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भाजपा के डर से एक हो रहा विपक्ष

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर सरकार का ही नहीं 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी की स्थिति को 2014 से बेहतर करने या कम से कम उसे बरकरार रखने का भी दायित्व है। सारे विपक्षी दलों को लगता है कि यदि उत्तर प्रदेश में भाजपा को रोक दिया तो राष्ट्रीय स्तर पर नरेन्द्र मोदी और भाजपा को रोकना आसान हो जाएगा। इस नाते सबकी नजर उत्तर प्रदेश पर ही होगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इससे बिल्कुल विचलित नहीं हैं। आत्म विश्वास से भरपूर योगी को भाजपा के बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है। उप चुनावों की हार की क्लांति अब उनके चेहरे पर नजर नहीं आती। जिस समय हमारी बात हुई वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लखनऊ दौरे के आयोजन में व्यस्त थे। प्रधानमंत्री साठ हजार करोड़ के निवेश की विकास परियोजनाओं के उद्घाटन के लिए आने वाले थे। यह निवेश इसी साल फरवरी में आयोजित इनवेस्टर समिट में उद्योगपतियों द्वारा किए गए निवेश के वादों को अमलीजामा पहनाने के लिए है। किसी राज्य में इतने कम समय (करीब चार महीने) में निवेश का वादा जमीन पर उतर आए, ऐसा हुआ नहीं है। मुख्यमंत्री को अपनी सरकार, केंद्र सरकार के विकास कार्यक्रमों और विचारधारा पर पूरा यकीन है। प्रस्तुत हैं उनसे वरिष्ठ पत्रकार और ओपिनियन पोस्ट के संपादक प्रदीप सिंह की बातचीत के अंश।

आगामी लोकसभा चुनावों की दृष्टि से उत्तर प्रदेश पर सबकी नजर है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा है कि यदि सारे विपक्षी दल मिलकर उत्तर प्रदेश में भाजपा को हरा दें तो मोदी को फिर से सत्ता में आने से रोका जा सकता है।
उत्तर प्रदेश में भाजपा बेहतरीन प्रदर्शन करेगी। प्रधानमंत्री की उपलब्धियों, केंद्र सरकार की योजनाओं को सफलापूर्वक राज्य में लागू करने से भाजपा अपने दम पर पूर्ण बहुमत लाएगी। महत्वपूर्ण सवाल है कि विपक्ष के गठबंधन का नेता कौन होगा? क्या ममता राहुल गांधी को नेता मान लेंगी या राहुल गांधी मायावती को नेता मान लेंगे? कौन किसको नेता मानने को तैयार होगा। वास्तव में सबकी अपनी ढपली अपना राग है। ये लोग राजनीति में सेवा करने के लिए नहीं आए हैं। इनके लिए राजनीति सौदेबाजी का धंधा है। ये चाहते हैं कि मजबूत नहीं मजबूर सरकार बने। ये नहीं चाहते कि देश सक्षम और समृद्ध राष्ट्र के रूप में खड़ा हो सके। अपनी प्रवृत्ति के अनुकूल ये देश को पीछे ले जाना चाहते हैं। 2019 का लोकसभा चुनाव विकास, सुशासन और राष्ट्रवाद के मुद्दे पर लड़ा जाएगा।

उत्तर प्रदेश में यदि समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, कांग्रेस और राष्ट्रीय लोकदल का महागठबंधन बनता है तो अंक गणित में यह भाजपा से आगे है। उप चुनाव के नतीजे से तो यही प्रमाणित होता है।
अगर उप चुनाव के नतीजे के आधार पर विपक्ष उम्मीद लगाए है तो वह गलतफहमी में है। उप चुनाव में भाजपा के विरोध में ज्यादातर मुद्दे स्थानीय थे। आम चुनाव राष्ट्रीय मुद्दों पर लड़ा जाएगा। सरकार के विकास के कार्यक्रम चुनावी मुद्दा बनेंगे। आम चुनाव की उप चुनावों से तुलना नहीं हो सकती।

लेकिन बिहार में महागठबंधन कामयाब रहा।
यहां (उत्तर प्रदेश) ये लोग कुछ नहीं कर पाएंगे। पहले ये लोग नेतृत्व का मुद्दा हल कर लें। मुझे पूरी उम्मीद है कि उत्तर प्रदेश में हम पचहत्तर लोकसभा सीटें जीतेंगे।
भाजपा पर विपक्षी दलों का आरोप है कि वह काम की बजाय साम्प्रदायिकता के मुद्दे पर चुनाव लड़ना चाहती है।
सरकार अपनी उपलब्धियों के आधार पर वोट मांगेगी। भाजपा कभी जाति और मजहब की राजनीति नहीं करती। हमने हमेशा विकास और सुशासन की बात की है उसी पर आगे बढ़ेंगे। जो लोग राष्ट्र की कीमत पर राजनीति करते हैं वे हमसे सवाल कर रहे हैं। क्या तुष्टीकरण से साम्प्रदायिक सौहार्द बनता है। राहुल गांधी कहते हैं कि कांग्रेस मुसलमानों की पार्टी है। पश्चिम बंगाल में हिंदुओं को पूजा से वंचित किया जा रहा है। तीन तलाक और महिला आरक्षण पर सपा, बसपा और कांग्रेस का कौन सा चेहरा है। भाजपा ने लोगों को जाति मजहब में कभी नहीं बांटा। हम सबकी सुरक्षा और सबको साथ लेकर चलने में विश्वास करते हैं।

विपक्षी दलों का कहना है कि गो रक्षा के नाम पर जो लिंचिंग हो रही है वह साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण के लिए की जा रही है।
देखिए मेरा मानना है कि लिंचिंग की घटनाओं को ज्यादा तूल दिया जा रहा है। यह राज्य सरकारों का कर्तव्य है कि ऐसी घटनाओं को रोकें। ऐसा नहीं है कि यह पहली बार हो रहा है। 1984 में क्या हुआ था? कांग्रेस और उसके साथी दलों का कार्यकाल ऐसी घटनाओं से ज्यादा दागदार रहा है। भाजपा शासित राज्यों में इस पर अंकुश लगा है। सुरक्षा का दायित्व सरकार का है लेकिन सबको चाहिए कि एक दूसरे की भावनाओं का सम्मान करें। उत्तर प्रदेश में अवैध बूचड़खाने नहीं रोकते तो लिंचिग की सबसे ज्यादा घटनाएं उत्तर प्रदेश में होतीं। पर उत्तर प्रदेश में लिंचिंग की एक भी घटना नहीं हुई है।

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उत्तर प्रदेश में पुलिस एनकाउंटर पर सवाल उठ रहे हैं। विपक्षी दलों के अलावा सुप्रीम कोर्ट ने भी इसका संज्ञान लिया है।
करीब सवा साल पहले जब हम सत्ता में आए तो अराजकता चरम पर थी। संगठित अपराध- लूट, हत्या, अपहरण, बलात्कार और दंगे उत्तर प्रदेश की पहचान बन गए थे। यहां तक कि पुलिस भी सुरक्षित नहीं थी। क्योंकि गुंडे सत्ताधारी दल से जुड़े थे। उन्हें सरकार का संरक्षण था। यहां तक कि पुलिस भी सुरक्षित नहीं थी। स्कूल कालजों के बाहर लड़कियों का निकलना कठिन था। अब आप देखिए कितना अंतर आया है। हम लोगों ने स्पष्ट किया कि सबको सुरक्षा देंगे लेकिन किसी को कानून हाथ में नहीं लेने देंगे। पुलिस को स्पष्ट निर्देश है कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन्स और मानवाधिकार का पालन करते हुए लोगों को सुरक्षा दी जाए और अपराधियों से निबटने का भी काम हो। उत्तर प्रदेश पुलिस ने इस दौरान बेहतरीन प्रदर्शन किया है। आपसी रंजिश से होने वाले अपराध को छोड़ दें तो उत्तर प्रदेश में अपराध में भारी कमी आई है। विश्वास और सुरक्षा का माहौल बना है। यह पुलिस की कामयाबी है। जो लोग एनकाउंटर पर सवाल उठा रहे हैं वे ज्यादातर इन अपराधियों के हितैषी हैं, आम जनता के नहीं।

आप कह रहे हैं कि लोकसभा चुनाव में सरकार की उपलब्धियों को लेकर जाएंगे। आपकी सरकार का गठन हुए सवा साल से ज्यादा हो गए हैं। प्रदेश सरकार की ऐसी कौन सी उपलब्धियां हैं जिन्हें लेकर आप चुनाव में जाएंगे।
हम लोगों ने सत्ता में आते ही केंद्र सरकार की सभी योजनाओं को जाति और मजहब के आधार पर भेदभाव के बिना लागू करना शुरू किया। एक साल के अंदर ही किसानों के खाते में एक लाख करोड़ से ज्यादा की राशि पहुंची है। फसली कर्ज की माफी, गन्ना के बकाये का भुगतान, समर्थन मूल्य पर अनाजों की बड़े पैमाने पर खरीद पहली बार हुई है। अखिलेश यादव ने गन्ना किसानों का पांच साल में चौदह हजार करोड़ का भुगतान करवाया। हमने 2017-18 में चौंतीस हजार करोड़ का भुगतान करवाया। यही वजह है कि किसानों को अपने गन्ने में आग नहीं लगानी पड़ी। गन्ने की खेती का रकबा बढ़ गया पर गन्ना किसानों के भुगतान में दिक्कत नहीं हुई। लम्बे समय से अटकी हुई नौ सिंचाई परियोजनाओं को पूरा कराया। इनमें से एक बाण गंगा परियोजना को 1973 में योजना आयोग ने मंजूरी दी थी। 1978 में मोरार जी देसाई ने शिलान्यास किया। मध्य प्रदेश ने अपने हिस्से का काम 2006 में पूरा कर लिया लेकिन उत्तर प्रदेश का काम अटका रहा। हमने एक साल में पूरा किया। इससे एक लाख सत्तर हजार किसानों को लाभ होगा।
इसी तरह प्रधानमंत्री आवास योजना में अखिलेश सरकार ने कुछ नहीं किया। हमने चार लाख बारह हजार मकान शहरी और आठ लाख पचासी हजार मकान ग्रामीण इलाकों में बनवाए। सपा सरकार ने स्वच्छता अभियान के तहत अपने पूरे कार्यकाल में दस लाख शौचालय बनाए। हमने अब तक एक करोड़ तीन लाख शौचालय बनवाए हैं। छह लाख युवाओं को कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया गया। इनमें से ढाई लाख को रोजगार मिल गया है। बेसिक शिक्षा विद्यालयों में एक लाख चौंतीस हजार बच्चे पढ़ते थे। अब एक करोड़ सतहत्तर लाख बच्चे पढ़ रहे हैं। प्रदेश में पहली बार नकल विहीन परीक्षा करवाई। नए हवाई अड्डे बन रहे हैं। जो पूर्वांचल एक्सप्रेस वे अखिलेश यादव पंद्रह हजार करोड़ में बनवाना चाहते थे वह ग्यारह हजार करोड़ में बन रहा है। कोई निवेशक उत्तर प्रदेश में आना नहीं चाहता था। जो थे वे भी बाहर जाने की तैयारी कर रहे थे। अब वही लोग अपना निवेश बढ़ा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने साठ हजार करोड़ की विकास योजनाओं का शिलान्यास किया है। पच्चीस तीस हजार करोड़ की परियोजनाएं अभी पाइप लाइन में हैं। बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे बनने वाला है।

क्या नौकरशाही काम के रास्ते का रोड़ा बन रही है?
देखिए नौकरशाही तो वही है। लेकिन काम के तरीके में बदलाव आया है। यही नौकरशाही थी जब पिछली सरकार के समय बिजली सिर्फ चार जिलों में आती थी। अब सभी जिलों में आ रही है। सबको समझ में आ गया है कि यदि उत्तर प्रदेश में रहना है तो काम करना पड़ेगा।

आपने अपनी सरकार की उपलब्धियां तो बहुत सारी गिना दीं। पर क्या चुनाव सचमुच विकास के मुद्दे पर लड़े जाते हैं या आखिर में वही धार्मिक मुद्दे आ जाएंगे?
हम हर तरीके से लड़ने के लिए तैयार हैं। विकास समाज की आवश्यकता है। वैचारिक प्रतिबद्धता के साथ विकास भी है। वास्तव में भाजपा के डर से अपना अस्तित्व बचाने के लिए सारे विपक्षी दल एक हो रहे हैं।

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