प्रिंट मीडिया की वापसी का सही मौका : जेटली

ओपिनियन पोस्ट
Thu, 01 Oct, 2015 17:01 PM IST

op inaugration5नई दिल्ली। न्यूज चैनलों, डिजिटल और सोशल मीडिया के बीच मची होड़ के बावजूद प्रिंट मीडिया की वापसी का यह सही मौका है, क्योंकि विश्वसनीय और गंभीर खबरों की कमी पाठकों को फिर से इस मीडिया की ओर वापस ला सकता है। राष्ट्रीय पाक्षिक पत्रिका ओपिनियन पोस्ट के लोकार्पण समारोह में केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने यह बात कही।

उन्होंने कहा कि लोगों में इस समय गंभीर खबरों की भूख है जिसे प्रिंट मीडिया ही शांत कर सकता है। गंभीर पत्रकारिता की बढ़ती मांग के चलते लोगों का रुझान फिर से प्रिंट मीडिया की ओर होने लगा है।

op inaugration3उन्होंने कहा कि न्यूज चैनलों पर होने वाली बहस का अक्सर जमीनी सरोकार से कोई लेना-देना नहीं होता। कई बार टीवी पर होने वाली चर्चाओं को देखकर लगता है कि यही राष्ट्रीय सुर्खियां है लेकिन हकीकत इसके विपरीत होती है। न्यूज चैनलों को लगता है कि जो कैमरे में कैद हो गई वही खबर है, बाकी सब बेकार है। इस प्रवृत्ति के चलते अखबारों को भी अपना स्टैंड बदलना पड़ा है।

op inaugration7वे भी अब उन्हीं खबरों को सुर्खियां बनाने पर मजबूर होने लगे हैं जो टीवी की सुर्खियां बनती हैं। इससे खबरों की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। लोग अब वास्तविक और तथ्यों पर आधारित खबर चाहते हैं। इसे टीवी और डिजिटल मीडिया पूरी नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन माध्यमों को हर पल सुर्खियां चाहिए। ऐसे में हर बार खबरों को नए ढंग से पेश करने की होड़ मची रहती है। इससे असली खबरें खो जाती हैं और उन्हें गलत ढंग से पेश किया जाता है।

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op inaugration2जेटली ने कहा कि माइंड और मार्केट स्पेस के बीच खाई बढ़ रही है। मगर यह स्थिति लंबे समय तक नहीं रहने वाली है। अंग्रेजी अखबार माइंड स्पेस का प्रतिनिधित्व करते हैं। जबकि हिंदी और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं के अखबार व पत्रिकाओं का मार्केट स्पेस पर कब्जा है।

 

 

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