निधि सिंह- साधारण लड़की के असाधारण होने की कहानी

निशा शर्मा।

पंजाबी फिल्मों में एक फिल्म दस्तक देने जा रही है निधि सिंह। निधि सिंह एक कहानी है जज्बात की, मजबूत इरादों की, एक साधारण लड़की के असाधारण होने की।

वक्त पए तां गूंगियां चीखां भी आवाज बणदियां ने

जुल्म दी अत जद हुंदी तां चिड़ियां बाज बणदियां ने…

यहां से शुरु होता है फिल्म निधि सिंह का ट्रेलर जिसका मतलब है कि वक्त पड़ने पर गूंगे की चीखें भी आवाज का रूप धारण कर लेती है और जुल्म जब हद से बढ़ जाता है। तब साधारण चिड़ियां भी बाज का अक्रामक रूप धारण कर लेती हैं।

फिल्म के लेखक और निर्देशक जेवी ढांडा मानते हैं कि उनकी फिल्म  पंजाब की फिल्मों में लीक से हटकर है। जिसका हीरो एक लड़की है जिसका नाम है निधि सिंह (कुलराज रंधावा) है। यह एक गांव की मासूम लड़की की कहानी है। जिसको हालात हथियार उठाने पर मजबूर कर देते हैं। पंजाबी मे इससे पहले कोई फिल्म ऐसी नहीं बनी जिस फिल्म का पूरा दारोमदार अकेला एक लड़की पर हो। और फिल्मों में हिरोइन से साथ हीरो होता है, कॉमेडियन होता है, प्रेमी होता है लेकिन हमारी फिल्म में सिर्फ निधि सिंह ही है (कुलराज रंधावा) जिसने पूरी फिल्म का भार अपने कंधों पर उठाया है।

फिल्म का ट्रेलर एक ऐसी लड़की की कहानी कहता है जो हंसती है, बोलती है, नाचती है, गाती है लोगों को हंसाती है इंसाफ के लिए लड़ती है जब उसे इंसाफ नहीं मिलता तो वह हथियार उठाने को मजबूर हो जाती है।

ट्रेलर में आया एक एक डॉयलाग आपको अपनी और खिंचता है। जो तुने किया है उसकी सजा मौत है (जौं तू किता है उसदी सजा मौत है।) तो निधि सिंह की आवाज में शब्द सुनाई देते हैं कि लाश भी कभी मौत से डरी है (लाश भी कदी मौत तों डरी है।) यह डॉयलाग न्यायिक व्यवस्था ही नहीं सामाजिक व्यवस्था पर भी धारदार वार करता है।

निधि सिंह के इंसाफ की गुहार के बीच फिर न्यायिक व्यवस्था पर तमाचा मारते हुए शब्द सुनाई देते हैं। इंसाफ चाहिए इनको… दे देते हैं(इंसाफ चाहिंदा है इन्हांनु… दे दीं दे हां) फिर शुरू होता है एक साधारण लड़की की जिन्दगी में प्रताड़ना का दौर जहां वह मजबूर होती है अपराध को अपराध की भाषा में जवाब देने के लिए।

फिल्म के निर्माता इंदर भंडाल कहते हैं कि यह पंजाब की कहानी को बयां करती फिल्म है। इसकी खास बात है कि यह पंजाब के संस्कृति से जुड़ी फिल्म हैं यह फिल्म कमर्शियल फिल्म हो ना हो लेकिन लोगों के दिलों में जगा बनाने वाली फिल्म है ।

फिल्म के लेखक और निर्देशक जेवी ढांडा अपनी फिल्म को मजबूत किरदार कि फिल्म मानते हैं वह कहते हैं कि फिल्म आपको कहीं भी रूकने का मौका नहीं देगी, एक रफ्तार से आगे बढ़ते हुए आपको अपने साथ बांधे रखेगी। फिल्म के नाम के बारे में बताते हुए कहते हैं कि यह फिल्म सच्ची घटना से प्रेरित फिल्म है जिसमें जहां एक लड़की एक लड़के की तरह मजबूती से न्याय के लिए खड़ी ही नहीं होती अपने हालातों से लड़ती है, पंजाब के सिख परिवारों में लड़कियां अपने नाम के पीछे कौर लगाती हैं और लड़के सिंह। हमारी फिल्म में निधि सिंह एक लड़के की तरह की दमदार है वह वो सब करती है जो एक लड़के का दायित्व माना जाता है।

फिल्म के ट्रेलर का आखिरी डॉयलाग तुम्हारी तो सांसे ही रूक गई एक लड़की के डर से (तुहाडे तां सा सुक्के पए ने ओह भी इक कुड़ी दे डर तों) एक दहशत पैदा करता है उस अपराधी समाज में जहां लड़कियां सिर्फ नजाकत का ही मायना है।

निर्देशक जेवी ढांडा मानते हैं कि जो भी इस फिल्म को देखेगा यह फिल्म उसको हंसाएगी भी, रूलाएगी भी, कभी प्यार में घेर लेगी और कभी दिल में गुस्से का उफान भी लाएगी। लेकिन जब फिल्म खत्म होगी तब आपको खड़े होकर तालियां बजाने पर भी मजबूर कर देगी।

फिल्म के ट्रेलर और कहानी के साथ साथ फिल्म के निर्माता, निर्देशक की बातों में जो सच्चाई नजर आती है वह देखना होगा कि शुक्रवार को लोगों पर किस कदर असर डालती है। बड़े पर्दे पर आनी वाली फिल्मों में यह फिल्म कैसे लोगों को अपनी ओर रिझाने में कामयाब होगी यह फिल्म रिलीज के बाद ही पता चलेगा।

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