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ई-नीलामी में नहीं बिकी माल्या की किंगफिशर हाउस

नहीं मिला कोई खरीदार, नीलामी की अगली तारीख जल्य तय करेंगे बैंक

मुंबई । विजय माल्या की बंद पड़ी किंगफिशर एयरलाइंस के मुख्यालय किंगफिशर हाउस की बिक्री गुरुवार को ई-नीलामी में नहीं हो पाई। दोपहर दो बजे तक इसकी नीलामी प्रक्रिया पूरी हो गई मगर इसके लिए कोई खरीदार नहीं मिला। अब नीलामी की अगली तारीख तय की जाएगी। इस संपत्ति का न्यूनतम मूल्य 150 करोड़ रुपये रखा गया था। यानी बोली 150 करोड़ के ऊपर से शुरू होनी थी। 12 कंपनियों ने बोली के लिए जरूरी 15-15 करोड़ रुपये डिपॉजिट किए थे लेकिन किसी ने ऊंची कीमत नहीं लगाई। किंगफिशर हाउस यहां के घरेलू हवाई अड्डे के पास विले पार्ले में स्थित है। 17,000 वर्ग फुट में निर्मित इस संपत्ति की नीलामी एसबीआई कैप्स की अनुषंगी एसबीआईकैप्स ट्रस्टी ई-नीलामी के जरिए कर रही है।

विजय माल्या के बैंकों का 9000 करोड़ रुपये का कर्ज नहीं चुकाने पर इस संपत्ति पर फरवरी 2015 में भारतीय स्टेट बैंक के नेतृत्व में 17 बैंकों ने कब्जा किया था। माल्या को कर्ज देने वाले बैंक उनकी संपत्ति की नीलामी कर बकाया वसूलने कोशिश में जुटे हैं। भारी-भरकम नुकसान और देनदारी के बोझ के कारण किंगफिशर एयरलाइंस को 2012 में बंद कर दिया गया था। बैंकों की ओर से कर्ज वसूली की कोशिश तेज होने के बीच विमानन कंपनी के संस्थापक और मुख्य प्रवर्तक माल्या दो मार्च को देश छोड़ कर जा चुके हैं। हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय ने पिछले साल सीबीआई द्वारा दायर प्राथमिकी के आधार पर माल्या और अन्य के खिलाफ मनी लांड्रिंग का मामला दर्ज किया है। एसबीआई और यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया सहित कई बैंकों ने विजय माल्या को ‘विलफुल डिफॉल्टर’ यानी जानबूझकर लोन न चुकाने वाला घोषित कर दिया है।

इससे पहले मंगलवार को सीबीआई के साथ बैंकों ने भी कर्ज की धोखाधड़ी के मामले में किंगफिशर एयरलाइंस और यूबी समूह के दो शीर्ष अधिकारियों से पूछताछ की। किंगफिशर एयरलाइंस के पूर्व मुख्य वित्त अधिकारी ए रघुनाथन और यूबी समूह के पूर्व सीएफओ रवि नेदुनगादी को सीबीआई के मुबंई कार्यालय में फिर बुलाया गया और लोन की कथित हेराफेरी से जुड़े सवाल किए गए। दोनों अधिकारियों से आधी रात तक पूछताछ चलती रही। सीबीआई ने यूबी समूह के तत्कालीन चेयरमैन विजय माल्या, किंगफिशर एयरलाइंस, रघुनाथन और आईडीबीआई बैंक के अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया हुआ है। आईडीबीआई बैंक के अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने नियमों का उल्लंघन कर 900 करोड़ रुपये का कर्ज दिया।

 

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