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स्वामी असीमानंद अजमेर धमाके के बाद मक्का मस्जिद केस में भी बरी

ग्यारह साल बाद अाया फैंसला

अाेपिनियन पाेस्ट 

हैदराबाद की मशहूर मक्का मस्जिद पर 2007 में हुए विस्फोट के मामले में मुख्य आरोपी स्वामी असीमानंद को 11 साल बाद सोमवार को हैदराबाद के नामपल्ली आपराधिक कोर्ट ने बरी कर दिया है। उनके साथ ही अन्य पांच आरोपियों को भी बरी कर दिया गया है। आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत न होने के कारण कोर्ट ने ये फैसला सुनाया।  2007 में मस्जिद में हुए ब्लास्ट में नौ लोगों की मौत हो गई थी। वहीं करीब 58 लोग घायल हो गए थे। मार्च 2017 में असीमानंद को अजमेर शरीफ दरगाह मामले में भी कोर्ट ने बरी कर दिया था।

जानें क्या हुआ था ब्लास्ट वाले दिन
18 मई 2007 को जुमे की नमाज के वक्त दोपहर करीब 1:25 बजे पाइप बम धमाका हुआ था। इस धमाके को मोबाइल की मदद से ऑपरेट किया गया था। ब्लास्ट में मौके पर ही करीब नौ लोगों की मौत हो गई थी। वहीं 58 लोग घायल हो गए थे। ब्लास्ट के बाद हुई जांच में सामने आया था कि जिस बम में धमाका हुआ उसे बम वजुखाना में संगमरमर की बेंच के नीचे लगाया गया था। इसे विशेष तौर पर नमाज के वक्त एक्टिव किया गया। घटना के समय मस्जिद में हजारों की संख्या में लोग मौजूद थे।

ब्लास्ट के बाद मस्जिद में तीन बम और मिले थे, जिनमें से एक दीवार के पास और दो वजुखाने के पास मिले थे। घटना से आक्रोशित लोगों ने विरोध में प्रदर्शन किया था। इस दौरान पुलिस को स्थिति काबू में लेने के लिए फायरिंग करनी पड़ी थी, जिसमें लोग मारे गए थे।  जांच के दौरान एनआईए ने असीमानंद और लक्ष्मण दास महाराज सहित कई नेताओं को गिरफ्तार कर उन्हें मुख्य आरोपी बनाया था।

कौन हैं स्वामी असीमानंद
जतिन चटर्जी उर्फ नबाकुमार सरकार उर्फ स्वामी ओंकारनाथ उर्फ स्वामी असीमानंद जैसे इस आदमी के जितने नाम हैं, यह  आतंक फैलाने के उतने ही मामलों से भी जुड़ा है ।  2007 में हैदराबाद में मक्का मस्जिद में विस्फोट हो, इसी साल अजमेर दरगाह में विस्फोट हो या समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट या 2008 में महाराष्ट्र के मालेगांव में विस्फोट, आतंक फैलाने की इन सभी वारदातों में स्वामी असीमानंद का नाम जुड़ा रहा है। वनस्पति विज्ञान में स्नातक असीमानंद पश्चिम बंगाल के हूगली के निवासी हैं और उच्च शिक्षित हैं। 1990 से 2007 के बीच स्वामी असीमानंद अारएसएस से जुड़ी संस्था वनवासी कल्याण आश्रम के प्रांत प्रचारक प्रमुख रहे । असीमानंद 1995 के आस-पास गुजरात के डांग जिले के मुख्यालय आह्वा आए और हिंदू संगठनों के साथ ‘हिंदू धर्म जागरण और शुद्धीकरण’ के काम में लग गए। आह्वा में असीमानंद ने शबरी माता का मंदिर बनाया और शबरी धाम की स्थापना की। पुलिस का दावा है कि 2006 में मुस्लिम समुदाय को आतंकित करने के लिए किए गए विस्फोटों से ठीक पहले असीमानंद ने इसी शबरी धाम में कुंभ का आयोजन किया कुंभ के दौरान विस्फोट में शामिल करीब 10 लोग इसी आश्रम में रहे इसके अलावा असीमानंद बिहार के पुरुलिया, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र में भी सक्रिय रहे।

पहचान छिपाकर छिपते रहे

सीबीआई का दावा है कि स्वामी असीमानंद हरिद्वार में अपनी पहचान छिपाकर रह रहे थे और उन्होंने फर्जी परिचय पत्र भी हासिल किए। सीबीआई स्वामी के पास से कोलकाता से जारी हुआ पासपोर्ट, कई फर्जी राशन कार्ड और हरिद्वार प्रशासन द्वारा जारी मतदाता पहचान पत्र भी जब्त किया था। स्वामी की तलाश 2009 के बाद से शुरू हुई जब सुरक्षा एजेंसियों को यह ठोस जानकारी मिली कि आरोपी अपने भेष बदलता है। सूत्रों के मुताबिक, स्वामी की मौजूदगी के बारे में जानकारी मिलने के बाद सीबीआई तथा एटीएस (महाराष्ट्र) ने वर्ष 2009-10 में मध्य प्रदेश और गुजरात के विभिन्न स्थानों की तलाशी ली।

मालेगांव ब्लास्ट केस में नाम कैसे आया सामने

स्वामी का नाम मालेगांव विस्फोट की जांच के दौरान भी सामने आया जब महाराष्ट्र की एटीएस को मामले की आरोपी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर से स्वामी के वाहन चालक का नंबर मिला।

पहले जुर्म कुबूला फिर मुकर गए

स्वामी असीमानंद ने 2011 में मजिस्ट्रेट को दिए इकबालिया बयान में स्वीकार किया था कि अजमेर दरगाह, हैदराबाद की मक्का मस्जिद और कई अन्य जगहों पर हुए बम ब्लास्ट में उनका और कई अन्य हिंदू चरमपंथी संगठनों का हाथ है। हालांकि बाद में असीमानंद अपने बयान से पलट गए और कहा कि उन्होंने पिछला बयान एनअाइए के दबाव में दिया था।

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