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हिमाचल चुनाव: किसानों का मुद्दा उठेगा- प्रो. प्रेम कुमार धूमल

प्रेम कुमार धूमल हिमाचल के दो बार मुख्यमंत्री रहे हैं। धूमल खुद कहते हैं कि उन्हें सड़कों का मुख्यमंत्री कहा जाता है। हमीरपुर सीट से विधानसभा चुनाव जीतते रहे हैं। राज्य में चुनाव जीतते हैं तो क्या करेंगे और चुनाव को लेकर पार्टी की क्या रणनीति अपना रहे हैं जैसे मुद्दों पर निशा शर्मा ने बात की पूर्व मुख्यमंत्री प्रोफेसर प्रेम कुमार धूमल से-

कौन-कौन से मुद्दे हैं जिसको लेकर पार्टी सता में आ सकती है?

कांग्रेस सरकार का भ्रष्टाचार सबसे बड़ा मुद्दा है। हमने कांग्रेस के 40 लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला उजागर किया था जिसमें मुख्यमंत्री भी शामिल हैं। हमने आरोप ही नहीं लगाए थे बल्कि तथ्यों सहित आरोपों को साबित भी किया था। अब हिमाचल की जनता भ्रष्टाचार से त्रस्त है और भ्रष्टाचार तब तक खत्म नहीं हो सकता जब तक कि कांग्रेस सत्ता में है। वन माफिया, भू माफिया, ड्रग माफिया और शराब माफिया का गढ़ कांग्रेस ही है। कांग्रेस के राज में कोई कर्मचारी सुरक्षित नहीं है। फारेस्ट गार्ड होशियार सिंह का मामला देख लीजिए। पहले पुलिस ने कहा कि उसने आत्महत्या की है। हमने पूछा कि कैसे की तो कहा गया कि पहले उसने जहर पी लिया, फिर नसें काट ली, फिर दरख्त पर चढ़ कर उलटा लटक गया। हमने पहले ही कहा था कि यह वन माफिया का काम होगा। चार लोगों को हिरासत में लिया गया और अब मामला सीबीआई के पास है। गुड़िया कांड को देख लीजिए। नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार की घटना, फिर हत्या, फिर उस मामले को दबाने का प्रयास किया गया। हिमाचल के इतिहास में पहली बार हुआ है कि दो मामले सीबीआई के पास गए हैं। आईजी रैंक का शख्स जेल में है, अब और क्या कहा जाए। इन सब बातों से स्पष्ट है कि लोगों का विश्वास सरकार से उठ चुका है। विकास के मामले में कांग्रेस ने मुंह की खाई है। आज समाज का हर वर्ग सरकार से नाराज है। स्कूल के बच्चों को वर्दियां नहीं दी, कॉलेज में रूसा लगा दिया जबकि न कॉलेज में प्रोफेसर हैं, न इनफ्रास्ट्रक्चर है। युवाओं को पिछली बार कहा कि बेरोजगारी भत्ता एक हजार रुपये प्रतिमाह देंगे लेकिन किसी को नहीं मिला। कर्मचारियों को हमने 2009 में डीए दिया था। इन्होंने कहा धूमल ने 2009 से देने को कहा है। हम 2006 से देंगे लेकिन दिया 2012 में वह भी पूरा नहीं दिया। पेंशनर्स को छह-छह महीने से पेंशन नहीं मिली है। वो कभी कहीं धरना दे रहे हैं कभी कहीं हड़ताल करते हैं। किसान जंगली जानवरों से परेशान है। सेबों की फसल मार्केट नहीं पहुंच पाई क्योंकि सड़कें ही नहीं बनी हैं। अब बताइए कौन-सा तबका है जो सरकार से खुश है। हम मुद्दे नहीं बना रहे हम कह रहे हैं कि किसी भी तबके की बात कर लीजिए, सरकार हर जगह नाकाम रही है।

क्या टिकट बंटवारे का कोई प्रभाव बीजेपी के बहुमत पर पड़ेगा?

-ऐसा नहीं है, यह बात सही है कि हर विधानसभा क्षेत्र में कई सौ लोग होते हैं जो चुनाव लड़ने के लायक होते हैं लेकिन पार्टी उनमें से सबसे बेहतर चुनती है , जो सभी नहीं हो सकते। टिकट एक होती है, अब जिसको टिकट मिलती नहीं है वह निराश और हताश होते हैं। समय बितने के साथ ही वह पार्टी की चीजों को समझ जाता है और संगठन में अपना योगदान देता है।

कहा यह भी जा रहा है कि आप कह रहे हैं कि आपको सीएम नहीं बनाया गया होता तो आप सरकार नहीं बनने देते?

आप सुनी सुनाई बातों पर विश्वास ना करें, ऐसा बिल्कुल नहीं है। सीएम बनना और बनाना मेरे अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।

किसानों का मुद्दा सरकार क्यों नहीं उठाती?

मैंने तो कहा है कि किसानों का मुद्दा बड़ा है। जंगली जानवर, बंदर, जंगली सुअर, नील गाय खेती को नष्ट कर देते हैं। किसान खेती करना छोड़ रहे हैं। हमारे ध्यान में यह सब चीजें हैं। खेती की सुरक्षा के लिए किसान को 90 या 100 दिन का मनरेगा की तरह पैसा दिया जाना चाहिए, जिससे फसल भी बचेगी, किसानों को रोजगार भी मिलेगा। हम केंद्र सरकार के समक्ष इस बात को रखेंगे।

कुछ जगहों पर सड़कें खराब हैं, वहां किस आधार पर उन इलाकों में वोट मांगेगें?

-हमने जब सड़के बनाई थी तो लोगों ने हमें सड़को वाला मुख्यमंत्री कहा था। हमने कभी कोई भेदभाव नहीं किया कि यहां कांग्रेस का विधायक है तो यहां सड़के नहीं बनानी है लेकिन कांग्रेस भेदभाव की राजनीति करती है। यही कारण है कि देहरा में सड़के नहीं बनी हैं। जबकि उसके आगे-पीछे सब जगह अच्छी सड़के हैं। यही नहीं नाण, चंबा में मेडिकल कॉलेज शुरु कर दिया लेकिन हमीरपुर में नहीं शुरु किया। कहते हैं क्षेत्रवाद नहीं करते लेकिन हर जगह क्षेत्रवाद झलकता है। जनता सब जानती है और इस बार चुनावों में कांग्रेस से इसका बदला लेगी।

बेरोजगारी पर क्या कहेंगे?

-हमने पहले भी कहा है दोबारा कह रहे हैं स्वरोजगार, स्वावलंबन और स्वाभिमान हमारे राज्य की शक्ति होगी। हम इन तीन चीजों को लेकर चले थे जिसमें शिक्षा का अधिकार सबको मिले, लोग स्वरोजगार की ओर बढ़े और स्वाभिमान से काम कर सकें।

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