दिल्ली का बाबू : दावोस में बाबुओं की मौज

दावोस में बाबुओं की मौज

महाराष्ट्र के पांच शीर्ष बाबू दावोस की बर्फीली ढलानों पर अपनी पांच दिवसीय यात्रा के लिए 7.63 करोड़ रुपये के बिल को लेकर चर्चा में हैं. प्रतिनिधि मंडल में अतिरिक्त मुख्य सचिव एसएम गवई भी शामिल थे. सूत्रों के अनुसार, बिल अब राज्य लेखा विभाग की जांच के दायरे में है और अगर उसे मंजूरी मिल जाती है, तो राज्य के खजाने से उसका भुगतान किया जाएगा. ट्विटर पर इसे लेकर बहुत नाराजगी है, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से फड़णवीस सरकार ने बाबुओं द्वारा खर्च की गई धनराशि पर जांच का आदेश नहीं दिया है, जो स्पष्ट रूप से करदाताओं के पैसे की बर्बादी है. दावोस हमेशा से वैश्विक अभिजात्य वर्ग के खेल का मैदान रहा है. आम तौर पर स्विट्जरलैंड का लोकी स्कीइंग गांव हर साल जनवरी में लगभग दो सप्ताह तक अमीर, प्रसिद्ध एवं शक्तिशाली लोगों के लिए खेल का मैदान बन जाता है. वल्र्ड इकोनॉमिक फोरम पूरे विश्व के व्यापारिक एवं राजनीतिक अभिजात्य वर्ग को मुक्त व्यापार और जलवायु परिवर्तन जैसे वजनदार वैश्विक मुद्दों के लिए इस शहर में लाता है. इस वार्षिक सम्मेलन में भारत भी शिरकत करता है.

नाराज नेट्टो

naraj-nattoकेरल में मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है. मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के निजी सचिव के इस्तीफे के बाद अब सीएम के प्रमुख प्रधान सचिव की बारी है. सूत्रों का कहना है कि 1981 बैच के आईएएस अधिकारी नलिनी नेट्टो ने सीएमओ से इस्तीफा दे दिया है. नेट्टो के इस्तीफे ने सीएम कार्यालय में कुछ राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर गंभीर मतभेदों के बारे में अफवाहें शुरू कर दी हैं. सूत्रों का कहना है कि सीएम ने उन्हें आम चुनाव के अंत तक काम करते रहने के लिए कहा है, लेकिन नेट्टो ने कथित तौर पर असमर्थता जताई है. ऐसी खबरें हैं कि सीएम के राजनीतिक सचिव के साथ उनके संबंधों में खटास आ गई है और महत्वपूर्ण फाइलें उन्हें नहीं दिखाई गईं. नेट्टो ने पिनाराई विजयन सरकार के मुख्य सचिव के रूप में भी कार्य किया था. उनकी सेवानिवृत्ति के तुरंत बाद विजयन ने 2016 में उन्हें अपना प्रधान सचिव नियुक्त किया था.

सेवानिवृत्त बाबुओं का समायोजन

sewanivirit-babuyo-ka-samayojanचीजें जितनी बदलती हैं, उतनी ही वे समान रहती हैं. मोदी सरकार में बना नीति आयोग सेवानिवृत्त बाबुओं के लिए पूर्ववर्ती योजना आयोग का नया अवतार बनता जा रहा है. सूत्रों के अनुसार, चर्चा यह है कि उपाध्यक्ष राजीव कुमार एवं कई सदस्य सेवानिवृत्त अधिकारियों की नियुक्ति के पक्ष में हैं, भले ही नीति आयोग में पहले से पूर्णकालिक अधिकारियों का एक समूह है, जो सलाहकारों एवं प्रमुख सलाहकारों के रूप में सेवारत है. पहले से ही विशेष सचिव, प्रधान सलाहकार, अतिरिक्त सचिव, दो वरिष्ठ सलाहकार एवं नौ सलाहकार आयोग के पूर्णकालिक सदस्य हैं. फिर भी अनुभव और योगदान के आधार पर सेवानिवृत्त बाबुओं को शामिल किया जा रहा है. हालिया नियुक्ति डॉ. अशोक कुमार जैन की है, जो पिछले महीने तेलंगाना वन विकास निगम के उपाध्यक्ष एवं एमडी के पद से सेवानिवृत्त हुए थे. अब वह तीन साल के लिए आयोग के प्रधान सलाहकार हैं. जाहिर है, उनकी नियुक्ति उनके पूर्व अनुभव और आयोग में पर्याप्त योगदान द्वारा समर्थित थी. उन्हें भारतीय हिमालयी क्षेत्र में सतत विकास का विशेषज्ञ माना जाता है. इससे पहले सीके मुरली एवं यूके शर्मा को सदस्य के रूप में नीति आयोग के बोर्ड में लिया गया था. लेकिन, ऐसी कई नियुक्तियों को सेवानिवृत्त या सेवारत अधिकारियों के करियर विस्तार के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है.

 

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