क्या प्रियंका गाँधी को राजनीतिक साजिश के तहत फंसाने की कोशिश की जा रही है?

ओपिनियन पोस्ट
नई दिल्ली । क्या प्रियंका गांधी को फरीदाबाद में हुए जमीन खरीदने में राजनीतिक साजिश के तहत फंसाने की कोशिश की जा रही है । ये सवाल इसलिए उठा है क्योंकि प्रियंका ने एक संदिग्ध दस्तावेज के आधार इस मामले में अपना नाम घसीटे जाने के बाद ऐसा कहा है ।
प्रियंका की ओर से कहा गया है कि हरियाणा में जमीन खरीदने के लिए सारा पैसा प्रियंका ने खुद भरा। इस पैसे का उनके पति रॉबर्ट वाड्रा या उनकी किसी भी कंपनी से कोई संबंध नहीं है। आरोप लगाया गया था कि रॉबर्ट वाड्रा को डीएलएफ से जो पैसा मिला, उसके एक हिस्से का इस्तेमाल उनकी पत्नी ने हरियाणा के फरीदाबाद में प्रॉपर्टी खरीदने के लिए किया।
प्रियंका ने खुद किया था भुगतान प्रियंका की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि जमीन खरीदने के लिए प्रियंका ने अपनी दादी इंदिरा गांधी सेमिली पुश्तैनी प्रॉपर्टी का इस्तेमाल किया था। खरीदी गई इस जमीन के लिए प्रियंका गांधी ने खुद पैसा खुद भरा है और इस पैसे का उनके पति रॉबर्ट वाड्रा या स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी और डीएलएफ कंपनी से कोई संबंध नहीं है।
टैक्स भी चुकाया बयान में आगे कहा गया है कि प्रियंका गांधी ने खरीद पर 4 फीसदी का स्टैम्प ड्यूटी भी चुकाया। 17 फरवरी, 2010 को प्रियंका गांधी ने इस जमीन को इसके मूल मालिक को 80 लाख रुपये में बेच दिया और इसके लिए भुगतान भी चेक से लिया गया।
क्या है आरोप
robert-vadra-650x488_650x488_41437470425प्रियंका पर आरोप है कि 28 अप्रैल, 2006 को प्रियंका गांधी ने 5 एकड़ जमीन हरियाणा के फरीदाबाद जिले के अमिपुर गांव में खरीदी थी। इसके लिए 3 लाख रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से 15 लाख रुपये का समग्र भुगतान चेक से किया गया था। इस जमीन में उनके पति का पैसा लगा होने के आरोप हैं।
बता दें कि कांग्रेस अध्‍यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा पर साल 2008 में हरियाणा में एक जमीन सौदे से 50.5 करोड़ रुपये का अवैध मुनाफा कमाने का आरोप है। एक अंग्रेजी अखबार ने दावा किया है कि वाड्रा के जमीन सौदों की जांच कर रहे जस्टिस एसएन ढींगरा आयोग ने माना है कि वाड्रा ने इस सौदे में एक भी पैसा नहीं लगाया और बावजूद इसके मुनाफा कमाया। अखबार ने आयोग की रिपोर्ट से जुड़े लोगों के हवाले से लिखा है कि वाड्रा की कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए सांठगांठ की गई थी। आयोग ने वाड्रा और उनकी कंपनियों की ओर से खरीदी गई जमीनों की जांच की मांग की है।
हालाँकि वाड्रा के वकील सुमन खेतान के मुताबिक उनके क्‍लाइंट और उनकी कंपनियों ने कुछ गलत नहीं किया है और किसी कानून का उल्‍लंघन नहीं हुआ है। बाजार कीमत चुकाए जाने के बाद जमीन खरीदी गई। साथ ही आयकर भी चुकाया गया। बता दें कि हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर के नेतृत्‍व वाली भाजपा सरकार ने साल 2015 में वाड्रा के जमीन सौदों की जांच के लिए ढींगरा आयोग का गठन किया था। वाड्रा और उनकी कंपनी स्‍कार्इलाइट हॉस्पिटेलिटी पर आरोप है कि उसने गुड़गांव में अवैध तरीके से जमीन सौदे किए। वाड्रा ने भी इन आरोपों से इनकार किया है। उनकी ओर से कहा गया कि राजनीतिक बदले की कार्रवाई के तहत उनका नाम घसीटा जा रहा है।
ढींगरा आयोग ने पिछले साल 21 अगस्‍त को अपनी रिपोर्ट हरियाणा सरकार को दी थी। राज्‍य सरकार ने सीलबंद लिफाफे में इसे इसी महीने सुप्रीम कोर्ट को भेजा है। वहीं हरियाणा के पूर्व मुख्‍यमंत्री और कांग्रेस नेता भूपिंदर सिंह हुड्डा ने ढींगरा आयोग की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी है। यह याचिका अभी फैसले का इंतजार कर रही है। अख़बार की रिपोर्ट में कहा गया है कि जांच आयोग ने अमीपुर गांव में वाड्रा की पत्‍नी प्रियंका गांधी वाड्रा की ओर से फरवरी 2010 में खरीदी गई जमीन की भी जांच की है। प्रियंका गांधी ने ईटी को इस बारे में बताया कि इस जमीन सौदे का स्‍काईलाइट से कोई लेना-देना नहीं है। यह सौदा स्‍काईलाइट जमीन सौदे से छह साल पहले हुआ था।

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