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2018 में सात रास्तों से पा सकते हैं भागते दौड़ते संसार में शांति : श्रीश्री रविशंकर

श्री श्री रविशंकर के नववर्ष 2018 पर सन्देश के सम्पादित अंश

जैसे ही केलेंडर का माह बदलेगा और नया साल आ जाएगा वैसे ही आमतौर पर हम अपने परिवार, मित्रों और दुनिया में शांति की कामना करने लगते हैं। एक ऐसी शांति जिसे कहां से प्राप्त किया जा सकता है, इसका सामान्यतः हमें पता ही नहीं होता है।

क्या वह परम शांति हमें हिमालय की कंदराओं में जाकर मिलेगी? नहीं ऐसा नहीं है। शांति का मतलब यह भी नहीं होता है कि हिंसा या विवाद नहीं है, वहां शांति है। वास्तव में शांति का अस्तित्व हमारे अंदर ही है, जो हमारा अभिन्न हिस्सा है। हमें बस इतना करना है कि हमें हमारा आंतरिक स्वरूप बदलना है और जीवन जीने के तरीके में कुछ सुधार करने हैं। आंतरिक शांति का अभाव ही इस समाज और व्यक्तिगत जीवन में व्यवधान का कारण है। यहां वे सात रास्ते दिए जा रहे हैं जो इस भागते – दौड़ते संसार में आपको आंतरिक शांति लाने में सहयोग देंगे-

  1. जीवन को बड़े दृष्टिकोण से देखें

आंतरिक शक्ति, व्यवहार में शांति और स्थिरता हमारे अंदर तब जागृत होती है जब हम जीवन को बड़े दृष्टिकोण से देखने लगते हैं। केवल जीवन के प्रति थोडी सी सजगता, हमारे अस्तित्व के विभिन्न स्तरों पर गहरा असर दाल सकती है। वह सजगता जो मन को नियंत्रित करती है, हमारी आत्मा का पोषण कैसे हो आदि जैसी बातें हैं जिन्हे जानने से ही हम घट रही घटनाओं, परिस्थतियों और लोगों के साथ पूरी आत्मीयता और शांति के साथ निपट सकते हैं।

आपको बस थोडा सा जागरूक होने की आवश्यकता है और इस सृष्टि को दूसरी निगाहों से देखने की जरूरत है। इस कायनात में जितनी भी विविधता है, उसके पीछे कारण है और देखिए इसमें भी एक लय है, यही इसकी खूबसूरती भी है। इस ब्रम्हांड में अनुमान से सब परे है, सब कुछ अनिश्चित है और जब हम इसे स्वीकार नहीं करते हैं तो हमारी आंतरिक शांति भंग हो जाती है।

वास्तव में,  मैं कहूगा जीवन के प्रति जिज्ञासा, उसे जानने की ललक ही आध्यात्म है। एक आध्यात्मिक दृष्टिकोण ही हमारे अंदर की आशा, जुनून और आत्मविश्वास को जगाता है और प्रेरित करता है कि इस दुनिया को हम बेहतर बनाए।

  1. चुनौतियों को स्वीकार कीजिए

srisri 2018जीवन में विरोधी मूल्यों को स्वीकार कीजिए। अपने जीवन में सभी चुनौतियों का डट कर सामना करें। वे सभी चुनैतियाँ आएंगी और चली भी जाएंगी। हममे कुछ हद तक दिव्य ज्ञान है लेकिन उसे होश में पोषण नहीं मिला है। हमें वास्तव में अपनी आंतरिक शक्ति के लिए प्रार्थनाबद्ध होना चाहिये। इसी से हम हमारे आस-पास चल रहे शोर और चुनौतियों से मुस्कुराते हुए निपट पाएंगे। बगेर चुनौतियों के जीवन उदासीन हो जाएगा। यकीन मानिये कि मुश्किल समय और परिस्थतियॉं ही हमारी आंतंरिक ताकत को बढ़ाती है और जीवन में विकसित होने का मौका देती है।

  1. मन को भौतिकता के ऊपर रखिए

आंतरिक शांति को पाने का महत्वपूर्ण तरीका यह भी है कि अपने मन को प्रशिक्षित करें। जब हमारा मन स्थिर होता है तब हमारी भावनाए सकारात्मक होती है और हमारा व्यवहार भी संयत और शांतिपूर्ण होता है। मन को स्थिर रखने के लिए ध्यान, योग और श्वांस की सशक्त, तकनीकों का यहयोग लेना आवश्यक है। यह आवश्यक है कि प्रतिदिन हम 15-20 मिनिट ध्यान करें।

  1. अपने वास्तविक गुनहागार को पहचानिये

इस अनिश्चित दुनिया में तनाव जीवन का हिस्सा बन गया है और यही तनाव हमारी सोच, विचार, समझ, व्यवहार को प्रभावित करते हुए नकारात्मक बनाते हैं। एक तनाव मुक्त मन ही शांतिपूर्ण, आशावादी, खुले दिमाग का और खुश रह सकता है।

तनाव का एक महत्वपूर्ण कारण यह भी है कि हमारे पास बहुत सारा काम होता है लकिन उसके लिए समय और ऊर्जा दोनों ही नहीं होती है। यह भी सही है कि हम कितना भी कर लें हमारा कार्यभार कम नहीं हो सकता तथा समय को भी हम नहीं बढ़ा सकते हैं। लेकिन यह संभव है कि हम अपनी ऊर्जा को तो बढ़ा ही सकते हैं और इसके लिए ध्यान, योग, स्वास्थ्यवर्धक खान-पान पर ध्यान देना जरूरी है। जितनी ऊर्जा हमें ध्यान करने से मिलती है उतनी हमें सोने से भी नहीं मिलती है। लगातार ध्यान की साधना से हम अपने श्वांस, खाने और सोने की आदतों को सुधार सकते हैं और तनाव मुक्त जीवन का आनंद ले सकते हैं।

  1. सेवा करें और उपयोगी बने

आंतरिक शांति का अनुभव चाहते हैं तो हमें अपने आस-पास के लिए उपयोगी बनना होगा। निस्वार्थ सेवा ही हमारे अंदर संतोष लाती है। जब हम दया दिखाते हैं तब हमारा वास्तविक स्वाभाव प्रेम और शांति का स्वाभाव बाहर निकल कर आता है। आईये एक संकल्प लें समाज के लिए कुछ उपयोगी करेंगे और जरूरतमंद परेशान लोगों की सहायता करेंगे।

  1. सही सोच और दिशा में काम हो

दुनिया में विवादों का एक कारण भी यह है कि हमारे अंदर अपनेपन की कमी है। हम सर्वप्रथम मानव हैं और इसके बाद हमारी दूसरी परिचय जैसे लिंग, जाति, नागरिकता, धर्म, इत्यादि आते हैं। लेकिन वास्तव में जब हमारे परिचय जैसे ही पहले आ जाते हैं, तो दुख पनपता है और समाज में तनाव भी बढ़ता है।

जब मन विश्राम में होता है तब हम स्वतः ही पूरी दुनिया से अपनापन महसूस करते हैं। हम लोगों पर आसानी से विश्वास कर पाते हैं और कोई भी रास्ता बनानें के लिए तैयार होते हैं। इस दुनिया में बहुत कुछ अच्छा है और यह विश्वास भी हमारे मन में शांति लाता है। हमें यह आवश्यक है कि हम अपना दृष्टिकोण विस्तृत करें और अपनी विविधता का उत्सव मनाए।

  1. अपने दिल की भी सुनिये

आजकल तकनीकों ने हमारे जीवन को और उत्पादक बना दिया है और इसने हमारी भावनाओं, विचारों के स्तर को भी हथियाना प्रारंभ कर दिया है। हम अक्सर लोगों से बात करने के लिए तकनीकों का प्रयोग करते हैं परन्तु जीवन दिल और दिमाग दोनों से चलता है। वास्तविक शांति के लिए हमें दिल से दिल की भाषा को जानाना और उपयोग करना होगा।

शांति का अर्थ नाकारा बैठना नहीं है

कई बार आंतरिक शांति को बाहरी स्वरूप में अलग अर्थों में ले लिया जाता है। आंतरिक शांति का अर्थ कभी भी निष्क्रीय होना नही है। लेकिन यदि शांत मन के साथ सक्रिय रहा जाय तो परिणाम चमत्कारिक हो सकते हैं। इसलिए शांत मन ही वह जीवन सूत्र है जो हमें असली खुशी दे सकता है। बाहरी शांति को सिर्फ तभी बनाए रखा जा सकता है जब आंतरिक शांति होगी। इस आने वाले साल में आईये अपने अंदर की शांति को पुर्नजीवित करते हैं और दुनिया में शांति का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

प्रस्तुति  : अजय विद्युत/ द आर्ट ऑफ़ लिविंग फैकल्टी

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