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उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग में 5.8 तीव्रता का भूकंप, तेज झटके से दहले दिल्ली-एनसीआर के लोग

किसी भी जगह से जान-माल के नुकसान की कोई खबर नहीं, गृहमंत्रालय ने मांगी रिपोर्ट, अलर्ट पर एनडीआरएफ

नई दिल्ली।

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग में 5.8 तीव्रता का भूकंप आने से दिल्ली एनसीआर में सोमवार की रात लगभग साढ़े दस बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए, जिससे लोग दहल गए। देहरादून से भी खबर है कि भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए हैं। भूकंप का केंद्र उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग में बताया गया है। इस संबंध में गृहमंत्रालय ने रिपोर्ट मांगी है और एनडीआरएफ अलर्ट पर है।

रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 5.8 मापी गई है। रात 10.35 मिनट पर झटके महसूस किए गए। भूकंप के झटके काफी देर तक महसूस किए गए। देहरादून में झटकों के बाद लोग सड़कों पर निकल आए। देहरादून से मिली खबरों के मुताबिक कुमाऊं, गढ़वाल की रेंज में झटके महसूस किए गए। पश्चिमी यूपी में भी झटके महसूस किए गए।

पंजाब में भी झटके महसूस किए जाने की खबर है। हालांकि किसी भी जगह से जान-माल के नुकसान की कोई खबर नहीं मिली। भूगर्भ विज्ञानी अरुण वापट के मुताबिक, “5.3 तीव्रता के हिसाब ये भूकंप ज्यादा नुकसानदेह नहीं होगा। इससे कच्चे मकानों को नुकसान होने की संभावना है। अभी भूकंप के बाद के झटकों का खतरा है लेकिन इनकी तीव्रता कम होने की उम्मीद है।”

भूकंप के दौरान बरतें ये सतर्कता

अगर आप किसी इमारत के अंदर हैं तो फर्श पर बैठ जाएं और किसी मजबूत फर्नीचर के नीचे चले जाएं। यदि कोई मेज या ऐसा फर्नीचर न हो तो अपने चेहरे और सर को हाथों से ढंक लें और कमरे के किसी कोने में दुबककर बैठ जाएं।

अगर आप इमारत से बाहर हैं तो इमारत, पेड़, खंभे और तारों से दूर हट जाएं। अगर आप किसी वाहन में सफर कर रहे हैं तो जितनी जल्दी हो सके वाहन रोक दें और वाहन के अंदर ही बैठे रहें।

अगर आप मलबे के ढेर में दब गए हैं तो माचिस कभी न जलाएं, न तो हिलें और न ही किसी चीज को धक्का दें। मलबे में दबे होने की स्थिति में किसी पाइप या दीवार पर हल्के-हल्के थपथपाएं, जिससे कि बचावकर्मी आपकी स्थिति समझ सकें।

अगर आपके पास कोई सीटी हो तो उसे बजाएं। कोई चारा न होने की स्थिति में ही शोर मचाएं। शोर मचाने से आपकी सांसों में दमघोंटू धूल और गर्द जा सकती है। अपने घर में हमेशा आपदा राहत किट तैयार रखें।

भूकंप आता कैसे है?

पृथ्वी की बाहरी सतह सात प्रमुख एवं कई छोटी परतों में बंटी होती है। 50 से 100 किलोमीटर तक की मोटाई की ये परतें लगातार घूमती रहती हैं। इसके नीचे तरल पदार्थ लावा होता है और ये परतें (प्लेटें) इसी लावे पर तैरती रहती हैं और इनके टकराने से ऊर्जा निकलती है और झटके आते हैं। इसी को भूकंप कहते हैं।

भारतीय उपमहाद्वीप को भूकंप के खतरे के लिहाज से सिसमिक जोन 2,3,4,5 जोन में बांटा गया है। पांचवा जोन सबसे ज्यादा खतरे वाला माना जाता है। पश्चिमी और केंद्रीय हिमालय क्षेत्र से जुड़े कश्मीर, पूर्वोत्तर और कच्छ का रण इस क्षेत्र में आते हैं।

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ओपिनियन पोस्ट एक राष्ट्रीय पत्रिका है जिसका उद्देश्य सही और सबकी खबर देना है। राजनीति घटनाओं की विश्वसनीय कवरेज हमारी विशेषज्ञता है। हमारी कोशिश लोगों तक पहुंचने और उन्हें खबरें पहुंचाने की है। इसीलिए हमारा प्रयास जमीन से जुड़ी पत्रकारिता करना है। जीवंत और भरोसमंद रिपोर्टिंग हमारी विशेषता है।
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