बयान नहीं, बयाना

मेरे दिमाग में तो विकास की कई योजनाएं हैं. वैसे आप क्या चाहते हैं, आदेश करें, मैं तो आपका सेवक हूं. मतदाता की तल्खी के बावजूद उम्मीदवार की विनम्रता बरकरार थी. अगर आपकी पार्टी को बहुमत मिल गया, तो प्रधानमंत्री किसे बनाओगे? भइया लाल ने नया सवाल दागा.

मियां मानेंगे नहीं. जब देखो, तब बयाना लिए फिरते हैं, भइया लाल ने पार्क में टहलते हुए मुझसे अपनी चिंता जाहिर की.

कौन मियां दादा? मैंने पूछा.

ज्यादा बनो मत, देश-दुनिया में बवाल मचा पड़ा है. अदालत की सख्ती देख चुनाव आयोग ने 72 घंटे के लिए बोलती बंद कर दी. एक तुम हो कि पूछ रहे, कौन मियां? भइया लाल ने मुझे लताड़ा.

अच्छा, आप रामपुर वाले भाई जान की बात कर रहे हैं, मैंने उन्हें बैलेंस करने की कोशिश की.

हां, तुम्हारे भाई जान यानी आजम खान उर्फ  नवाब-ए-रामपुर की तारीफ  में कसीदे पढ़ रहा हूं प्यारे. भइया लाल ने अपनी टोन में आते हुए कहा.

नवाब अब कहां हैं, कभी थे. अब नेता हैं, बड़े वाले ‘नेता जी’ के प्राण प्यारे छोटे वाले ‘नेता जी’ के चहेते. मैंने भइया लाल को छेड़ा.

नहीं, वह खानदानी नवाब हैं, जैसे खानदानी राजा होते हैं और जैसे कि तुम जन्मजात अहमक हो, समझे! भइया लाल बरस पड़े.

खैर, फिसल गई जुबान उनकी. आखिर है तो जुबान ही. नजरें फिसल जाती हैं और तो और, आदमी फिसल जाता है. जो फिसलता है, वह उठता भी है. गिरते तो शहसवार हैं मैदान-ए-जंग में. फिसलन तो अपने देश की फितरत है, दादा. भाई जान भी संभल कर खड़े हो जाएंगे. इंशा अल्लाह. मैंने बात आगे बढ़ाई.

साल 1993 में आई फिल्म ‘खलनायक’ याद है तुम्हें? … के पीछे क्या है, चुनरी के नीचे… आनंद बख्शी साहब कैसे निशाने पर आ गए थे सबके. तुम्हारे भाई जान फिल्में नहीं देखते क्या? भइया लाल

जारी थे.

चिंता तो मुझे भी है. पता नहीं, यह ताकने-झांकने की लत कहां और कैसे पड़ गई भाई जान को?

वहीं अमेरिका में, जहां एयरपोर्ट पर जामा तलाशी के नाम पर तुम्हारे भाई जान का पायजामा उतरवा लिया था सिक्योरिटी वालों ने. तबसे खार खाए बैठे थे, किसी के … का रंग बताकर रहेंगे. भइया लाल फायर थे.

किसी ने विरोध भी नहीं किया इस अमेरिकी गुस्ताखी का? मैंने सवाल दागा.

किया था, शिवपाल चाचा ने. बोले, अब हम अमेरिका नहीं जाएंगे.

फिर क्या हुआ?

होना क्या था! छोटे वाले ‘नेता जी’ ने कहा कि यह उत्तर प्रदेश का अपमान है. पहली लाइन के रिएक्शन के बाद दूसरी लाइन चली, उसके बाद तीसरी, फिर जिला स्तर, मुहल्ला स्तर पर जुबानी फायर होते रहे. भइया लाल ने बताया.

बड़े वाले ‘नेता जी’ कुछ नहीं बोले?

उन्होंने अपना स्टैंड तुरंत साफ  कर दिया कि वह तब तक अमेरिका नहीं जाएंगे, जब तक प्रधानमंत्री या दोबारा रक्षा मंत्री नहीं बन जाते.

लेकिन दादा, भाई जान का अगला स्टैंड क्या होगा? मैंने फिर सवाल दागा.

भाई जान तो तबसे स्टैंड पर हैं. जब कभी दुनिया का नक्शा देखते हैं, तो सबसे पहले अमेरिका वाले हिस्से पर तौलिया बिछा देते हैं, ताकि उधर नजर ही न पड़े. ताजा मामला तो तुम्हें समझा ही दिया है, पुत्तर.

मतलब?

शायद तुम्हारे भाई जान ने ठान ली है कि जिसे पाओ, उसे हलाल करो. जहां मौका दिखे, बवाल करो.

 

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