बेजा इस्तेमाल हो सकता है. जाहिर है, यह स्थिति व्यक्तिगत आजादी के लिए तो खतरा है ही, लोकतंत्र के लिए भी खतरनाक है.

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