Loksabha Election

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फिर अपराजेय साबित हुए पटनायक

23 मई की सुबह जब उत्सुकता भरे वातावरण में मतगणना शुरू हुई, तो भाजपा समर्थकों समेत कई लोग यह मानकर चल रहे थे कि शेष भारत की तरह यहां भी मोदी सुनामी का असर दिखेगा. लेकिन, वोटों की गिनती खत्म होते-होते म...

आप क्यों हो गई साफ

एक तथ्य यह भी है कि पार्टी के कई विधायकों ने लोकसभा चुनाव से खुद को दूर रखा. उन्होंने उम्मीदवारों को वह समर्थन नहीं दिया, जिसकी जरूरत थी. इसकी वजह यह बताई जा रही है कि ऐसे विधायक अपने नेता यानी अरविंद...

ऐसे ही नेता चुन के आएंगे!

ओपिनियन पोस्ट का यह अंक जब आप पढ़ रहे होंगे, तब लोकतंत्र का महोत्सव समाप्त हो चुका होगा. जीत का सर्टिफिकेट लेकर 543 सांसद दिल्ली की ओर रवाना हो चुके होंगे. सरकार बनाने की कवायद चल रही होगी. लेकिन इन स...

विपक्षी एकता हुई निजी महत्वाकांक्षाओं का शिकार

मजबूत विपक्ष मजबूत लोकतंत्र की एक आवश्यक शर्त है. सिर्फ इसलिए नहीं कि सत्ता पर अंकुश बनाए रखना जरूरी है. इसलिए भी कि सत्ता से सवाल करते रहने का काम भी विपक्ष का ही है. लेकिन, भारतीय लोकतंत्र में आम तौ...

वोट चाहिए मुसलमान नहीं!

साल 2015 में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद एक इंटरव्यू में एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा था, हम सेक्युलरिज्म के कुली बनते-बनते थक चुके हैं. ओवैसी की यह प्रतिक्रिया इस सवाल पर आई थी कि उनक...

चुनावी बिसात पर सजने लगे मोहरे

झारखंड में मुख्य मुकाबला यूं तो महागठबंधन और एनडीए के बीच है, लेकिन ‘जनमत’ नामक मोर्चा नया गुल खिलाने की तैयारी में है, जिसमें झारखंड नामधारी दलों का जमावड़ा है तथा जिसके प्रत्याशी सिर्फ वोट काटने के...

भाजपा की राह आसान नहीं

दिल्ली की सत्ता तक पहुंचने के लिए किसी भी पार्टी को कुछ राज्यों में बेहतरीन प्रदर्शन करना जरूरी है. भाजपा को अगर फिर से सत्ता में वापसी करनी है,  तो उसे उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल एवं ओ...

बुद्धिजीवी वर्ग मोदी के साथ

वक्त बदलता है, धारणाएं बदलती हैं. बात बहुत पुरानी नहीं है, 2014 के चुनाव से पहले नरेंद्र मोदी को भाजपा प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने जा रही थी, उस समय अकादमिक जगत ने उनकी उम्मीदवारी के खिलाफ...

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