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किस वाहन से आएंगी मां दुर्गा, क्‍या होगा प्रभाव ?

ज्‍योतिषाचार्य भानुप्रताप नारायण मिश्र पालकी में मां के आगमन को शुभ नहीं मानते, गणेश जी को लगाएं 21 लड्डुओं का भोग

नई दिल्‍ली।

वैसे तो सभी देवी-देवताओं के अपने विशेष वाहन होते हैं, लेकिन खास मौके पर वे अपने खास वाहन का ही उपयोग करते हैं। इस बार 21 सितंबर बृहस्‍पतिवार आश्विन शुक्ल प्रतिपदा को शारदीय नवरात्र है जो सूर्य स्वामित्व हस्त नक्षत्र में आरंभ होगा। मां दुर्गा का आगमन किस वाहन पर होगा और उसका क्‍या प्रभाव पड़ेगा, इस पर विद्वानों में मतभेद है।

एक ज्योतिषाचार्य के मुताबिक मां दुर्गा का आगमन नौका पर होगा और प्रस्‍थान मुर्गे की सवारी पर करेंगी। नौका पर आगमन से किसान प्रभावित होंगे और मुर्गे पर विदा होना अराजक माहौल का प्रतीक बनेगा।

एक अन्‍य ज्‍योतिषी की मानें तो शारदीय नवरात्र 2017 में मां दुर्गा का आगमन पालकी से होगा और हाथी पर मां की विदाई होगी। यह अति शुभ है क्योंकि पालकी सुख का प्रतीक है और हाथी समृद्ध‍ि का। देवी पुराण में नवरात्र में भगवती के आगमन व प्रस्थान के लिए वार अनुसार वाहन बताए गए हैं।

इसी प्रकार एक अन्‍य ज्‍योतिषी बताते हैं- इस बार माता का आगमन व गमन जनजीवन के लिए हर प्रकार की सिद्धि देने वाला है। ऐसा माना जाता है कि जब मां पालकी में सवार होकर आती हैं तो अपने साथ सुख लेकर आती हैं और समृद्धि देकर जाती हैं।

देवी पुराण के अनुसार आगमन के लिए वाहन

रविवार व सोमवार को हाथी, शनिवार व मंगलवार को घोड़ा, बृहस्‍पतिवार व शुक्रवार को पालकी, बुधवार को नौका पर मां का आगमन होता है। लेकिन ज्‍योतिषाचार्य भानुप्रताप नारायण मिश्र पालकी में मां के आगमन को शुभ नहीं मानते। उनके अनुसार यह एक ऐसा संयोग है जिसे सरकार के लिए शुभ नहीं माना जाता। फिर भी प्रथम पूज्‍य गणेश को प्रसन्‍न करके शुभ फल उत्‍पन्‍न किया जा सकता है।

उनके अनुसार गणेश जी को प्रसन्‍न करने के लिए चतुर्थी के दिन गणेश जी को 21 लड्डुओं का भोग लगाया जाता है, जिसमें से 15 लड्डू और यथाशक्ति दक्षिणा मंदिर के पुजारी को दी जाती है और शेष 6 लड्डू घर प्रसाद के रूप में लाया जाता है। वह बताते हैं कि नवरात्र के दौरान भी 23 सितंबर को गणेश चतुर्थी है। इस अवसर का लाभ उठाया जा सकता है।

सात दिन तक शुभ संयोग

ज्योतिषाचार्य पं. राजीव शर्मा के मुताबिक, मां दुर्गा की आराधना का पर्व शारदीय नवरात्र इस वर्ष पूरे नौ दिन का रहेगा। नौ दिन देवी के भक्त आराधना व अनुष्ठान करेंगे। खास बात यह है कि नौ में सात दिन शुभ संयोग भी रहेंगे। 29 सितम्बर को नवमी व 30 को दशहरा मनाया जाएगा। नवरात्र में कोई घटत-बढ़त न होना शुभ संयोग है। यह विशेष संयोग भी विशेष फलदायी साबित होगा। शुभ संयोग नए कार्यों की शुरुआत के लिए बेहतर रहेंगे। विजयादशमी दशहरा 30 को सर्वार्थ सिद्धि व रवि योग में मनाया जाएगा।

घट स्थापना

मुहूर्त -सुबह 6.15 से 7.50 बजे तक

दोपहर 12.15 से 1.30 बजे तक

चौघडि़या विचार

शुभ – सूर्योदय से सुबह 7.38 बजे तक

लाभ – दोपहर 12.15 से 1.30 बजे तक

अमृत – दोपहर 1.30 से 3.32 बजे तक

सिद्ध – शाम 4.15 से 6 बजे तक

कन्या लग्न – सूर्योदय से सुबह 8.08 बजे तक

अभिजीत मुहूर्त – सुबह 11.40 से दोपहर 12.29 बजे तक

हस्त नक्षत्र में घट स्थापना मुहूर्त का होना शुभ फलदायक और लक्ष्मी प्रदायक माना गया है।

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