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नकल पर नकेल से लाखों फेल

बिहार बोर्ड की 12वीं की परीक्षा में सिर्फ 38 फीसदी विद्यार्थी हुए पास, करीब साढ़े सात लाख परीक्षार्थी हुए फेल, जुलाई में कंपार्टमेंट का दिया जाएगा एक और मौका

पिछले साल टॉपर्स घोटाले की वजह से हुई किरकिरी से बचने के लिए बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड (बीएसईबी) ने इस साल इंटरमीडिएट की परीक्षा में नकल रोकने के लिए सख्ती क्या की, करीब साढ़े सात लाख छात्र फेल हो गए। इसे लेकर अब राजनीति शुरू हो गई है। विपक्षी भाजपा ने प्रदेश के शिक्षा मंत्री से इस्तीफे की मांग कर दी है। वहीं बीएसईबी ने घोषणा की है कि फेल हुए छात्रों को जुलाई में दोबारा मौका दिया जाएगा।

साइंस टॉपर खुशबू कुमारी को मिठाई खिलाते माता-पिता

साइंस टॉपर खुशबू कुमारी को मिठाई खिलाते माता-पिता

बीएसईबी ने मंगलवार को 12वीं के नतीजे घोषित कर दिए। इसके मुताबिक साइंस में 30.76 फीसदी, कॉमर्स में 73.76 फीसदी और आर्ट्स में 37.13 फीसदी विद्यार्थी पास हुए हैं। आर्ट्स में समस्तीपुर के रमेश कुमार ने टॉप किया है जबकि पटना स्थित कॉमर्स कॉलेज के प्रियांशु जायसवाल ने कॉमर्स में टॉप किया है। जमुई सिमुलतला की खुशबू कुमारी ने साइंस में टॉप किया है। खुशबू ने 86.2 फीसदी अंक हासिल किए हैं। वहीं प्रियांशु ने 81.6 फीसदी अंक और रमेश ने 82.6 फीसदी अंक हासिल किया है। वैसे तीनों विषयों को यदि मिलाकर देखें तो सबसे ज्यादा अंक खुशबू कुमारी के ही हैं। उन्हें 500 में 431 अंक मिले हैं। रमेश ने 500 में 413 अंक हासिल कर दूसरा स्थान और प्रियांशु ने 500 में 405 अंक लाकर तीसरा प्राप्त किया है।

पास होने की खुशी मनाती छात्राएं

पास होने की खुशी मनाती छात्राएं

देश में सबसे खराब रिजल्ट

परीक्षा में नकल रोकने के लिए इस बार की गई सख्ती को देखते हुए पहले से ही इस बात की आशंका जताई जा रही थी कि नतीजे खराब होंगे। मगर इतने खराब होंगे इसकी उम्मीद शायद ही किसी को होगी। देश में इस साल अब तक जिन राज्यों के रिजल्ट की घोषणा की गई है, उसमें बिहार बोर्ड का प्रदर्शन सबसे खराब है। परीक्षा परिणामों में बिहार बोर्ड के खराब प्रदर्शन को देखते हुए शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव आरके महाजन ने कहा कि कड़ाई से कॉपी जांच होने के कारण पास पर्सेंटेज घट गए हैं। पिछले साल की तुलना में बीएसईबी 12वीं का परिणाम इस साल लगभग 15 दिन लेट आया है। मीडिया रिपोर्ट्स में इसका कारण शिक्षकों की हड़ताल बताया गया है।

कसी थी नकलचियों पर लगाम

इस बार बिहार बोर्ड की परीक्षाएं फरवरी में शुरू हुई थीं। इस वर्ष सरकार ने परीक्षा में नकल रोकने के लिए कई उपाय किए थे जिनमें वीडियोग्राफी भी शामिल है। इसके अलावा पहली बार बिहार बोर्ड की इन परीक्षाओं में बार कोडिंग सिस्टम भी शुरू किया गया था। कॉपियों की बार कोडिंग की वजह से पैरवीकारों की पैरवी पहले की तरह नहीं हो सकी। किस छात्र की कॉपी कौन चेक कर रहा है, यह पता ही नहीं चल सका। चर्चा ये भी थी कि इस बार बिहार विद्यालय परीक्षा समिति पहली बार कॉपियों का डिजिटल मूल्यांकन कराएगी। कंपार्टमेंट के छात्रों के लिए यह लागू भी किया गया लेकिन शिक्षको के कंप्यूटर में दक्ष न होने और उनकी कमी के कारण भी मूल्यांकन में परेशानियों का सामना करना पड़ा।

परीक्षा में नकल कराने वालों की 2015 की इस तस्वीर ने किया था बिहार को शर्मसाल

परीक्षा में नकल कराने वालों की 2015 की इस तस्वीर ने किया था बिहार को शर्मसाल

इस साल इंटरमीडिएट की परीक्षा में कुल 12 लाख 56 हजार 507 परीक्षार्थियों ने हिस्सा लिया। इनमें पिछले वर्ष के 2 लाख 33 हजार असफल परीक्षार्थी भी शामिल थे। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार एक लाख पांच हजार अधिक छात्र-छात्राएं परीक्षा में शामिल हुए। साइंस की परीक्षा में 5 लाख 60 हजार से ज्यादा परीक्षार्थी शामिल हुए। 

टॉपर को मिलेगा एक लाख इनाम व लैपटॉप

बिहार बोर्ड के चेयरमैन आनंद कुमार ने बताया कि मैट्रिक और इंटरमीडिएट परीक्षा में टॉपर को एक लाख की इनामी राशि और लैपटॉप मिलेगा। दूसरा स्थान पाने वाले को 75,000 और तीसरे स्थान प्राप्त करने वाले परीक्षार्थी को 50,000 नकद के साथ लैपटाॅप और ई बुक रीडर भी मिलेगा। इंटर में चौथा और पांचवां स्थान प्राप्त करने वालों को 15 हजार रुपये और लैपटॉप दिए जाएंगे। वहीं मैट्रिक में चौथे से 10वें स्थान तक के छात्रों को 10 हजार रुपये व लैपटॉप दिए जाएंगे। मैट्रिक के टॉपर छात्रों को भी किंडल ई-बुक रीडर दिया जाएगा। इसी साल 3 दिसंबर को इंटर और मैट्रिक के टॉपरों को राजेंद्र स्मृति व्याख्यान पर सम्मानित किया जाएगा। पिछली बार कुछ गड़बड़ियों की वजह से छात्रों को सम्मानित नहीं किया जा सका था।

 

राजनीति शुरू

रिजल्ट आने के बाद काफी संख्या में परीक्षार्थियों के फेल हो जाने से राजनीति भी शुरू हो गई है। बिहार बीजेपी के नेता और विधान पार्षद विनोद नारायण झा ने शिक्षा मंत्री से इस्तीफे की मांग करते हुए कहा है कि इस सरकार ने बच्चों का भविष्य चौपट कर दिया। वहीं शिक्षा मंत्री ने रिजल्ट को बेहतर बताया है। शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव आरके महाजन ने कहा कि जुलाई में फेल हुए परीक्षार्थियों को एक और मौका दिया जाएगा।

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