न्यूज फ्लैश

न काजी कुबूल न शरिया कुबूल…कुबूल है तो कानून

इस देश में अदालते हैं, कानून हैं, वकील हैं। काजियों की जरूरत अब नहीं है। काजी एक्ट और शरिया एक्ट को रद्द करने की जरूरत है। मुस्लिम मैरिज एक्ट बनाकर ही मुस्लिम औरतों को हम इंसाफ दिला सकते हैं

संध्या द्विवेदी। 

तीन तलाक पर सुनवाई पूरी हो चुकी है। पांच जजों की पीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। लेकिन 6 दिन चली बहस के बीच एक सुझाव आया। सुझाव था, ‘क्यों न निकाहनामे में तीन तलाक के मसले को शामिल कर लिया जाये। औरत को ये हक दिया जाये कि वह निकाह के वक्त ही तलाक के इस तरीके को कुबूल करे या नकुबूल करे।’ यह सुझाव जस्टिस खेहर ने दिया था।

ये भी पढ़ें-इंसाफ के तराजू पर तलाक, तलाक, तलाक

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की तरफ से जिरह कर रहे वकील कपिल सिब्बल ने इस सुझाव को ठीक भी ठहराया। पर क्या यह सुझाव मुस्लिम महिलाओं के उत्पीड़न के खिलाफ सही साबित हो सकता है? मुस्लिम महिलाओं के हक को लेकर आवाज उठाने वाली नाइस हसन इस सुझाव से बिल्कुल भी सहमत नहीं हैं। उन्होंने इस सुझाव पर कुछ सवाल पूछ डाले, ‘कितनी मुस्लिम महिलाएं अपनी मर्जी से फैसला नहीं ले सकतीं? कितनी मुस्लिम महिलाएं निकाहनामें को पढ़ने के काबिल हैं?  मतलब पढ़ने में अक्षम औरतों के लिये यह सुझाव क्या मददगार साबित होगा?’

ये भी पढ़ें-एक्सक्लूसिव- तिहरे तलाक पर अब कोर्ट में होगी जंग

नाइस हसन आगे कहती हैं कि मुस्लिम औरतों को तलाक की इस अकस्मात गिरने वाली गाज से छुटकारा दिलाने के लिये कानून की जरूरत है। क्योंकि कोर्ट कचहरी देश के ज्यादातर हिस्सों में मौजूद हैं। इसलिये अगर कानून होगा तो औरतें अपने हक के लिये लड़ पायेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि 1880 के काजी भी हमें नहीं चाहिये। एक्ट बनाकर काजियों को भी खत्म करना चाहिये।

ये भी पढ़ें-विधि आयोग के सवालों के विरोध में उतरे मुस्लिम संगठन

इन सबसे बड़ा सवाल उन्होंने शरिया एक्ट पर उठाया। उन्होंने कहा शरिया की एक परिभाषा नहीं है। अलग अलग मुस्लिम देश और मुस्लिमों के अलग अलग फिकहा अपने ढंग से इसे परिभाषित करते हैं। हर मुल्ला मौलवी एक नई परिभाषा ले आता है। इसलिये सबसे पहले इसे रद्द करने की जरूरत है। और संविधान हमें संशोधन और गैर जरूरी हो चुके कानूनों को रद्द करने का अधिकार देता है।

 

The following two tabs change content below.
ओपिनियन पोस्ट

ओपिनियन पोस्ट

ओपिनियन पोस्ट एक राष्ट्रीय पत्रिका है जिसका उद्देश्य सही और सबकी खबर देना है। राजनीति घटनाओं की विश्वसनीय कवरेज हमारी विशेषज्ञता है। हमारी कोशिश लोगों तक पहुंचने और उन्हें खबरें पहुंचाने की है। इसीलिए हमारा प्रयास जमीन से जुड़ी पत्रकारिता करना है। जीवंत और भरोसमंद रिपोर्टिंग हमारी विशेषता है।
ओपिनियन पोस्ट
About ओपिनियन पोस्ट (5258 Articles)
ओपिनियन पोस्ट एक राष्ट्रीय पत्रिका है जिसका उद्देश्य सही और सबकी खबर देना है। राजनीति घटनाओं की विश्वसनीय कवरेज हमारी विशेषज्ञता है। हमारी कोशिश लोगों तक पहुंचने और उन्हें खबरें पहुंचाने की है। इसीलिए हमारा प्रयास जमीन से जुड़ी पत्रकारिता करना है। जीवंत और भरोसमंद रिपोर्टिंग हमारी विशेषता है।

Leave a comment

Your email address will not be published.


*