कैडर पद पर गैर कैडर अधिकारी

ओपिनियन पोस्ट
Sat, 18 May, 2019 14:25 PM IST

तमिलनाडु में युवा आईपीएस अधिकारी खुश नहीं हैं. राज्य सरकार द्वारा गैर कैडर अधिकारियों के माध्यम से लगभग आधे आवंटित कैडर पद भरने का काम किया जा रहा है. इससे आईपीएस अधिकारियों को लगता है कि उनका मैदान सिकुड़ रहा है. सूत्रों का कहना है कि तमिलनाडु में 76 कैडर पदों पर 36 गैर कैडर अधिकारियों का कब्जा है, जो पुलिस अधीक्षक या पुलिस उपायुक्त के पद पर तैनात हैं. निश्चित रूप से, आईपीएस अधिकारी इस स्थिति से दु:खी हैं. सूत्रों का कहना है कि राज्य महानगर परिवहन निगम के डीजीपी रैंक के मुख्य सतर्कता अधिकारी एसआर जांगिड़ ने मुख्य सचिव गिरिजा वैद्यनाथन को एक पत्र लिखा, जिसमें कहा गया है कि राज्य की ट्रांसफर पॉलिसी आईपीएस कैडर नियमों का उल्लंघन कर रही है और युवा आईपीएस अधिकारियों को इससे बड़ा नुकसान हुआ है. राज्य में पर्याप्त संख्या में कैडर अधिकारियों के उपलब्ध होने के बावजूद ऐसी नियुक्तियां की गईं. जबकि कैडर अधिकारियों से ही कैडर पद भरना अनिवार्य है, लेकिन इसमें अपवाद का प्रावधान भी है. यदि कोई उपयुक्त कैडर अधिकारी उपलब्ध नहीं है, तो एक गैर कैडर अधिकारी तैनात किया जा सकता है. यदि राज्य तीन महीने से अधिक समय तक यह व्यवस्था जारी रखना चाहता है, तो उसे केंद्र सरकार से पूर्व अनुमोदन हासिल करना होता है. राज्य सरकार की ओर से अब तक इस पत्र को लेकर कोई उत्साहजनक प्रतिक्रिया नहीं मिली है.

सरकार को टैक्स मैन नहीं चाहिए !

मोदी सरकार आने के बाद से भारतीय राजस्व सेवा के अधिकारियों की भर्ती में लगातार गिरावट आ रही है. पिछले पांच सालों के दौरान इसमें लगभग 74 प्रतिशत की गिरावट आई. सूत्रों का कहना है कि ग्रुप ‘ए’ सेवाओं (भारतीय राजस्व सेवा, भारतीय डाक सेवा, भारतीय सांख्यिकी सेवा) में 15,000 से अधिक रिक्तियां हैं और ग्रुप ‘बी’ सेवाओं में 26,000 से अधिक रिक्तियां (सशस्त्र बल मुख्यालय, सिविल सेवा, पांडिचेरी सिविल सेवा) हैं. फिर भी इन दोनों समूहों के लिए भर्ती में भारी गिरावट आ रही है. 2013 में संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से 409 आईआरएस अधिकारियों की भर्ती की गई थी. 2017 तक यह संख्या घटकर सिर्फ 208 रह गई. 2018 के लिए सरकार ने केवल 106 रिक्तियां घोषित की हैं, लेकिन यह अभी तक स्पष्ट नहीं है कि वास्तव में कितने अधिकारियों की भर्ती की जाएगी, क्योंकि परीक्षा परिणाम हाल ही में आया है और पद आवंटन अभी बाकी है. यह समझाया जा रहा है कि आईआरएस अधिकारियों की आवश्यकता इसलिए कम हो रही है, क्योंकि व्यापक स्तर पर डिजिटलीकरण, कंप्यूटरीकरण एवं डेटा नेटवर्किंग के काम हो रहे हैं. जीएसटी लागू होने के बाद मैनुअल कार्य की आवश्यकता और भी कम हो गई है.

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नई सरकार करेगी ये महत्वपूर्ण नियुक्तियां

जब नई सरकार कार्यभार संभालेगी, तो उसे तीन प्रमुख नियुक्तियों पर काम करना होगा. कैबिनेट सचिव पीके सिन्हा का सेवा विस्तार 12 जून को समाप्त हो रहा है, जबकि इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के प्रमुख राजीव जैन एवं रॉ प्रमुख अनिल धस्माना के कार्यकाल मई में समाप्त होने वाले हैं. सिन्हा की तरह उक्त दोनों अधिकारी भी छह महीने के सेवा विस्तार पर हैं. यद्यपि कैबिनेट सचिव का पद दो वर्ष के निश्चित कार्यकाल के लिए होता है, जैसे गृह, रक्षा एवं विदेश सचिव का होता है. लेकिन, कैबिनेट सचिव को आम तौर पर इसलिए सेवा विस्तार मिलता है, क्योंकि प्रधानमंत्री नौकरशाही का प्रबंधन करने के लिए निरंतरता चाहते हंै. पूर्व में कैबिनेट सचिव केएम चंद्रशेखर एवं अजीत सेठ भी एक्सटेंशन के कारण चार साल तक सेवाएं दे चुके हैं. सिन्हा को दो साल के लिए 2015 में नियुक्त किया गया था. उन्हें 2017 में एक साल का पहला विस्तार मिला. फिर दूसरा विस्तार भी मिल चुका है. धस्माना के सेवा विस्तार से चार दावेदार इस पद की दौड़ से बाहर हो गए. इस सूची में शीर्ष पर कोलंबो रॉ स्टेशन के पूर्व प्रमुख के इलंगो थे, जिनके बारे में कहा जाता है कि श्रीलंकाई राष्ट्रपति महिंद्रा राजपक्षे के चुनाव हारने में उनकी सफल भूमिका रही थी. इसके अलावा पंजाब कैडर के आईपीएस अधिकारी सामंत गोयल भी रॉ प्रमुख बनने की दौड़ में थे. आईबी प्रमुख बनने की दौड़ में 1984 बैच एवं बिहार कैडर के आईपीएस अधिकारी अरविंद कुमार और मध्य प्रदेश पुलिस प्रमुख आरके शुक्ल भी शामिल थे.

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