विचार

संपादकीय- संघर्ष और विराम की दुविधा

प्रदीप सिंह/संपादक/ ओपिनियन पोस्ट जम्मू-कश्मीर में एक बार फिर अटल बिहारी वाजपेयी की चर्चा हो रही है। सूबे की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने केंद्र सरकार से अपील की है कि रमजान के महीने के मद्देनजर आतंकव...

संपादकीय- कानून तोड़ने वाले से सहानुभूति क्यों

सलमान खान। हिंदी सिनेमा के बेताज बादशाह। कुछ लोग टाइगर भी कहते हैं। फिल्म में उनकी मौजूदगी बॉक्स आॅफिस पर कामयाबी की गारंटी है। बहुत से लोगों के लिए भाई हैं। प्रशंसकों की संख्या इतनी कि गिनना मुश्किल।...

सम्मत- तुम्हारे पांव के नीचे जमीन नहीं…

प्रदीप सिंह/ओपिनियन पोस्ट कहते हैं कि राजनीति में कभी कोई वैक्यूम (खालीपन या शून्य) नहीं रहता। इसलिए राजनीतिक दलों को हमेशा सन्नद्ध रहना चाहिए कि जहां भी कोई जगह खाली हो या खाली होने की संभावना हो उसे...

आम की नजरों से गिरती आम आदमी पार्टी

प्रदीप सिंह/संपादक/ओपिनियन पोस्ट जीवन में निराशा का सबसे बड़ा कारण होता है किसी से उम्मीद करना। एक बार जब हम किसी से उम्मीद करते हैं तो अपेक्षा होती है कि वह उम्मीद पर खरा उतरे। वह खरा नहीं उतरता क्यों...

गांव-गरीब की सुध लेने वाला बजट

प्रदीप सिंह/संपादक/ओपिनियन पोस्ट आम बजट वैसे तो केंद्र सरकार की आमदनी और खर्च का सालाना लेखा जोखा होता है। इसके बावजूद हर साल लोगों को बजट का इंतजार और उम्मीद रहती है। बड़ी उत्सुकता रहती है कि किसे क्य...

संपादकीय- केजरीवाल एक नाकाम नेता

प्रदीप सिंह/संपादक/ओपिनियन पोस्ट अहंकार तो रावण का भी नहीं रहा। सार्वजनिक जीवन में अहंकार ही अंतत: व्यक्ति, संस्था या संगठन के पतन का कारण बनता है। आम आदमी पार्टी के मुखिया और दिल्ली के मुख्यमंत्री अर...

संपादकीय- देर से ही पर न्याय मिले

प्रदीप सिंह/संपादक/ ओपिनियन पोस्ट चौरासी के सिख विरोधी दंगों का जिन्न एक बार फिर बोतल से बाहर आ गया है। सुप्रीम कोर्ट ने दस जनवरी को एक आदेश में कहा कि सिख विरोधी दंगों की जांच नये सिरे से हो। जांच के...

वंश और पार्टी बचाने की जद्दोजहद

प्रदीप सिंह चार साल से कांग्रेसियों और मीडिया की जबान पर एक ही सवाल कि आखिर राहुल गांधी पार्टी अध्यक्ष कब बनेंगे। कांग्रेस के किसी बड़े नेता के पास इस सवाल का जवाब नहीं था। उसका कारण एक ही था कि नेहरू-...

सम्मत- देश की कीमत पर राजनीति

प्रदीप सिंह/प्रधान संपादक/ओपिनियन पोस्ट वस्तु एवं सेवाकर यानी एक देश एक कर। इसे वास्तविकता बनाने में देश को एक दशक से ज्यादा समय लगा। तमाम बाधाओं-व्यवधानों को पार करके यह अप्रत्यक्ष कर कानून एक जुलाई...

गुजरात में राहुल का लगेगा दांव !

प्रदीप सिंह/ प्रधान संपादक/ ओपिनियन पोस्ट । गुजरात एक बार फिर राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में है। पर इस बार गुजरात दंगों की बात विमर्श से बाहर है। पंद्रह साल बाद दंगों का बेताल विक्रम (गुजरात कहें या न...

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