जन के लिए जन द्वारा धरम का काज

संध्या द्विवेदी।

पन्ना के धरम सागर में गहरीकरण का काम चल रहा है। यूं तो बुंदेलखंड के हर तालाब में बरसात के इंतजार में गहरीकरण किया जा रहा है। लेकिन पन्ना के धरम सागर में चल रहा गहरीकरण जनभागीदारी की मिसाल है। लोग न केवल श्रमदान कर रहे हैं बल्कि गहरीकरण में आने वाले खर्चे में भी अपना अपना हिस्सा दे रहे हैं। बच्चों ने गुल्लक तोड़कर सिक्के दिए तो सरकारी कर्मचारियों ने एक दिन की कमाई। किन्नर हामिदा मौसी ने दस हजार रुपये एकमुश्त देते हुए कहा, कैसे भी हो इस सागर को फिर भरना है। दरअसल यह तालाब पन्ना की करीब तीस प्रतिशत आबादी को पानी पिलाने की क्षमता रखता है। इससे केवल जन सरोकार ही नहीं जुड़े हैं बल्कि धार्मिक आस्था का भी प्रतीक है यह तालाब।
तालाब के पास खड़े पंडित जी ने बताया-मेरा बचपन यहां बीता। चालीस से ऊपर का हो रहा हूं। पहली बार यह तालाब सूखते देख रहा हूं। यह केवल पानी की नहीं बल्कि धर्म की हानि भी है। वह इसके पीछे की कहानी बड़ी आस्था से बताते हैं। एक समय की बात है। एक बेहद धार्मिक राजा था। उसके शासनकाल में सूखा पड़ा। उसके पुरोहित ने कहा कि सभी तीर्थों का जल लाकर अगर एक तालाब खुदवाया जाए तो वह इस सूखे को खत्म कर देगा। राजा ने ऐसा ही किया। तालाब बना। सभी तीर्थों का जल पड़ा। झमाझम बारिश हुई। तालाब लबालब भर गया। कई सूखे पड़े। हर तालाब सूख गया। लेकिन यह तालाब कभी नहीं सूखा। बनने के बाद पहली बार यह तालाब सूखा है। पंडित जी भी उदास हो जाते हैं। उन्होंने कहा— जो मुझसे बन पड़ा मैंने गहरीकरण के लिए दिया। अपने जजमानों को भी इसके लिए प्रोत्साहित किया। मैं तो कहता हूं कि पहली बार जनता के लिए जनता द्वारा हो रहा है धरम का काज।
सरकारी नौकरी करने वाले पैंतीस साल के सुनील भी बेहद आहत हैं तालाब सूखने से। उन्होंने बताया कि उनके सात साल के बेटे ने अपनी गुल्लक तोड़कर इसमें मदद की। उन्होंने अपनी एक दिन की तनख्वाह दी। सुनील ने बताया कि स्कूलों में बच्चों को तालाब गहरीकरण में मदद करने के लिए कहा गया। एक-एक स्कूल से हजारों रुपये तालाब के लिए आए। रविवार मार्केट में सब्जी लगाने वाली शकुंतला ने बताया कि करीब ही बाजार है। पूरे दिन बाजार लगाए लगाए थक जाती हूं तो खाना खाने यहीं आती हूं। पानी से भरा तालाब और पेड़ की छांव। सालों से हर रविवार एक घंटा यहीं बीतता है। लेकिन जब यह तालाब सूखा तो लगा सालों के किसी साथी ने साथ छोड़ दिया। मन बनाया कि एक दिन की कमाई मैं भी धरम के नाम पर दूंगी। मेरे जैसी कई औरतों ने एक दिन की कमाई इसमें लगा दी।
सामाजिक कार्यकर्ता युसूफ बेग की उम्र भी चालीस के करीब है। वह कहते हैं कि इस तालाब से करीब 50 कुएं जुड़े हैं। इस तालाब का सूखना पचास कुओं का सूखना है। लोगों ने खुद आगे बढ़कर जनभागीदारी करने का मन बनाया। डीएम ने लोगों से अपील की थी कि यह तालाब लोगों का है तो क्यों न लोग भी इसके पुनरुद्धार के लिए आगे आएं। पन्ना में वैसे भी पानी की इतनी किल्लत है कि शहर से डेढ़-दो किलोमीटर में भी पानी के लिए त्राहि-त्राहि मची है। ऐसे में धरम सागर का सूखना बहुत बड़ी हानि है। डीएम शिवनारायण चौहान ने बताया कि इस तालाब के पुनरुद्धार के साथ-साथ हम जनभागीदारी का एक मॉडल बनाने का प्रयास भी कर रहे हैं। सरकारी योजनाओं के लिए आया पैसा रिस-रिसकर ही जनता तक पहुंचता है। जनता भी उस पैसे का हिसाब पूछने मे रुचि नहीं दिखाती। लेकिन जब जनता का पैसा, मेहनत लगेगी तो लोग इसमें रुचि दिखाएंगे। अभी तक तैंतीस लाख रुपये लोगों की तरफ से आए हैं। जनता के पैसे के बाद जो भी कम पड़ेगा वह सरकार देगी। अभी छह जेसीबी मशीनें लगी हैं। साठ डम्फर लगे हैं। बस झमाझम बारिश हो जाए ताकि यह कभी न सूखने वाला तालाब एक बार फिर पानी से लबालब हो जाए।

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