आदिवासियों की पहली पसंद भाजपा- गणपत भाई वसावा

गुजरात के आदिवासी इलाकों पर भाजपा की खास नजर है। राज्य में अनुसूचित जनजाति के लिए सत्ताइस सीटें आरक्षित हैं। इनमें से ज्यादातर दक्षिण गुजरात में हैं। आदिवासी इलाकों में हुए विकास कार्यों से पार्टी को उम्मीद है कि इन इलाकों में उसे अधिक कामयाबी मिलेगी। प्रदेश के आदिवासी कल्याण मंत्री गणपत भाई वसावा से अभिषेक रंजन सिंह की बातचीत।

भाजपा इस बार आदिवासी इलाकों पर खास ध्यान दे रही है। पार्टी अध्यक्ष अमित शाह आदिवासियों के साथ भोजन कर रहे हैं। इसका कितना लाभ मिलेगा?
आदिवासी मतदाताओं को पहले कांग्रेस का वोट बैंक माना जाता था। लेकिन गुजरात, झारखंड और छत्तीसगढ़ में भाजपा ने इस भ्रम को तोड़ दिया। आजादी के बाद कांग्रेस ने देश में सबसे ज्यादा राज किया और उसने मुसलमानों की तरह आदिवासियों को केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया। गुजरात में आदिवासी बहुल चौदह जिले हैं और करीब चार हजार गांवों में आदिवासी समुदाय के लोग रहते हैं। आदिवासियों की कुल संख्या राज्य में नब्बे लाख है। कांग्रेस के शासन में आदिवासी गांवों में न तो बिजली थी और न ही सड़क और पीने का शुद्ध पानी। नरेंद्र भाई मोदी के मुख्यमंत्री बनने के बाद आदिवासी बहुल जिलों पर विशेष ध्यान दिया गया। प्रत्येक गांव को सड़कों से जिला मुख्यालय से जोड़ा गया। चौबीस घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की गई। कांग्रेस के शासन में आदिवासी गांवों में तीन फीसद लोगों को नलों के जरिये पानी मिलता था लेकिन भाजपा के शासन में 56 फीसद लोगों को नलों से पानी की आपूर्ति हो रही है। कांग्रेस के समय पढ़ाई बीच में छोड़ने वाले आदिवासी छात्रों की दर करीब चालीस फीसद थी। जबकि भाजपा के शासन में यह लगभग खत्म हो चुकी है। हमारी सरकार में आदिवासियों के बीच तेरह लाख एकड़ कृषि भूमि वितरित की गई है। सबसे खास बात यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई उज्जवला योजना का लाभ आदिवासी माताओं एवं बहनों को मिला है। गुजरात की नब्बे फीसद आदिवासी परिवारों के रसोई घरों में एलपीजी सिलिंडर पहुंच चुका है। देश के दूसरे राज्यों की तुलना में गुजरात के आदिवासियों का जीवन स्तर काफी ऊंचा है। हमें इन इलाकों की ज्यादातर सीटें मिलेंगी।

राहुल गांधी ने अपने चुनावी अभियान की शुरुआत आदिवासी बहुल वलसाड जिले से की। उन्हें सुनने वालों की भीड़ भी काफी थी, इसे भाजपा के लिए कितनी चुनौती मानते हैं?
राहुल गांधी बतौर कांग्रेस उपाध्यक्ष अब तक सत्ताइस चुनावों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। पंजाब को छोड़कर बाकी सभी राज्यों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। उनकी अगली हार गुजरात में होगी। राहुल गांधी जितना अधिक गुजरात आएंगे भाजपा को उतना ही फायदा होगा। वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जितनी आलोचना करेंगे मतदाता हमारे पक्ष में उतना ही गोलबंद होंगे। आजकल वे जीएसटी का झुनझुना बजा रहे हैं। इससे पहले वे नोटबंदी पर हाय तौबा मचा रहे थे। उत्तर प्रदेश के चुनावी नतीजों ने उन्हें आईना दिखा दिया और अब गुजरात की बारी है। प्रधानमंत्री मोदी का रास्ता न्याय और विकास का है। इस चुनाव में भाजपा डेढ़ सौ सीटों पर जीत दर्ज करेगी। गुजरात के आदिवासी बहुल सीटों पर भाजपा लगातार मजबूत हो रही है। अधिकांश सीटों पर भाजपा की जीत पक्की है।

दक्षिण गुजरात में किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिलता। कांग्रेस का आरोप है कि किसानों के हिस्से का पानी कल-कारखानों को मिल रहा है। इस आरोप में कितनी सच्चाई है?
दक्षिण गुजरात में नर्मदा और उकाई दो महत्वपूर्ण नदियां हैं। इन पर दो डैम भी बने हैं। दो साल पहले 600 करोड़ रुपये खर्च कर इन डैमों का नवीनीकरण किया गया। पूरे राज्य के किसानों का 250 करोड़ रुपये का बिजली बिल माफ किया गया। दक्षिण गुजरात के कई जिलों के भूमिगत पानी में आयरन और आर्सेनिक की मात्रा अधिक है। लोगों को पीने के लिए शुद्ध पानी मिले, इस बाबत हमारी सरकार ने सभी गांवों में आरओ प्लांट स्थापित किए हैं। कांग्रेस का यह आरोप निराधार है कि किसानों सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल रहा है। साल 1964 में उकाऊ डैम बना था। कांग्रेस इतने वर्षों तक सत्ता में रही लेकिन डैम के जल ग्रहण क्षमता का कोई विस्तार नहीं किया गया। कांग्रेस के समय में आदिवासी गांवों में सड़कें नहीं थी लेकिन आज हर गांव में पक्की सड़कें और पक्के घर हैं।

आदिवासी क्षेत्रों में धर्मांतरण एक बड़ी समस्या है। गुजरात में क्या स्थिति है?
गुजरात में धर्मांतरण जैसी कोई समस्या नहीं है। यहां के आदिवासी स्वयं को हिंदू मानते हैं और सनातन धर्म में आस्था रखते हैं। दो-ढाई दशक पहले धर्मांतरण की कुछ घटनाएं सामने आई थी। भाजपा की सरकार में आदिवासी इलाकों में शिक्षा पर विशेष बल दिया गया है। गांवों में एकलव्य मॉडल और स्कूल वनवासी कल्याण कार्यक्रम काफी सफल रहा है। लालच और प्रलोभन देकर आदिवासियों का धर्मांतरण किया जाता है। लेकिन गुजरात के आदिवासियों के पास खेती योग्य जमीनें, शिक्षा और रोजगार हैं।

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