परिवर्तन के लिए जनता बेताब

शिवराज सिंह कहते हैं कि कांग्रेस को वोट देना दिग्विजय सिंह के दौर की वापसी है। वे जनता को डरा रहे हैं या फिर सत्ता में बने रहने के लिए ऐसा बयान दे रहे हैं?
मुझे खुशी है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को कांग्रेस की चिंता है। 15 साल से उनकी सरकार है। वे काम कम करते हैं और बहाने अधिक बनाते हंै। उन्होंने घोषणा ही तो की है। अमेरिका से भी बेहतर सड़क बनाने की बात करते हैं। ऐसी कितनी सड़कें उन्होंने बनवाई। रीवा-सतना की सड़क पिछले पांच साल से नहीं बनी। प्रदेश में ऐसी सैकड़ों सड़कें हैं। उनके शासन में विकास कम और भ्रष्टाचार अधिक हुए हंै। पहले वे अपने 15 साल के कार्यकाल का हिसाब जनता को दें। जनता की 15 साल से उपेक्षा हो रही है।

सत्ता में आने के लिए क्या रणनीति अपना रहे हैं?
इस बार रणनीति बहुत साफ है। राहुल जी ने कांग्रेस के सभी प्रमुख नेताओं से एकजुट होने को कहा है। हम सभी मिलकर जमीनी स्तर पर प्रचार करेंगे और चुनाव में जीत मिले इसके लिए एक राय पर काम करने की रणनीति बनाई है। साथ ही चुनावी घोषणा में स्थानीय मुद्दों को तरजीह दिया जाएगा। जनता भाजपा शासन से तंग आ गई है और वो राज्य में परिवर्तन के लिए तत्पर है।

क्या आपके नेतृत्व में कांग्रेस के अन्य सभी नेता जनता को भाजपा की खामियों को समझा सकेंगे?
मेरा कोई नेतृत्व नहीं है। पार्टी ने मुझे जो जिम्मेदारी दी है मैं उसका पालन कर रहा हूं। स्पष्ट कर दूं कि हम 8-9 मुखिया मिलकर कांग्रेस का नेतृत्व कर रहे हैं। रही बात जनता को समझाने की तो वो हमसे ज्यादा समझ गई है भाजपा के शासन को।

प्रदेश में मोदी फैक्टर काम करेगा?
देश और प्रदेश में हुए हालिया उपचुनावों से एक बात साफ है कि मोदी फैक्टर जैसी कोई बात नहीं है। 1998 में भी नरेंद्र मोदी मध्य प्रदेश में भाजपा के चुनाव प्रभारी थे। उस चुनाव में भी भाजपा को मुंह की खानी पड़ी थी। प्रदेश की जनता उन्हें 15 साल पहले ही खारिज कर चुकी है। मोदी मॉडल खोखला है। केवल शब्दों की बाजीगरी है। किसके अच्छे दिन आए, जनता जानती है।

प्रत्याशी चयन को लेकर कांग्रेस क्या रणनीति अपना रही है, क्या टिकट वितरण में जातिगत आधार को अहमियत मिलेगी?
टिकट वितरण इस बार पहले की तरह नहीं होगा। हमने सभी शीर्ष नेतृत्व से चर्चा की है। जिसकी जीतने की संभावना है उसे ही टिकट दिया जाएगा। साथ ही 30 फीसदी ऐसे लोगों को भी टिकट दिया जाएगा जिन्होंने कभी विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा है। लेकिन कभी पार्षद, नगर पंचायत का अथवा कोई भी चुनाव लड़ा हो तो उसकी समीक्षा भी की जाएगी। नए चेहरों को भी मौका मिलना चाहिए। टिकट वितरण को लेकर स्थानीय स्तर पर कांग्रेस सर्वे करा रही है। टिकट वितरण में उस रिपोर्ट की भी मदद ली जाएगी। मध्य प्रदेश विभिन्न जातियों के फूलों को गुलदस्ता है। प्रादेशिक और स्थानीय स्तर पर जाति को दरकिनार नहीं किया जा सकता। समाज के अन्य वर्गों और जाति के लोगों को भी लगे कि उनकी जाति को भी राजनीति में प्राथमिकता मिल रही है।

क्या कांग्रेस किसी अन्य पार्टी से गठबंधन करेगी?
अन्य दलों से गठबंधन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन हम चाहते हैं कि गठबंधन केवल चुनाव तक ही न हो। लक्ष्य, सिद्धांत और उनके मूल्यों को भी देखना होगा। हो सकता है कई जगह हमें अधिक सीटें देनी पड़ें और कई जगह न भी देना पड़े।

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