मेट्रो किराया वृद्धि की रिपोर्ट को अदालत में चुनौती नहीं देने पर घिरे केजरीवाल

सुनील वर्मा
दिल्‍ली सरकार ने मेट्रो किराए में बढ़ोत्तरी को लेकर चौथी फेयर फिक्शेसन कमेटी की रिपोर्ट पिछले प्रदंह महीनों से कोर्ट में चैलेंज नही किया है जबकि दिखावे के लिए वह किराया वृद्धि का विरोध कर रही हे। केन्द्र व दिल्ली की केजरीवाल सरकार के पास यह रिपोर्ट पिछले 15 महीनों से पड़ी हुई है । ये रिपोर्ट
8 सितम्बर 2016 को ही तैयार हो गई थी और 26 नवम्बर 2017 को इसको पब्लिक डोमेन में जारी किया गया फिर भी इसको कोर्ट में चैलेंज नही किया गया। मेट्रो किराया बढ़ने के बाद केजरीवाल ने शोर मचाना शुरु किया जबकि दिल्ली सरकार के नुमाईंदे के.के. शर्मा चौथे फेयर फिक्शेसन कमेटी के सदस्य थे उन्होंने कमेटी की बैठकों के दौरान कभी भी किराए बढ़ोत्‍तरी का विरोध नही किया।
बता दें कि केके शर्मा केजरीवाल के चहेते थे जिनकों उन्होंने दिल्ली का मुख्य सचिव बनाया था। एक तरफ केन्द्रीय शहरी विकास मंत्री यह कह रहे है कि यदि दिल्ली सरकार उनको 3000 करोड़ रुपया दे दे तो वे दिल्ली मेट्रो को दिल्ली सरकार को दे सकते है। दूसरी ओर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल कहते है कि यदि उनको 1500 करोड़ मिल जाए तो वह मेट्रो को आसानी से चला सकते है। जबकि यदि मेट्रो को 755.92 करोड़ की राशि प्रति वर्ष सब्सिडी के रुप में दे दी जाए तो लोगों को राहत देकर बिना किराए की बढ़ोत्तरी के चलाई जा सकती है।
आज दिल्‍ली प्रदेश अध्यक्ष अजय माकन और पार्टी की मुख्य प्रवक्ता शर्मिष्ठा मुखर्जी, प्रवक्ता पूजा बाहरी व कांग्रेस नेता चतर सिंह ने एक संवाददाता सम्‍मेलन में इस मुद्दे का उठाया । माकन ने कहा कि या तो केन्द्रीय शहरी विकास मंत्री श्री हरदीप सिंह को मेट्रो किराए की बढ़ौतरी के मुद्दे को ठीक ढंग से ब्रीफ नही किया गया और दिल्ली के मुख्यमंत्री मेट्रो किराए की बढ़ोतरी को लेकर राजनीतिक लाभ उठाना चाहते है। उन्होंने कहा कि मोदी की केन्द्र सरकार तथा दिल्ली की केजरीवाल सरकार अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए दिल्ली मेट्रो का गला घोट रहे है।
माकन ने कहा कि 2002 में जब से दिल्ली मेट्रो शुरु हुई है चौथी बार किराए बढाए गए हैं। उन्होंने कहा कि 25 दिसम्बर 2002 को मेट्रो का न्यूनतम किराया 4 रुपये और अधिकतम किराया 8 रुपये था। 31 मार्च 2004 से पहली फेयर फिक्शेसन कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार न्यूनतम किराया 6 रुपये और अधिकतम किराया 15 रुपये किया गया। इसी प्रकार दूसरी फेयर फिक्शेसन कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार 31 दिसम्बर 2005 से न्यूनतम किराया 6 रुपये रहा और अधिकतम किराया 22 रुपये किया गया। तीसरी फेयर फिक्शेसन कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार 13 नवम्बर 2009 से न्यूनतम किराया 8 रुपये रहा और अधिकतम किराया 30 रुपये किया गया।
माकन ने कहा कि यदि हम तीसरे फेयर फिक्शेसन रिपोर्ट को चौथे फेयर फिक्शेसन रिपोर्ट को फेस-2 में बढ़ाए गए अक्टूबर 2017 के किरायों की तुलना करें तो अधिकतम किराया दुगना होकर 60 रुपये हो गया जबकि न्यूनतम किराया 10 रुपये ही रहा।
माकन ने कहा कि चौथे फेयर फिक्शेसन कमेटी की रिपोर्ट के पेरा 3.5 में एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाईन को लेकर साफ तौर पर कहा गया है कि वर्तमान किराया जो इस लाईन पर वसूला जा रहा है वह तीसरी फेयर फिक्शेसन कमेटी की सिफारिशों से कम है। अर्थात यह बात स्पष्ट हो जाती है कि चौथी फेयर फिक्शेसन कमेटी की रिपोर्ट को पूरी तरह से लागू करने के लिए सरकार बाध्य नही है।
बता दें कि मुम्बई मेट्रो जो कि प्राईवेट कम्पनी के द्वारा चलाई जा रही है उसकी तुलना दिल्ली की सरकारी मेट्रो से तुलना करते करें तो मुम्बई मेट्रो वन प्राईवेट लिमिटेड (एमएमओपीएल) को लेकर बनी पहली फेयर फिक्शेसन कमेटी ने मुम्बई मेट्रो के अधिकतम किराए को 40 से बढ़ाकर 45 रुपये करने की सिफारिश की थी (उस समय मुम्बई मेट्रो की किराए की दरें 10, 20, 30 व 40 रुपये थी जो कि सिफारिश के बाद 10, 20, 25, 35 व 45 होनी थी) दूसरी ओर एमएमओपीएल अधिकतम किराए को 45 रुपये से बढ़ाकर 110 रुपये करना चाहते थे, परंतु एमएमआरडीए (महाराष्ट्र मेट्रोपोलिटन रेल डेवलपमेन्ट अथारिटी) ने प्रस्तावित किराए की बढ़ोतरी को लेकर मुम्बई उच्च न्यायायलय में याचिका लगाई तथा उच्च न्यायालय ने बढ़े हुए किराए पर रोक लगा दी।
माकन ने कहा कि इसी प्रकार दिल्ली की केजरीवाल सरकार को चौथे फेयर फिक्शेसन कमेटी की रिपोर्ट पर आधारित बढ़े हुए किराए के खिलाफ 15 महीने रिपोर्ट को दबाकर बैठने की बजाए कोर्ट में जाकर मेट्रो के बढ़े हुए किरायों पर रोक लगवानी चाहिए थी।
दिल्ली मेट्रो के बढ़े हुए किराए पर सुझाव देते हुए माकन ने कहा है कि 2016-17 की निदेशकों की रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली मेट्रो में यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या 100.79 करोड़ बताई गई। माकन ने कहा कि चौथी फेयर फिक्शेसन कमेटी के अनुसार अधिकतम किराया 10 रुपये बढ़ाया है और यदि हम 7.5 रुपये का औसत ले तो बढ़े हुए किराए का प्रभाव 7.5×100.79=755.92 करोड आता है। माकन ने कहा कि फेस I और II के एम.ओ.यू. के अनुसार मेट्रो का घाटा केन्द्र व दिल्ली सरकार को आधा-आधा वहन करना है और III फेस में केवल 22 किलोमीटर मेट्रो ही तैयार हुई है। माकन ने कहा कि बढ़े हुए दिल्ली मेट्रो के किराए से निजात पाने के लिए 755.92 करोड़ की सब्सिडी प्रतिवर्ष दी जानी चाहिए ताकि दिल्ली मेट्रो यात्रियों को राहत की सांस मिल सके।
माकन ने कहा कि यदि दिल्ली की केजरीवाल सरकार मेट्रो के बढ़े हुए किराए पर रोक के लिए कोर्ट नही जाती है तो मजबूरन जनता के हित के लिए दिल्ली कांग्रेस बढ़े हुए किराए पर रोक के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाऐगी।

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