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चुनाव में हार मिली तो ली श्मशान में जल समाधी

सात बार चुनाव लड़ चुके इस बाबा को है ईवीएम में गड़बड़ी शक

नाव में हारने के बाद ईवीएम में गड़बड़ी का आरोप लगाकर अर्थी बाबा ने ले ली श्मशान में जल समाधी

ओपिनियन पोस्ट
गोरखपुर। उत्तरप्रदेश में बीजेपी की पूर्ण बहुमत से इतिहास रच देने वाली सरका क्या बनी विपक्षियों ने चुनाव प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े करना शुरु कर दिया है। बीएसपी सुप्रीमों मायावती, राहुल गांधी और अखिलेश यादव से लेकर अरविंद केजरीवाल सभी नेता ईवीएम मशीन में गड़बड़ी के आरोप लगा रहे हैं।
इस बीच उत्तरप्रदेश के गोरखपुर में हार का मुंह देखने के बाद एक निर्दलीय प्रत्याशी के विरोध करने का अनोखा तरीका सामने आया है। दरसअल, इस प्रत्याशी ने ईवीएम मशीन में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए श्मशान घाट में जल समाधी ले ली है। इतना ही नहीं महाशय का कहना है कि ईवीएम मशीन में गड़बड़ी वाली बात उन्हें श्मशान घाट में गन्ना किसानों की आत्माओं ने बताई है।
पूरा मामला गोरखपुर की चौरी चौरा विधानसभा का है जहां से निर्दलीय प्रत्याशी राजन यादव उर्फ अर्थी बाबा ने विधानसभा चुनाव लड़ा था। चुनाव में तो बीजेपी का उम्मीदवार जीत गया लेकिन अर्थी बाबा नतीजों के बाद श्मशान घाट में जल समाधी पर बैठ गए हैं।
श्मशान घाट से अपना कार्यालय चलाने वाले राजन यादव उर्फ अर्थी बाबा के ईवीएम में गड़बड़ी के आरोप लगाते हुए जलसमाधि ले ली है। अर्थी बाबा का कहना है कि ये बात उन्हें गन्ना किसानों की आत्माओं ने बताई है। बाबा के मुताबिक उन्होंने गन्ना किसानों को ही अपने पोलिंग एजेंट बनाया था। राजन यादव उर्फ अर्थी बाबा एमबीए पास है। उन्होंने एमएलए, एमएलसी और एमपी के अलावा अब तक सात बार चुनाव लड़े है । उन्होंने एलान किया था कि अगर वो जीतते हैं तो वो अपना सारा फंड गन्ना किसानों को दे देंगे।
बतां दें कि 2009 के लोकसभा चुनाव में भोजपुरी स्टार मनोज तिवारी गोरखपुर सदर सीट से चुनाव लड़ रहे थे। उस वक्त बॉलीवुड स्टार संजय दत्त उनके चुनाव प्रचार में सपा नेता अमर सिंह के साथ गोरखपुर आए थे। पर्चा दाखिले के दौरान संजय दत्त ने राजन यादव को देखकर यह कह दिया था कि वे तो अर्थी बाबा को देखने आए हैं। बता दें कि अर्थीबाबा ने राप्ती नदी के किनारे संजय दत्त की जेल से रिहाई को लेकर 101 चिताओं का घाट पर रहकर पूजन किया था। उसी के कुछ दिन बाद ही संजय दत्त जेल से रिहा हो गए थे। अर्थी बाबा ने अपना नामांकन दाखिल करने के बाद पूरी चुनाव प्रक्रिया का संचालन के लिए अपना सेन्ट्रल इलेक्शन ऑफिस गोरखपुर के राप्ती नदी तट पर खोला था । अपनी अनोखी कार्यशैली के कारण उन्होंने मीडिया में खूब सुर्खियां बटोरी थी । पहचान बनाई है।

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