भागवत ने की कांग्रेस की तारीफ

ओपिनियन पोस्‍ट।

राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ यानी आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने आमतौर पर आलोचनाओं से घिरी रहने वाली पार्टी कांग्रेस की तारीफ कर दी है। उन्‍होंने कहा है कि कांग्रेस की बदौलत ही देश की स्वतंत्रता के लिए सारे देश में एक आंदोलन खड़ा हुआ था। वह दिल्‍ली में आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रम ‘भविष्य का भारत : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का दृष्टिकोण’ के पहले दिन लोगों को संबोधित कर रहे थे।

भागवत ने संघ के कामकाज के तरीके की जानकारी दी और कहा कि संघ जैसा संगठन दुनिया में दूसरा नहीं है। उन्‍होंने उन मसलों पर भी चर्चा की जिन पर प्राय: सवाल उठाए जाते हैं। उन्‍होंने स्‍पष्‍ट किया कि संघ अपना प्रभुत्व नहीं चाहता। अगर संघ के प्रभुत्व के कारण कोई बदलाव होगा तो यह संघ की पराजय होगी। हिंदू समाज की सामूहिक शक्ति के कारण बदलाव आना चाहिए।

भाजपा पर रिमोट कंट्रोल से नियंत्रण और संघ में महिलाओं की कम भागीदारी पर भागवत ने स्पष्ट किया कि संघ का स्वयंसेवक क्या काम करता है,  कैसे करता है, यह तय करने के लिये वह स्वतंत्र है। संघ केवल यह चिंता करता है कि वह गलती न करे।

सरकार और संघ के बीच समन्वय बैठकों के संदर्भ में उन्होंने कहा कि समन्वय बैठक इसलिए होती है क्‍योंकि स्वयंसेवक विपरीत परिस्थितियों में अलग-अलग क्षेत्रों में काम करते हैं। ऐसे में उनके पास कुछ सुझाव भी होते हैं। वे अपने सुझाव बैठक में देते हैं।

संघ में महिलाओं की भागीदारी के सवाल पर भागवत ने कहा कि डॉ. हेडगेवार के समय ही यह तय हुआ था कि राष्ट्र सेविका समिति महिलाओं के लिए संघ के समानांतर कार्य करेगी। उन्होंने साफ किया कि इस सोच में बदलाव की जरूरत यदि पुरुष व महिला संगठन दोनों ओर से महसूस की जाती है तो विचार किया जा सकता है अन्यथा यह ऐसे ही चलेगा।

भागवत ने कहा कि कांग्रेस के रूप में देश की स्वतंत्रता के लिए सारे देश में एक आंदोलन खड़ा हुआ, जिसके अनेक सर्वस्वत्यागी महापुरुषों की प्रेरणा आज भी लोगों के जीवन को प्रेरित करती है। 1857 के बाद देश को स्वतंत्र कराने के लिए अनेक प्रयास हुए, जिनको मुख्य रूप से चार धाराओं में रखा जाता है। एक धारा का यह मानना था कि अपने देश में लोगों में राजनीतिक समझ कम है। सत्ता किसकी है, इसका महत्व क्या है,  लोग कम जानते हैं। इसलिए लोगों को राजनीतिक रूप से जागरूक किया जाना चाहिए।

सरसंघचालक ने कहा कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद देश में योजनाएं कम नहीं बनीं,  राजनीति के क्षेत्र में आरोप लगते रहते हैं,  उसकी चर्चा नहीं करूंगा,  लेकिन कुछ तो ईमानदारी से हुआ ही है। देश का जीवन जैसे-जैसे आगे बढ़ता है,  वैसे-वैसे राजनीति भी आगे बढ़ती है।

उन्होंने कहा कि विविधता में एकता का विचार ही मूल बिंदु है और इसलिए अपनी-अपनी विविधता को बनाए रखें और दूसरे की विविधता को स्वीकार करें। हिंदुओं से एक होने की अपील करते हुए मोहन भागवत ने कहा- जंगली कुत्ते अकेले शेर का शिकार कर सकते हैं।

भागवत ने संयम और त्याग के महत्व को भी रेखांकित करते हुए कहा कि संघ की यह पद्धति है कि पूर्ण समाज को जोड़ना है। संघ के लिए कोई पराया नहीं, जो आज विरोध करते हैं वे भी नहीं। संघ केवल यह चिंता करता है कि उनके विरोध से कोई क्षति न हो। हम लोग सर्व लोकयुक्त वाले लोग हैं, मुक्त वाले नहीं। सबको जोड़ने का हमारा प्रयास रहता है। इसलिए सबको बुलाने का प्रयास करते हैं।

उन्होंने कहा कि आरएसएस शोषण और स्वार्थ रहित समाज चाहता है। संघ ऐसा समाज चाहता है जिसमें सभी लोग समान हों। समाज में कोई भेदभाव न हो। युवकों के चरित्र निर्माण से समाज का आचरण बदलेगा। व्यक्ति और व्यवस्था दोनों में बदलाव जरूरी है। एक के बदलाव से परिवर्तन नहीं होगा।

विज्ञान भवन में हो रहे इस कार्यक्रम में सोमवार को कुछ केंद्रीय मंत्रियों के अलावा अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी, फिल्मकार मधुर भंडारकर, अन्नू कपूर, मनीषा कोइराला जैसे बालीवुड के कलाकार भी मौजूद थे।

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