हॉकी के धुरंधर मोहम्‍मद शाहिद का इंतकाल, ऐसे किया साथी खिलाड़ियों ने याद

हॉकी के अजीम खिलाड़ी मोहम्‍मद शाहिद का इंतकाल हो गया। शाहिद लम्बे समय से पेट में दर्द की शिकायत से जूझ रहे थे। जिसकी वजह से उन्हें 29 जून को वाराणसी के सर सुंदर लाल अस्पताल में दाखिल कराया गया था। लेकिन हालत न सुधरने पर उन्हें गुड़गांव के मेदांता मेडिसिटी अस्पताल में दाखिल कराया गया। जहां बुधवार को 56 साल की उम्र में उन्होंने लम्बी सांस ली।

मैंने उसे बतााया कि आपको पद्म श्री के लिए चुना है- हरबिंदर सिंह

बनारस के रहने वाले हॉकी के इस बेजोड़ खिलाड़ी की मौत के बाद  खेल जगत में सन्नाटा पसर गया है। अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित और हॉकी इंडिया की चयनसमिति के सदस्य हरबिंदर सिंह मौहम्मद शाहिद की मौत को हॉकी जगत में कभी ना पूरी की जाने वाली क्षति के तौर पर देखते हैं। हरबिंदर सिंह कहते हैं कि मेरा और उसका साथ पुराना रहा है। हम दोनों ही रेलवे के लिए खेलते थे। यही नहीं रेलवे को हॉकी में ऊंचाईयों पर ले जाने में शाहिद का बड़ा योगदान रहा है।

शाहिद के साथ अपनी यादों को सांझा करते हुए हरबिंदर बताते हैं कि उनके साथ मेरी बड़ी यादें हैं लेकिन एक खास याद में आपके साथ साझां करना चाहता हूं। बेंग्लौर में हमारा एक मैच था मैं टीम का कोच था। उस समय मैं रेडियो पर रोज समाचार सुना करता था। बेंगलौर में जब मैं रेडियो पर समाचार सुन रहा था तो मैंने खबर सुनी कि शाहिद को पद्म श्री देने की घोषणा हुई है, तो मैं तुरंत शाहिद के कमरे में गया। वहां वह सो रहा था। मैंने उसे उठाया और कहा आपको पद्म श्री के लिए चुना गया है उसने आश्चर्य से पूछा ‘अच्छा’। मैंने कहा ‘हां’। उसने थैंक्स कहा और कहने लगा यह सब आपके आशिर्वाद से हुआ है। ऐसा था शाहिद।

हरबिंदर मानते हैं कि एक खिलाड़ी के तौर पर शाहिद प्रोत्साहित करने वाला खिलाड़ी था। जो अपने साथियों में और दर्शकों में जोश ला देता था।

स्कूल में जब वह खेलता था तो हम सब उसे देखते रह जाते थे – ए.के. बंसल

हॉकी इंडिया के पूर्व कोच रहे ए.के. बंसल मोहम्मद शाहिद की मौत पर शोक जताते हुए कहते हैं कि हॉकी की दुनिया की इतनी बड़ी हस्ती चली गई जिसका खामियाजा भरना मुश्किल हैं। हॉकी के एक बेहतरीन कलाकार ने दुनिया को अलविदा कहा है। इस नुकसान को नापा-तोला नहीं जा सकता।

ए.के. बंसल शाहिद को याद करते हैं और कहते हैं कि उसकी मेरी यारी बचपन की थी, स्कूल के समय की। उसे हॉकी की बीमारी थी, उसमे हॉकी के लिए जनून था। वह अपने कमरे में रात को भी हॉकी की प्रेक्टिस करता रहता था और अगर उससे बात करना चाहो तो वह बातें भी हॉकी की ही करता था। उसके लिए जिन्दगी हॉकी ही रही। वह गजब का खिलाड़ी था।’

शाहिद और अपने स्कूल के दिनों की बातें बताते हुए बंसल कहते हैं कि ‘जब हम स्कूल में उसके साथ खेलते तो सब अपना खेल छोड़ उसके खेल को देखने में मस्त हो जाते थे और वह हॉकी में लीन रहता था उसे किसी की परवाह नहीं होती कौन क्या कर रहा है।’

मौहम्मद शाहिद की शख़्सियत के बारे में बंसल कहते हैं कि ‘शाहिद हॉकी जगत का बड़ा नाम था लेकिन उतना ही अपनी जिन्दगी में सरल और सहज। उसमें दिखावा नहीं था, चालाकी नहीं थी।’

(निशा शर्मा से बातचीत पर आधारित)

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