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सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बावजूद बाज नहीं आए बड़बोले आजम

फिर कहा, एक के बाद एक लगातार एक जैसी रेप की घटनाएं हो तो राज्य सरकार का यह दायित्व है कि इसके पीछे की सच्चाई का पता लगाए, सुप्रीम कोर्ट ने इसी तरह के आजम के पहले के बयान पर जारी किया नोटिस, तीन हफ्ते के भीतर मांगा जवाब, सीबीआई जांच पर फिलहाल रोक

बुलंदशहर गैंगरेप मामले पर दिए बयान पर सुप्रीम कोर्ट की फटकार और नोटिस के बावजूद सपा नेता और यूपी के मंत्री आजम खान बाज नहीं आए। बड़बोले आजम ने लगभग अपनी बात दोहराते हुए कहा कि अगर एक के बाद एक लगातार एक जैसी रेप की घटनाएं हो तो राज्य सरकार का यह दायित्व बनता है कि इसके पीछे की सच्चाई का पता लगाए। इससे पहले आजम ने इस घटना को राजनीतिक साजिश करार दिया था जिस पर स्वतः संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आजम खान और यूपी सरकार को सोमवार को ही नोटिस जारी कर तीन हफ्ते के अंदर जवाब मांगा है।

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बारे में पूछे जाने पर आजम खान ने पहले तो इसे कोर्ट का मामला कहकर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। लेकिन जब उनसे दोबारा पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार का एक जिम्मेदार मंत्री होने के नाते उनका भी यह दायित्व बनता है की सच्चाई की तह तक जाने की कोशिश करें कि आखिर एक के बाद एक लगातार एक जैसे अपराध क्यों हो रहे हैं। आजम ने यह भी कहा कि वह चाहते हैं कि रेप के मामले में इस्लामिक कानून के हिसाब से सख्त सजा हो और फैसला एक हफ्ते के भीतर हो। इस्लामिक कानून के हिसाब से बलात्कार की सजा के तौर पर पत्थरों से मारकर अपराधी की जान ली जाती है।

आजम ने यह सफाई भी दी कि उन्होंने ऐसा कुछ भी नहीं कहा जिससे पीड़ित परिवार को ठेस लगे। न ही उन्होंने ऐसा कुछ कहा है जिससे मुकदमा कमजोर हो और ना ही उन्होंने अफसरों पर इस मामले को कमजोर करने के लिए कोई दबाव डाला।

सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले सोमवार को आजम खान के खिलाफ नोटिस जारी करते हुए कहा कि सरकार में बैठे किसी व्यक्ति द्वारा इस प्रकार का बयान जांच में अविश्‍वास पैदा करता है और पूरे सिस्टम से लोगों का विश्वास उठता है। कोर्ट ने कहा, क्या प्रशासनिक स्तर पर बैठा या सरकार के अहम ओहदे पर बैठा व्यक्ति ये कह सकता है कि इस तरह की घटनाएं राजनीतिक साजिश के तहत होती हैं? जबकि घटना से व्यक्ति का कोई लेना-देना ना हो। क्या राज्य सरकार और कानून व्यवस्था को बरकरार रखने की जिम्मेदारी वाला शख्स ऐसे बयानों की अनुमति दे सकता है जिसका असर पीड़िता पर पड़ेगा और वो निष्पक्ष जांच में अपना विश्वास खो देगी। क्या ये संविधान द्वारा दिए गए बोलने के अधिकार की सीमा को पार करना नहीं है।

कोर्ट ने मामले की सुनवाई राज्य से बाहर स्थानांतरित करने की पीड़ित के पिता की याचिका पर उत्तर प्रदेश सरकार को भी नोटिस जारी किया और मामले की सीबीआई जांच पर फिलहाल रोक लगा दी। सुप्रीम कोर्ट ने आजम खान के मुद्दे पर वरिष्ठ वकील फली एस नरीमन को एमिकस क्यूरी बनाया है। पीड़ित मां-बेटी ने सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई है कि मुकदमे को दिल्ली ट्रांसफर करने के साथ ही अपनी निगरानी में सीबीआई जांच कराए। साथ ही परिवार की सुरक्षा और नाबालिग पीड़िता की शिक्षा आदि का इंतजाम करने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि लापरवाह पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाए। इसके अलावा परिवार का पुनर्वास कराए जाने की भी बात पीड़ितों की ओर से कोर्ट के सामने रखी गई है।

क्या कहा था आजम ने 

आजम खान ने कहा था कि बुलंदशहर हाईवे पर मां-बेटी के साथ हुई गैंगरेप की वारदात के पीछे राजनीतिक साजिश हो सकती है। हमें इस बात की जरूर जांच करनी चाहिए कि कहीं यह मामला किसी राजनीतिक साजिश से प्रेरित होकर सरकार को बदनाम करने के लिए तो नहीं है। सत्ता की लोभी कई पार्टियां किसी भी हद तक गिर सकती हैं। नगर विकास मंत्री आजम खान ने यह भी कहा था कि बुलंदशहर की घटना के लिए पुलिस अफसरों के खिलाफ की गई कार्रवाई सही है, लेकिन सरकार को विरोधियों पर भी नजर रखनी होगी। विरोधी सपा सरकार को बदनाम करने के लिए कुछ भी कर सकते हैं।

30 जुलाई को हुई थी वारदात

बुलंदशहर में 30 जुलाई को कोतवाली देहात क्षेत्र के पास हाइवे संख्या 91 पर अपराधियों ने नोएडा से शाहजहांपुर जा रहे एक परिवार की कार को रूकवाया और पुरुष सदस्यों के सामने महिला और उनकी नाबालिग बेटी के साथ गैंगरेप किया। इस मामले में शामिल 7 आरोपियों में से 6 को पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है। पीड़ित परिवार ने गिरफ्तार आरोपियों की पहचान भी कर ली है।

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