शास्त्री प्रभाव,  धौनी और विराट में जंग

नई दिल्ली।

भारतीय कोच रवि शास्त्री ने टीम के साथ दूसरे कार्यकाल में खिलाड़ियों की तैयारी के स्टाइल में थोड़ा बदलाव किया है, जिसका तुरंत प्रभाव देखा जा सकता है। कोच बनते ही उन्‍होंने ऐसा दांव खेला है कि  धौनी और विराट के बीच जंग शुरू हो गई है।

अभी तो शास्त्री के कार्यकाल में टीम इंडिया ने सिर्फ एक टेस्ट मैच खेला है और इतने कम समय में ही शास्त्री ने अपनी पैंतरेबाज़ी शुरू कर दी है। रवि शास्त्री ने भारतीय टीम के मौजूदा कप्तान विराट कोहली और पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धौनी के बीच एक तुलना कर दी है।

धौनी दुनिया के एकलौते ऐसे कप्तान हैं, जिन्होंने आईसीसी की तीनों ट्रॉफी अपने नाम की है, जबकि विराट ने वनडे की कमान इसी साल संभाली है। टीम इंडिया के कोच रवि शास्त्री ने कहा है कि एमएस धौनी महानतम कप्तान हैं लेकिन विराट कोहली बतौर कप्तान उनकी उपलब्धियों की बराबरी कर सकते हैं।

इसके साथ ही शास्त्री ने कहा कि कोहली में मौजूदा पीढ़ी का महानतम कप्तान बनने की क्षमता है, लेकिन उन्हें इसके लिए किसी ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है। धौनी के नेतृत्व में टीम इंडिया ने 2007 का वर्ल्ड टी-20 जीता। इसके बाद भारतीय टीम ने 2011 में दूसरी बार विश्व कप का खिताब अपने नाम किया।  तब भी टीम इंडिया की कमान धौनी के हाथों में ही थी।

2013 में भारतीय टीम चैंपियंस ट्रॉफी की चैंपियन बनी, तब भी इस टीम को माही ही लीड कर रहे थे। इतना ही नहीं धौनी की कप्तानी में ही टीम इंडिया टेस्ट में पहली बार नंबर वन बनी थी। विराट कोहली ने भी अपनी कप्तानी का आगाज़ जबरदस्त किया है। अगर उन कप्तानों की बात करें जिन्होंने 20 या उससे ज़्यादा टेस्ट में टीम इंडिया का नेतृत्व किया है तो कोहली का जीत प्रतिशत सबसे ज़्यादा है।

विराट ने 27 टेस्ट में टीम इंडिया की कमान संभाली है, जिसमें से 17 मैचों में भारत ने जीत दर्ज़ की और उनका जीत प्रतिशत 62.96 फीसदी है। वहीं धौनी ने 60 टेस्ट मैचों में भारत की कप्तानी की और वो 27 मैचों में भारत को जीत दिला सके और उनका जीत प्रतिशत 45 फीसदी रहा।

तीसरे नंबर पर सौरव गांगुली हैं जिन्होंने 49 टेस्ट में भारतीय टीम का नेतृत्व किया और 21 टेस्ट में जीत हासिल की और उनका जीत प्रतिशत 42.85 फीसदी रहा।

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