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मध्य प्रदेश- चौथी लहर का इंतजार

रमेश कुमार ‘रिपु’

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की जन आशीर्वाद यात्रा में उमड़ने वाली भीड़ को देख विपक्ष से अधिक सत्ता पक्ष के लोग हैरान हैं। भाजपा नेता कहने लगे हैं कि प्रदेश में सत्ता विरोधी रुझान अब नहीं रहा। प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष विजेश लुनावत कहते हैं, ‘सत्ता विरोधी लहर की बात विपक्ष ने उड़ाई है। मुख्यमंत्री की यात्रा में उमड़ने वाली भीड़ से स्पष्ट है कि जनता चौथी बार भी भाजपा की ही सरकार बनाना चाहती है।’ इसके जवाब में पंचायतीराज सम्मेलन के प्रदेश संयोजक अभय मिश्रा कहते हैं, ‘जन आशीर्वाद यात्रा की भीड़ प्रायोजित है। पूरा प्रशासनिक अमला भीड़ एकत्र करने का काम कर रहा है। सबको लक्ष्य दिया गया है कि कितनी भीड़ लानी है। सवाल यह है कि यदि सत्ता विरोधी रुझान नहीं है तो फिर नगरीय निकाय चुनाव में भाजपा को करारी मात क्यों मिली। 13 पार्षदों में कांग्रेस के 9 पार्षद विजयी हुए और भाजपा के मात्र चार। इससे जाहिर है कि सत्ता विरोधी लहर है और यह विधानसभा चुनाव तक रहेगी।’

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह इस बार चुनावी समर में उतरने वाले हर नेता की तरह असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। हालांकि जन आशीर्वाद यात्रा को मिल रहे समर्थन से कुछ आश्वस्त नजर आ रहे हैं लेकिन नगरीय निकाय के चुनाव परिणाम से वे थोड़ा खिन्न भी दिखते हैं। वहीं ज्योतिरादित्य सिंधिया की वजह से कांग्रेस का ग्राफ बढ़ा है, इसे भाजपा भी स्वीकारती है। शिवराज का मानना है कि जन कल्याणकारी योजनाओं की वजह से जनता चौथी बार भी उन्हें मौका देगी। लेकिन भाजपा अभी तक यह तय नहीं कर पाई है कि चुनाव में उसके लिए तुरुप का पत्ता क्या हो सकता है। जबकि विपक्ष ताबड़तोड़ सरकार पर हल्ला बोल रहा है। बदहाल सड़क, भ्रष्टाचार, बेलगाम नौकरशाही, जुर्म का बोलबाला, बढ़ता कुपोषण, किसानों की आत्महत्या ऐसे मुद्दे हैं जिससे शिवराज सरकार पसोपेश में है। यह अलग बात है कि प्रदेश में बिजली समस्या नहीं है। गेहूं पैदावार तीन गुना बढ़ी है। सिंचाई का क्षेत्र 7.5 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 29 लाख हेक्टेयर हो गया है। लेकिन कांग्रेस इन सरकारी आंकड़ों को झूठ का पुलिंदा बता रही है। मुख्यमंत्री कहते हैं, ‘आंकड़ों में हेराफरी करना क्या बच्चों का खेल है। यूपीए सरकार ने कृषि उपज के लिए हमें अवार्ड दिया। राष्ट्रपति ने हमें सम्मानित किया। क्या फर्जी आंकड़ों पर अवार्ड दिए जाते हैं।’ इस पर ज्योतिरादित्य सिंधिया कहते हैं, ‘विकास की बात करने वाली सरकार बताए कि वो ओवर ड्राफ्ट के दौर से क्यों गुजर रही है। प्रदेश सरकार पर 31 मार्च, 2018 की स्थिति के मुताबिक 1.60 लाख करोड़ रुपये का कर्ज है। शिवराज सरकार में विकास कम भ्रष्टाचार अधिक हुआ है। मुख्यमंत्री की दलील है कि अफसरशाही में भ्रष्टाचार की खबरें इसलिए ज्यादा आई हैं क्योंकि सरकार अपने अधिकारियों पर अंकुश लगाने से डरती है।’

सरकार के प्रति असंतोष
हालांकि भाजपा के नेता मानते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनाव की दिशा बदल देंगे और मोदी लहर से भाजपा को बढ़त मिल जाएगी। जबकि प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष कमलनाथ कहते हैं, ‘गुजरात और कर्नाटक चुनाव के परिणाम बताते हैं कि मोदी लहर का दौर खत्म हो गया है। राज्य में परिवर्तन की लहर है। जन आशीर्वाद यात्रा की भीड़ पर न जाएं, सभी को पता है कि भीड़ कैसे लाई जाती है। मामा की अलोकप्रियता का यह आलम है कि उनकी सभाओं में भीड़ बढ़ाने के लिए पुलिसकर्मियों को सादी वर्दी में एवं नौनिहालों को स्कूल से सभाओं में लाया जाता है। भाजपा विद्यार्थियों का जीवन बर्बाद करने में लगी है। जन आशीर्वाद यात्रा को देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा है कि आशीर्वाद नहीं बल्कि मुख्यमंत्री की विदाई यात्रा है। कांग्रेस का मकसद यही है कि सरकार के प्रति लोगों का जो असंतोष है वह कम न होने पाए बल्कि वह कांग्रेस के प्रति समर्थन में तब्दील हो। प्रदेश में बदलाव की आहट तेज हो।’ प्रदेश कांग्रेस के महासचिव डॉ. मुजीब कहते हैं, ‘बसपा के अलावा गोंडवाना गणतंत्र पार्टी से कांग्रेस के तालमेल की बात चल रही है। भाजपा के खिलाफ हवा है। यदि गठबंधन हो जाता है तो भाजपा को सत्ता से बाहर करने में आसानी होगी।’ भाजपा भी जानती है कि बसपा और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी से कांग्रेस का गठबंधन होने से उसे नुकसान होगा।

विपक्षी गठबंधन पड़ेगा भारी
भाजपा को सत्ता से बाहर करने के लिए कांग्रेस सभी से हाथ मिलाने को तैयार है। बसपा और कांग्रेस के बीच यदि गठबंधन होता है तो 70 सीटें प्रभावित होंगी। वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में बसपा के चार उम्मीदवार जीते थे और 11 स्थानों पर दूसरे नंबर पर रहे थे। 70 स्थानों पर जीत-हार का अंतर 10 हजार वोटों का था। बसपा 60 सीटों पर दस हजार से अधिक वोट लेकर आई थी और 15 सीटों पर उसके उम्मीदवारों को 20 हजार से अधिक वोट मिले थे। जाहिर है कि इतने वोट कांग्रेस के पक्ष में जाने से भाजपा को भारी नुकसान होगा। इस नुकसान से बचने के लिए भाजपा ने अपने नेताओं को कह रखा है कि बसपा, सपा और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के व्यापक जनाधार वाले नेताओं को भाजपा में शामिल करवाएं। अगर वे टिकट मांगते हों तो उन्हें टिकट दिया जाएगा। सतना के रैगांव से बसपा विधायक उषा चौधरी का मुख्यमंत्री की जन आशीर्वाद यात्रा के दौरान मंच पर आना उसी रणनीति का हिस्सा है। बताया जा रहा है कि केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिह तोमर, भाजपा के प्रदेश प्रभारी विनय सहस्रबुद्धे और राष्ट्रीय महामंत्री अनिल जैन की बैठक में उषा चौधरी को भाजपा में शामिल करने पर सहमति बन गई है। उद्योग मंत्री राजेंद्र शुक्ला कहते हैं, ‘भाजपा के सारे रास्ते खुले हैं। विकास के रास्ते में हमारे साथ शामिल होकर जो सहयोग करना चाहते हैं उनका स्वागत है।’

आदिवासियों पर दांव
सत्ता में बने रहने के लिए भाजपा दूसरे दलों से गठबंधन करने की बजाय विभिन्न संगठनों और समुदायों के नेताओं को पार्टी में शामिल करने की रणनीति पर काम कर रही है। इस समय जय आदिवासी युवा शक्ति आदिवासी अधिकार यात्रा के जरिये आदिवासी बहुल विधानसभा क्षेत्रों में पहुंच रही है। इस यात्रा ने भाजपा और कांग्रेस दोनों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। जय आदिवासी युवा शक्ति के अध्यक्ष डॉ. हीरालाल अलावा ने मुख्यमंत्री को 25 सूत्री ज्ञापन सौंपा है। उनका कहना है, ‘यदि भाजपा टिकट देती है तो आदिवासी युवा 70 सीटों पर चुनाव लड़ेगा। भाजपा के आदिवासी नेता बूढ़े हो गए हैं। उन्हें अब आदिवासी समस्याओं से ज्यादा सरोकार भी नहीं रहा।’ मुख्यमंत्री ने उन्हें भाजपा में शामिल होने का न्योता दिया है। चुनाव में आदिवासियों के महत्व को समझते हुए शिवराज ने 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस पर धार जिले में आयोजित कार्यक्रम में आदिवासी विकास पर 24 फीसदी बजट खर्च करने का ऐलान किया। इसके साथ ही इस तारीख को अब आधिकारिक दिवस के तौर पर मनाने के साथ इस दिन सरकारी अवकाश की भी घोषणा की। जाहिर है कि उन्होंने भाजपा के लिए आदिवासियों के बीच वोटों की फसल लहलहाने का इंतजाम किया। इस मौके पर इस बार भव्य आयोजन इस मकसद से किया गया ताकि आदिवासियों को लगे कि शिवराज का उनके प्रति उनका विशेष रुझान है। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर कहा कि जिन आदिवासियों का दिसंबर 2006 से पहले का कब्जा वन भूमि पर है उन्हें वनाधिकार पट्टा दिया जा रहा है। अभी तक 2 लाख 24 हजार पट्टे वितरित किए जा चुके हैं।

आदिवासी कांग्रेस का परंपरागत वोटर रहा है। वह शिवराज की बातों में आने से खुद को कितना बचा पाता है और कांग्रेस अपने वोट बैंक को बचाने के लिए क्या करती है यह देखना अभी बाकी है। फिलहाल शिवराज ने आदिवासियों के लिए सौगात का पिटारा खोल कर कांग्रेस को चौंका दिया है। प्रदेश की कुल आबादी में 5.7 फीसदी अनुसूचित जन जाति के हैं। वर्ष 2013 के चुनाव में अनुसूचित जन जाति के लिए आरक्षित सीटों में से 30 पर भाजपा को, 15 पर कांग्रेस को और एक सीट पर निर्दलीय को विजय मिली थी।

भाजपा यात्रा बनाम कांग्रेस यात्रा
मुख्यमंत्री की जन आशीर्वाद यात्रा को तो जन समर्थन मिल ही रहा है, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ और चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया की परिवर्तन रैलियों में भी जनमानस उमड़ रहा है। कमलनाथ कहते हैं कि शिवराज की यात्रा सरकारी है जबकि कांग्रेस की रैलियों में आने वालों की भीड़ स्वाभाविक है जो बता रही है कि प्रदेश में सत्ता परिवर्तन तय है। नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह द्वारा पिछले कुछ महीनों से निकाली जा रही न्याय यात्रा को भी अच्छा खासा समर्थन मिल रहा है। इसके अलावा पोल खोल यात्रा पर निकले प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष जीतू पटवारी को सुनने के लिए भी भीड़ जुट रही है। ज्योतिरादित्य सिंधिया कहते हैं, ‘जितना प्यारा किसानों के लिए अपना खेत होता है, उससे ज्यादा प्यारी भाजपा नेताओं को रेत है। शिवराज ने नर्मदा सेवा यात्रा निकाली थी। वह नर्मदा सेवा यात्रा नहीं बल्कि नर्मदा सर्वे यात्रा थी। दिन में भ्रमण और रात में अवैध उत्खनन। इस सरकार में भ्रष्टाचार का विकेंद्रीकरण हो गया है।’

धार्मिक प्रबंधन पर जोर
चुनावी जंग जीतने के लिए भाजपा धार्मिक और सामाजिक प्रबंधन पर जोर दे रही है। पार्टी ने अपनी बूथ कमेटियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने यहां के मठ, मंदिर, आश्रम और देव स्थानों के अलावा अन्य धार्मिक स्थलों के पुजारी, साधु-संत, महात्माओं का पता और फोन नंबर फार्म में भरें और उनसे संपर्क करें। सामाजिक समीकरण के तहत एससी, एसटी ओबीसी और महिलाओं की जानकारी बूथवार एकत्र करें। हर बूथ पर 21 सदस्यीय कमेटी बनाई जा रही है जिसमें एक अध्यक्ष, दो उपाध्यक्ष और एक महासचिव होगा। इसमें एससी और महिला सदस्य अनिवार्य है। भाजपा प्रवक्ता डॉ. दीपक विजयवर्गीय कहते हैं, ‘भाजपा समाज में धार्मिक रूप से प्रतिष्ठित लोगों से संपर्क कर रही है। प्रदेश स्तर पर हर बूथ पर जानकारियां एकत्र कर रही है ताकि सभी से संपर्क किया जा सके।’
कांग्रेस भी उदार हिंदुत्च की राह पर चलते हुए प्रदेश के मंदिरों में पहुंच रही है। गुजरात और कर्नाटक के बाद मध्य प्रदेश में भी कांग्रेस अघ्यक्ष राहुल गांधी ने यही रास्ता अपनाने का निर्णय लिया है। राहुल गांधी प्रदेश के सभी बड़े मंदिर जाएंगे। उनकी प्रदेश यात्रा ओंकारेश्वर में ज्योतिर्लिंग के दर्शन से शुरू होगी। वे महाकाल, पीताम्बरा, मैहर आदि धार्मिक स्थानों पर जाएंगे। कांग्रेस के संगठन प्रभारी चंद्र प्रभाष शेखर कहते हैं, ‘जिला अध्यक्षों को कहा गया है कि जिला और ब्लॉक स्तर पर कार्यक्रम आयोजित कर आजादी के आंदोलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की नकारात्मक भूमिका को बताया जाए।’

अटल कलश यात्रा
भाजपा ने अब प्रदेश में अटल कलश यात्रा निकालने का फैसला किया है। यह यात्रा सभी 230 विधानसभा क्षेत्रों से गुजरेगी। इस यात्रा का मकसद दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की यादों को लोगों के दिलों में सदा जिंदा रखना और उनके जीवन से जुड़े पहलुओं को जनता को दिखाना है। दरअसल, अटल जी दलीय सीमाओं से परे सबके प्रिय थे। यही कारण रहा कि प्रदेश कांग्रेस ने चुनाव समिति की पहली बैठक स्थगित करते हुए उसमें अटल जी को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने अपनी छिंदवाड़ा की परिवर्तन रैली भी स्थगित कर दी। नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने भी कहा है कि सभी कांग्रेसी अटल जी कलश यात्रा में शामिल हों। जाहिर है, कांग्रेस नहीं चाहती है कि अटल जी का लाभ भाजपा उठा सके। बहरहाल, भाजपा और कांग्रेस अभी उम्मीदवार चयन और टिकट बंटवारे की प्रक्रिया में है। भाजपा जहां चौथी लहर बनाने में जुटी है वहीं कांग्रेस जनता में सरकार के प्रति असंतोष को भुनाने में लगी है। 

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