पूर्णिया (बिहार) : पुराने योद्धा, नया समीकरण

साल 2014 की मोदी लहर में नीतीश कुमार की लाज बचाने वाले संतोष कुशवाहा इस बार खुद मोदी के भरोसे हैं और 2004 से अब तक भारतीय जनता पार्टी का परचम लहराने वाले उदय सिंह उर्फ पप्पू पंजानिशान लेकर मैदान में उतरे हैं. पूर्णिया लोकसभा क्षेत्र के अखाड़े में योद्धा तो पुराने हैं, लेकिन समीकरण बदल गए हैं. जिन 30 प्रतिशत मुस्लिम वोटरों ने 2014 में जनता दल यू के संतोष कुशवाहा को एकमुश्त वोट देकर जिताया था, 2019 में वे कांग्रेस उम्मीदवार उदय सिंह के पक्ष में दिख रहे हैं. यानी पूर्णिया का खेल सवर्ण और यादव वोटरों के हाथ में आ गया है यानी इन दोनों के वोट जिस पक्ष में जाएंगे, बाजी वही मार लेगा.

पूर्णिया लोकसभा क्षेत्र का संसदीय सफर 1957 से शुरू हुआ. साल 1984 तक, केवल 1977 को छोडक़र, यह सीट कांग्रेस के कब्जे में रही. 1989 में पूर्णिया में समाजवादियों ने ऐसी सेंध लगाई कि उसके बाद कांग्रेस यहां मुख्य मुकाबले से बाहर हो गई. 1989 में जनता दल के तस्लीमुद्दीन जीते और 1996 में समाजवादी पार्टी से राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव. 1998 में भारतीय जनता पार्टी ने जीत दर्ज की, वहीं 1999 में पप्पू यादव पुन: निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में पूर्णिया के सांसद बने. साल 1957 में कांग्रेस के फणी गोपाल सेनगुप्ता यहां से सांसद निर्वाचित हुए थे. 1962 और 1967 में भी उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज की. 1971 में कांग्रेस के मोहम्मद ताहिर ने चुनाव जीता और 1970 में जनता पार्टी के लखन लाल कपूर ने. 1980 एवं 1984 में कांग्रेस की माधुरी सिंह ने जीत दर्ज की और उन्होंने लगातार 10 सालों तक लोकसभा में पूर्णिया का प्रतिनिधित्व किया. 2004 और 2009 में पूर्णिया सीट भारतीय जनता पार्टी के कब्जे में रही. उदय सिंह उर्फ पप्पू सिंह लगातार 10 सालों तक पूर्णिया के सांसद रहे.  लेकिन, 2014 में देश भर में मोदी लहर के बावजूद यहां जदयू के उम्मीदवार संतोष कुशवाहा ने भाजपा उम्मीदवार उदय सिंह को 1,16,669 वोटों से मात दी.

साल 1989 में कांग्रेस के पांव ऐसे उखड़े कि अब 2019 में ही उसे उम्मीद की किरण फूटती दिख रही है. पूर्णिया का पूरा खेल 30 प्रतिशत मुस्लिम एवं अन्य हिंदू जातियों के वोटरों की गोल बंदी पर निर्भर करता है. 2014 में मुस्लिम वोटों के साथ नीतीश समर्थक ओबीसी वोटरों की गोल बंदी हुई, तो जदयू के संतोष कुशवाहा ने बाजी मार ली. मोदी के खिलाफ मुस्लिम वोटर जदयू उम्मीदवार के पक्ष में गोलबंद हुए थे. 2019 में जदयू और भाजपा का गठबंधन है, ऐसे में मुस्लिम वोटर जदयू उम्मीदवार के पक्ष में रहेंगे, इसमें संदेह है. ऐसी स्थिति में मुस्लिम वोटर कांग्रेस उम्मीदवार उदय सिंह की ओर जा सकते हैं. अगर सवर्ण वोटर, जिनकी संख्या तीन लाख के करीब है, उदय सिंह के साथ चले गए, तो 17वीं लोकसभा में संतोष कुशवाहा के प्रवेश में ग्रहण लग सकता है. पूर्णिया जिला जदयू के प्रधान महासचिव प्रवीण कुमार दास मुन्ना इस बात को खारिज करते हैं कि मुस्लिम और सवर्ण वोटरों की गोल बंदी कांग्रेस के उदय सिंह के पक्ष में होगी. उनका कहना है कि धमदाहा की जदयू विधायक एवं पूर्व मंत्री लेसी सिंह का प्रभाव भी सवर्णों के साथ-साथ मुसलमानों एवं अन्य जातियों के लोगों पर अच्छा-खासा है. उनकी लोकप्रियता का लाभ जदयू उम्मीदवार को मिलेगा.

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