राजनीति

भाजपा के सामने थी गंभीर चुनौतियां

महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना के लिए अपना पिछला प्रदर्शन दोहरा पाना एक बड़ी चुनौती थी. साल 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा-शिवसेना गठबंधन को 41 सीटें मिली थीं, जिन्हें बरकरार रखना बहुत मुश्किल था. मराठा...

सड़क से संसद तक सिर्फ़ मोदी

यह चुनाव ऐतिहासिक है. इसलिए नहीं कि जीत ऐतिहासिक है. इसलिए कि इस चुनाव ने कई राजनीतिक मिथक तोड़ दिए हैं. इस चुनाव ने मुद्दों को पुनर्परिभाषित कर दिया है. इस चुनाव ने जाति-धर्म के नाम पर बनने वाले गठबं...

भारी-भरकम जीत के अपने-अपने दावे

चुनावी कारवां गुजर चुका है, अब फिजां में सिर्फ गुबार ही गुबार है. आम जन को २३ मई का इंतजार है, जब ईवीएम नतीजे देना शुरू करेगी. हालांकि, मैदान में निकटतम प्रतिद्वंद्वी रहे बीजद और भाजपा ने अभी से एक-दू...

एक दुकान, हर समाधान

अफागर वे मुकदमे जिता सकते हैं, तो देश में व्याप्त बेरोजगारी क्यों नहीं दूर कर देते? अपराधियों का सया क्यों नहीं कर देते? नक्सलियों पर अपना जादू क्यों नहीं चलाते कि वे असलहे छोडक़र तेंदू पत्ते से बीड़ी...

विकास की आड़ में पहाड़ों की लूट

नेतरहाट की पहाडिय़ां अपने सौंदर्य के लिए देश भर में विख्यात हैं, लेकिन खनन कंपनियां उनकी सुंदरता पर ग्रहण लगा रही हैं. वे यहां की अपार खनिज संपदा लूटने पर आमादा हैं, जिससे आदिवासियों का जीवन दूभर हो गय...

निशिकांत और प्रदीप में कांटे की टक्कर

जातीय आंकड़ों पर गौर करें, तो गोड्डा लोकसभा क्षेत्र में मुस्लिम, यादव एवं आदिवासी मतदाता पूरी तरह महागठबंधन के पक्ष में एकजुट हैं, जिसमें टूट की कोई गुंजाइश नहीं दिख रही है. वहीं निशिकांत दूबे के पक्ष...

किसी की राह आसान नहीं

वामपंथ को उखाड़ कर समाजवाद स्थापित करने वाले मगध की जहानाबाद संसदीय सीट काफी ‘हॉट’ मानी जाती है. यूं तो राज्य में कई लोकसभा क्षेत्र भूमिहार बहुल हैं, लेकिन भूमिहार राजनीति का पैमाना नापने का थर्मामीटर...

एमवाई समीकरण की परीक्षा

मुंबई एवं दिल्ली में भवन निर्माण कार्य से संबद्ध मजदूर घर नहीं लौटे हैं. अधिकांश घरों में केवल महिलाएं एवं बुजुर्ग नजर आते हैं. 17वीं लोकसभा के लिए अपना प्रतिनिधि चुनने की जिम्मेदारी इन्हीं महिलाओं एव...

23 के बाद आएगी सियासी सुनामी

गिरेगी नीतीश सरकार या फिर नरेंद्र मोदी सरकार में शामिल होंगे उपेंद्र कुशवाहा एवं मुकेश सहनी. टूटेगा राजद या फिर जदयू में मचेगी भगदड़. लोजपा का बचेगा कुनबा या फिर हाशिये पर जाएंगे जीतन राम मांझी. बस, द...

वामपंथ की दरकती दीवार और कन्हैया

वामपंथ के किले में सुराख बहुत पहले हो गया था, जिसने धीरे-धीरे उसकी नींव ही खोखली कर दी. कमजोर नींव पर फिर से इमारत खड़ी करना एक दुरुह कार्य है. ऐसे में, कई बड़े वामपंथी नेताओं को दरकिनार करके कन्हैया...

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