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जिन्दगी हाशिये पर -हां मम्मी, हां आंटी, हां दीदी….

सत्यदेव त्रिपाठी सुबह 8 बजे अपने घर से निकलने के बाद से रात 8 बजे वापस घर पहुंचने तक उसकी जुबान से हां मम्मी, हां आंटी, हां दीदी… के अलावा और कोई शब्द तब तक नहीं निकलता जब तक उससे कुछ पूछा न जाए...

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