विचार

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सम्मत- तुम्हारे पांव के नीचे जमीन नहीं…

प्रदीप सिंह/ओपिनियन पोस्ट कहते हैं कि राजनीति में कभी कोई वैक्यूम (खालीपन या शून्य) नहीं रहता। इसलिए राजनीतिक दलों को हमेशा सन्नद्ध रहना चाहिए कि जहां भी कोई जगह खाली हो या खाली होने की संभावना हो उसे...

आम की नजरों से गिरती आम आदमी पार्टी

प्रदीप सिंह/संपादक/ओपिनियन पोस्ट जीवन में निराशा का सबसे बड़ा कारण होता है किसी से उम्मीद करना। एक बार जब हम किसी से उम्मीद करते हैं तो अपेक्षा होती है कि वह उम्मीद पर खरा उतरे। वह खरा नहीं उतरता क्यों...

गांव-गरीब की सुध लेने वाला बजट

प्रदीप सिंह/संपादक/ओपिनियन पोस्ट आम बजट वैसे तो केंद्र सरकार की आमदनी और खर्च का सालाना लेखा जोखा होता है। इसके बावजूद हर साल लोगों को बजट का इंतजार और उम्मीद रहती है। बड़ी उत्सुकता रहती है कि किसे क्य...

संपादकीय- केजरीवाल एक नाकाम नेता

प्रदीप सिंह/संपादक/ओपिनियन पोस्ट अहंकार तो रावण का भी नहीं रहा। सार्वजनिक जीवन में अहंकार ही अंतत: व्यक्ति, संस्था या संगठन के पतन का कारण बनता है। आम आदमी पार्टी के मुखिया और दिल्ली के मुख्यमंत्री अर...

संपादकीय- देर से ही पर न्याय मिले

प्रदीप सिंह/संपादक/ ओपिनियन पोस्ट चौरासी के सिख विरोधी दंगों का जिन्न एक बार फिर बोतल से बाहर आ गया है। सुप्रीम कोर्ट ने दस जनवरी को एक आदेश में कहा कि सिख विरोधी दंगों की जांच नये सिरे से हो। जांच के...

वंश और पार्टी बचाने की जद्दोजहद

प्रदीप सिंह चार साल से कांग्रेसियों और मीडिया की जबान पर एक ही सवाल कि आखिर राहुल गांधी पार्टी अध्यक्ष कब बनेंगे। कांग्रेस के किसी बड़े नेता के पास इस सवाल का जवाब नहीं था। उसका कारण एक ही था कि नेहरू-...

सम्मत- देश की कीमत पर राजनीति

प्रदीप सिंह/प्रधान संपादक/ओपिनियन पोस्ट वस्तु एवं सेवाकर यानी एक देश एक कर। इसे वास्तविकता बनाने में देश को एक दशक से ज्यादा समय लगा। तमाम बाधाओं-व्यवधानों को पार करके यह अप्रत्यक्ष कर कानून एक जुलाई...

गुजरात में राहुल का लगेगा दांव !

प्रदीप सिंह/ प्रधान संपादक/ ओपिनियन पोस्ट । गुजरात एक बार फिर राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में है। पर इस बार गुजरात दंगों की बात विमर्श से बाहर है। पंद्रह साल बाद दंगों का बेताल विक्रम (गुजरात कहें या न...

यह कैसा समाज है !

प्रदीप सिंह/प्रधान संपादक/ओपिनियन पोस्ट डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को बलात्कार के आरोप में सजा हो गई। पैसा, सत्ता, लाखों अनुयायियों की फौज और राजनीतिक रसूखवालों से करीबी भी उन्हें कानून...

जिरह- कांग्रेस को डुबोने के लिए किसी बाहरी की जरूरत नहीं है, कांग्रेसी ही काफी हैं

प्रदीप सिंह/प्रधान संपादक/ओपिनियन पोस्ट कभी देश के सबसे बड़े राजनीतिक दल के रुतबे वाली कांग्रेस पार्टी को आगे की राह सूझ नहीं रही। सत्ता उसका साथ छोड़ चुकी है और विपक्ष की भूमिका निभाना उसने सीखा नहीं।...

ओपिनियन पोस्ट के प्रधान संपादक प्रदीप सिंह की कलम से चीन की बौखलाहट पर जिरह

जिरह- प्रदीप सिंह/प्रधान संपादक/ओपिनियन पोस्ट चीन से 1962 के बाद भले ही भारत का कोई युद्ध न हुआ हो पर दोनों देशों की सीमा पर निरन्तर तनाव की स्थिति रहती है। उसका एक बड़ा कारण है कि इतने दशकों बाद भीदोन...

जिरह- दिल से उतर गए केजरीवाल

प्रदीप सिंह। दिल्ली नगर निगम के चुनाव नतीजे में भाजपा की जीत बड़ी है या आम आदमी पार्टी की हार। भाजपा के पक्ष में इस समय पूरे देश में हवा चल रही है। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकवादी प्रशिक्षण शिविरो...

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