ओपिनियन पोस्ट

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ओपिनियन पोस्ट एक राष्ट्रीय पत्रिका है जिसका उद्देश्य सही और सबकी खबर देना है। राजनीति घटनाओं की विश्वसनीय कवरेज हमारी विशेषज्ञता है। हमारी कोशिश लोगों तक पहुंचने और उन्हें खबरें पहुंचाने की है। इसीलिए हमारा प्रयास जमीन से जुड़ी पत्रकारिता करना है। जीवंत और भरोसमंद रिपोर्टिंग हमारी विशेषता है।

किसी की राह आसान नहीं

वामपंथ को उखाड़ कर समाजवाद स्थापित करने वाले मगध की जहानाबाद संसदीय सीट काफी ‘हॉट’ मानी जाती है. यूं तो राज्य में कई लोकसभा क्षेत्र भूमिहार बहुल हैं, लेकिन भूमिहार राजनीति का पैमाना नापने का थर्मामीटर...

मां का मामला है सोनाक्षी

जबसे शत्रुघ्न सिन्हा ने भाजपा का दामन छोड़ा है, उन पर ट्रोलर्स कुछ ज्यादा ही मेहरबान हो गए हैं. जब उन्होंने पार्टी बदली, तो सोशल मीडिया में उनकी जमकर छीछालेदर हुई. फिर उनकी पत्नी पूनम सिन्हा भी एक दूस...

देशभक्ति का पंचनामा

अभिनेता अक्षय कुमार का करियर अच्छा-खासा चल रहा था. देशभक्ति टाइप फिल्मों से ‘भारत कुमार’ जैसी इमेज बन गई थी, बीच-बीच शहीदों के लिए दान-पुण्य भी कर लेते थे. लेकिन, अचानक उन्हें पीएम मोदी का नॉन पॉलिटिक...

जांचिए अपने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का स्वास्थ्य

यूं तो पंचायत स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनाए गए हैं और इसके लिए सरकार करोड़ों रुपये खर्च भी करती है, लेकिन कई बार शिकायत आती है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर नियुक्...

ऐसे ही नेता चुन के आएंगे!

ओपिनियन पोस्ट का यह अंक जब आप पढ़ रहे होंगे, तब लोकतंत्र का महोत्सव समाप्त हो चुका होगा. जीत का सर्टिफिकेट लेकर 543 सांसद दिल्ली की ओर रवाना हो चुके होंगे. सरकार बनाने की कवायद चल रही होगी. लेकिन इन स...

कैडर पद पर गैर कैडर अधिकारी

तमिलनाडु में युवा आईपीएस अधिकारी खुश नहीं हैं. राज्य सरकार द्वारा गैर कैडर अधिकारियों के माध्यम से लगभग आधे आवंटित कैडर पद भरने का काम किया जा रहा है. इससे आईपीएस अधिकारियों को लगता है कि उनका मैदान स...

माधव ने दिया सहयोगी दलों को मौका

भाजपा के महासचिव राम माधव के बयान के बाद सहयोगी दलों को मोल-तोल करने का नया मौका मिल गया है. बता दें, माधव ने कहा है कि चुनाव के बाद भाजपा को नए सहयोगी दलों की जरूरत पड़ सकती है. इसके बाद भाजपा के सार...

किसी अजूबे से कम नहीं था भारत का पहला चुनाव

भारत को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र होने का गौरव हासिल है. यदि 1975 के आपातकाल को छोड़ दिया जाए, तो यहां नियमित रूप से चुनाव हुए हैं और जब कभी मौका आया, तो बिना किसी अड़चन के सत्ता परिवर्तन भी हुआ. य...

कहीं यह सीजेआई के खिलाफ साजिश तो नहीं!

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया पर लगा यौन शोषण का आरोप बहुत बड़े विवाद का रूप ले चुका है. इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट के जज परेशान हैं,सरकार और विश्लेषक भी हैरान हैं. अगर किसी महिला का यौन शोषण हुआ है, तो उस...

जदयू के आधार वोटर होंगे निर्णायक

सासाराम सुरक्षित संसदीय सीट पर आजादी से लेकर साल 1986 तक बाबू जगजीवन राम का आधिपत्य रहा. हाल यह था कि चुनाव में उनके खिलाफ  सारे जातीय समीकरण धरे के धरे रह जाते थे. चाहे वह कांग्रेस के टिकट पर मैदान म...

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