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गायत्री के लिए जेल ही अंतिम विकल्प, काली कमाई पर भी गिर सकती है गाज

दुष्कर्म के मामले में प्रजापति आज कर सकते हैं सरेंडर

ओपिनियन पोस्ट
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी सरकार में खनन मंत्री रहे गायत्री प्रजापति के बुरे दिनों की शुरुआत हो गई है । दुष्कर्म के आरोप में तो उन्हें सलाखों के पीछे जाना ही होगा । अपने मंत्रित्व काल में उन्होंने जो अकूत संपत्ति हासिल की है उस पर भी जल्द ही गाज गिर सकती है। सत्रह दिन पहले सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर प्रजापति के खिलाफ जो बलात्कार का मामला दर्ज हुआ था उससे बचने के लिए भले ही वे अब तक पुलिस से आँख मिचौली खेलते रहे हो लेकिन अमेठी सीट से चुनाव लड़ रहे सपा सरकार के इस चर्चित मंत्री को अब खुद को सरेंडर करना पड़ सकता है। क्योंकि उनके गनर चंद्रपाल तथा दो अन्य आरोपियों अशोक तिवारी और आशीष शुक्ला की गिरफ्तारी के बाद खुद को कानून के हवाले करना ही गायत्री प्रजापति के लिए अंतिम रास्ता बचा है।
लेकिन इससे भी बड़ी बात ये है की गायत्री प्रजापति ने अपने मंत्रित्व काल में जो काली कमाई की है अब उसके खुलासे की मांग भी उठने लगी है ।

 मुलायम और शिवपाल रहे है गायत्री प्रजापति के संरक्षक

मुलायम और शिवपाल रहे है गायत्री प्रजापति के संरक्षक

लेकिन बलात्कार मामले में गिरफ्तारी के साथ गायत्री प्रसाद प्रजापति के बारे में हर रोज और भी नए खुलासे हो रहे हैं। अब जानकारी सामने आ रही है कि यूपी के गवर्नर चुनाव के नतीजे आने के फौरन बाद नई सरकार को गायत्री की अकूत संपत्ति के बारे में जांच के आदेश दे सकते है। हालाँकि गायत्री के खिलाफ पहले भी लोकायुक्त में शिकायत की गई थी, लेकिन उसका कोई नतीजा नहीं निकला था। सूत्रों की माने तो इस बार गायत्री प्रजापति के लिए बचना मुश्किल होगा।
आपकों बता दें कि साल 2002 से पहले गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले गायत्री प्रजापति मंत्री बनने के बाद अचानक कैसे अरबपति बन गए। कभी साइकिल से चलने वाले गायत्री कैसे बीएमडब्लू जैसी लग्जरी कारों से चलने लगे। आखिर किस तरह उन्होंने अरबों का साम्राज्य खड़ा कर लिया। मीडिया खबरों के मुताबिक साल 2014-2015 के बीच गायत्री प्रजापति और उनके परिवार के नाम पर कई कंपनियां रजिस्टर हुई हैं।
गायत्री प्रजापति के सगे-संबंधियों के नाम से दर्ज एक दर्जन से अधिक कंपनियों का ब्यौरा सामने आ रहा है । इनके दफ्तर बेशक एक कमरे में हो, लेकिन सालाना टर्नओवर करोड़ों रुपये में है। इनमें से अधिकतर कंपनियों के डायरेक्टर गायत्री के बेटे अनिल और अनुराग प्रजापति हैं। उनके खनन मंत्री रहने के दौरान बनाई गई इन कंपनियों के द्वारा ही करोड़ों रुपयों का लेनदेन किया गया था। कई कंपनियों में तो गायत्री के रिश्तेदार, ड्राईवर और नौकर तक डायरेक्टर हैं।
ज्ञात’हो की इसी साल 2017 में अमेठी से नामांकन के वक़्त गायत्री प्रजापति ने अपने हलफनामे में बताया कि उनके पास कुल 10 करोड़ की संपत्त‍ि है। इसमें उनके पास 1 करोड़ 17 लाख 55 हजार रुपये और पत्नी के नाम 1 करोड़ 68 लाख 21 हजार रुपये की चल संपत्ति है। गायत्री के पास 5 करोड़ 71 लाख 13 हजार रुपये और उनकी पत्नी 72 लाख 91 हजार 191 रुपये की अचल संपत्ति है। गायत्री के पास 100 ग्राम, तो पत्नी के पास 320 ग्राम सोना है। इसके साथ ही एक पिस्टल, रायफल और बंदूक के साथ उन्होंने गाड़ी में एक जीप बतायी।
यूपी सरकार के सबसे विवादस्पद मंत्रियों में शुमार गायत्री प्रसाद प्रजापति साल 2002 तक गरीबी रेखा के नीचे आते थे। साल 2012 में उन्होंने अपनी कुल संपत्ति 1.83 करोड़ रुपये बताई थी। साल 2009-10 में उनकी सालाना आय 3.71 लाख रुपये थी। लेकिन वही गायत्री प्रसाद प्रजापति अब बीएमडब्लू जैसी लग्जरी कार से चलते हैं। गायत्री प्रजापति के परिजनों और उनके करीबियों के स्वामित्व में 13 कंपनियों का भी आरोप हैं, जिनमें उनके दोनों बेटे, भाई और भतीजे को डायरेक्टर बताया गया है। बता दें कि गायत्री मुलायम सिंह यादव और शिवपाल यादव के बेहद करीबी मंत्री रहे है । अखिलेश यादव ने जब उन्हें मंत्रिमंडल से हटाया था और सपा कुनबे में घमासान मचा था तब मुलायम के दबाव में ही अखिलेश को दोबारा गायत्री को मंत्रिमंडल में वापस लेना पड़ा था। हो सकता है कि गायत्री के भ्रष्टाचार की आंच मुलायम परिवार तक भी पहुँच जाये ।

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ओपिनियन पोस्ट एक राष्ट्रीय पत्रिका है जिसका उद्देश्य सही और सबकी खबर देना है। राजनीति घटनाओं की विश्वसनीय कवरेज हमारी विशेषज्ञता है। हमारी कोशिश लोगों तक पहुंचने और उन्हें खबरें पहुंचाने की है। इसीलिए हमारा प्रयास जमीन से जुड़ी पत्रकारिता करना है। जीवंत और भरोसमंद रिपोर्टिंग हमारी विशेषता है।
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