न्यूज फ्लैश

अलविदा खांसी नहीं, अलविदा कोरेक्स

कोरेक्स, सेरिडॉन, डीकोल्ड, विक्स एक्शन 500 समेत 328 दवाओं पर प्रतिबंध

ओपिनियन पोस्‍ट।

अलविदा खांसी हेडलाइन के साथ जिस कोरेक्‍स के विज्ञापन से आप बार बार रूबरू होते हैं और खांसी को अलविदा करने का संदेश प्रसारित किया जाता है, अब उसी कोरेक्‍स को अलविदा कहना होगा। क्‍योंकि  कोरेक्‍स समेत 328 दवाओं के उत्पादन, बिक्री अथवा वितरण पर सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया है। इसके अलावा छह अन्‍य दवाओं पर भी प्रतिबंध लगाया गया है।

बता दें कि वर्ष 2016 से ही असुरक्षित और बिना काम की दवाओं पर प्रतिबंध के लिए कानूनी लड़ाई लड़ी जा रही थी। लेकिन अब कई लोकप्रिय दवाओं पर प्रतिबंध के बाद लगभग 6000 ब्रांड प्रभावित हुए हैं, जिससे दवा कंपनियों और सरकार के बीच चल रही लंबी कानूनी लड़ाई का अंत हो गया है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने पिछले 12 सितंबर को मानव उपयोग के उद्देश्य से 328 एफडीसी (फिक्स्ड डोज कांबिनेशन या निश्चित खुराक संयोजन) के उत्पादन, बिक्री अथवा वितरण पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया। सरकार ने जिन दवाओं पर रोक लगाई है उनमें वे दवाएं हैं जो जल्‍द आराम पाने के लिए लोग मेडिकल शॉप से बिना पर्चे के खरीद लेते हैं।

इनमें कई दवाएं सिरदर्द, जुकाम, दस्त, पेट दर्द जैसी बीमारी में ली जाती हैं। इसके अलावा मंत्रालय ने कुछ शर्तों के साथ छह एफडीसी के उत्पादन, बिक्री अथवा वितरण को भी प्रतिबंधित कर दिया है।

इससे पहले केंद्र सरकार ने 2016 के मार्च में औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 की धारा 26ए के तहत मानव उपयोग के उद्देश्य से 344 एफडीसी के उत्पादन, बिक्री और वितरण पर प्रतिबंध लगाया था। इसके बाद सरकार ने समान प्रावधानों के तहत 344 एफडीसी के अलावा पांच और एफडीसी को प्रतिबंधित कर दिया था।

हालांकि,  इससे प्रभावित उत्पादकों अथवा निर्माताओं ने देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों और सुप्रीम कोर्ट में इस निर्णय को चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट द्वारा 15 दिसम्बर,  2017 को सुनाए गए फैसले में दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए इस मसले पर दवा तकनीकी सलाहकार बोर्ड द्वारा गौर किया गया, जिसका गठन औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 की धारा 5 के तहत हुआ था।

इस बोर्ड ने इन दवाओं पर अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंप दी। दवा तकनीकी सलाहकार बोर्ड ने अन्य बातों के अलावा यह सिफारिश भी की कि 328 एफडीसी में निहित सामग्री का कोई चिकित्सीय औचित्य नहीं है और इन एफडीसी से मानव स्वास्थ्य को खतरा पहुंच सकता है।

बोर्ड ने सिफारिश की कि औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 की धारा 26ए के तहत व्यापक जनहित में इन एफडीसी के उत्पादन, बिक्री अथवा वितरण पर प्रतिबंध लगाना आवश्यक है। सरकार ने जिन दवाओं पर रोक लगाई है, उनमें सेरिडॉन, डिकोल्ड, जिंटाप, सुमो, जीरोडॉल, फेंसिडील, विक्स एक्शन 500, कोरेक्स और कई तरह के ऐंटीबायॉटिक्स, पेन किलर्स, शुगर और दिल के रोगों की दवाएं शामिल हैं। अभी और भी कई एफडीसी दवाएं हैं, जो देश में बिक रही हैं। माना जा रहा है कि सरकार 500 और एफडीसी पर रोक लगा सकती है।

The following two tabs change content below.
ओपिनियन पोस्ट

ओपिनियन पोस्ट

ओपिनियन पोस्ट एक राष्ट्रीय पत्रिका है जिसका उद्देश्य सही और सबकी खबर देना है। राजनीति घटनाओं की विश्वसनीय कवरेज हमारी विशेषज्ञता है। हमारी कोशिश लोगों तक पहुंचने और उन्हें खबरें पहुंचाने की है। इसीलिए हमारा प्रयास जमीन से जुड़ी पत्रकारिता करना है। जीवंत और भरोसमंद रिपोर्टिंग हमारी विशेषता है।
ओपिनियन पोस्ट
About ओपिनियन पोस्ट (4429 Articles)
ओपिनियन पोस्ट एक राष्ट्रीय पत्रिका है जिसका उद्देश्य सही और सबकी खबर देना है। राजनीति घटनाओं की विश्वसनीय कवरेज हमारी विशेषज्ञता है। हमारी कोशिश लोगों तक पहुंचने और उन्हें खबरें पहुंचाने की है। इसीलिए हमारा प्रयास जमीन से जुड़ी पत्रकारिता करना है। जीवंत और भरोसमंद रिपोर्टिंग हमारी विशेषता है।

Leave a comment

Your email address will not be published.

*