इमरान को मोदी ने नहीं बुलाया

ओपिनियन पोस्ट
Mon, 20 Aug, 2018 16:21 PM IST

ओपिनियन पोस्‍ट।

भारत ने पाकिस्तान के नए विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी के उस दावे को खारिज किया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इमरान खान को बातचीत के लिए न्योता भेजा है। दरअसल, क्रिकेटर से नेता बने इमरान खान ने पिछले 18 अगस्त को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली और पीएम नरेंद्र मोदी ने उन्हें चिट्ठी लिखकर बधाई दी थी।

इस चिट्ठी पर पाकिस्‍तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कुछ और दावा किया था जिसे भारत ने खारिज कर दिया है। इससे पहले आम चुनाव में सबसे ज्यादा सीट जीतने पर भी पीएम मोदी ने फोन कर इमरान खान को बधाई दी थी। इस प्रकार भारत को लेकर इमरान खान का बड़ा झूठ बेनकाब हो गया है।

पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने दावा किया है कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बातचीत की शुरुआत करने के लिए प्रधानमंत्री इमरान को चिट्ठी लिखी है। कुरैशी ने कश्मीर का राग अलापा और कहा कि दोनों देशों के बीच का मसला बहुत ही जटिल है। उस संदर्भ में बातचीत की जानी चाहिए। हमें समस्या का समाधान करना होगा। दोनों देशों के बीच पुन: वार्ता की शुरुआत होनी चाहिए।

भारत ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इमरान खान को पत्र भेजा है जिसमें उन्होंने कहा है कि भारत पाकिस्तान के साथ शांतिपूर्ण पड़ोसी रिश्तों के लिए प्रतिबद्ध है। भारत पड़ोसी पाकिस्तान के साथ सकारात्मक और सार्थक साझेदारी के लिए आशान्वित है। मोदी ने आतंकवाद मुक्त दक्षिण एशिया के लिए काम करने की जरूरत पर जोर दिया है।

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इससे पहले कुरैशी ने कहा, ‘भारत के साथ निरंतर और बिना दखलअंदाजी वाली बातचीत की जरूरत है। हम पड़ोसी हैं। लंबे समय से हमारे बीच विवाद चले आ रहे हैं,  हम दोनों को ही अपनी परेशानियां मालूम हैं। लेकिन हमारे पास सिवाय बातचीत के कोई और विकल्प नहीं है। हम यहां कुर्सियां तोड़ने नहीं आए हैं।’ उन्होंने कहा कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीएम इमरान खान को पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने दोनों देशों के बीच बातचीत की शुरुआत का संकेत दिया है।

सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री इमरान खान को लिखी गई बधाई वाली चिट्ठी में एक पड़ोसी देश के रूप में सकारात्मक रूप से आगे बढ़ने की बात कही है,  इसमें औपचारिक तौर पर दोनों देशों के संबंधों को लेकर बातचीत के लिए आमंत्रित करने जैसा कोई प्रस्ताव नहीं दिया गया है।

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