तीर्थयात्रियों पर हमला, सुरक्षा में चूक या खुफिया नाकामी

ओपिनियन पोस्ट
Tue, 11 Jul, 2017 14:39 PM IST

सुनील वर्मा

कश्‍मीर में जो हुआ वो होने की आशंका पहले से थी। खतरे से निबटने की तैयारी भी थी। लेकिन फिर भी वो अनर्थ हो गया जो नहीं होना चाहिए था। 29 जून से शुरू हुई 40 दिन की अमरनाथ यात्रा को आतंकवादी निशाना बना सकते है। इसकी खुफिया सूचना पुलिस और सुरक्षा बलों को करीब 21 जून तक मिल चुकी थी। सुरक्षा बलों ने ऑपरेशनल और प्रशासनिक पहलू से जुड़ी हर तरह की रणनीति तैयार कर ली थी। खुफिया सूचना में साफ था कि अमरनाथ यात्रा हमला औचक ढ़ग से होगा। आतंकियों का कोई समूह अचानक सामने आकर अंधाधुंध फायरिंग कर ज्‍यादा से ज्‍यादा श्रद्धालुओं और सुरक्षा कर्मियों को नुकसान पहुंचाने की रणनीति पर काम कर रहा है। दरअसल हमले का ये अलर्ट कश्‍मीर के आईजी मुनीर अहमद खान को पकड़े गए कुछ आतंकवादियों से जानकारी मिला था। जिन्‍होंने बताया था कि लश्‍करे तोइबा आतंकियों का एक गुट अमरनाथ यात्रा के दौरान खून खराबा कर ऐसी कार्रवाई करने की साजिश रच रहा है जिससे देश में सांप्रदायिक तनाव पैदा हो जाये। आईजी मुनीर खान ने केन्‍द्र सरकार से लेकर सभी सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों को इस खतरे का ध्‍यान में रखकर यात्रा की तैयारियों करने तथा पुख्‍ता सूचना जुटाने के लिए कहा था।
इस अलर्ट के बाद खुफिया एजेंसियों कोई पुख्‍ता सूचना तो नहीं जुटा सकी लेकिन हमले से निबटने की तैयार भरपूर की गई थी। यात्रा शुरू होंने के बाद करीब 38 किलोमीटर लंबे रूट पर लगातार सेटेलाइट व ड्रोन कैमरो से आतंकवादियों की गतिविधियों की निगरानी हो रही थी। पूरे मार्ग पर सेना हवाई गश्‍त कर रही थी। शांतिपूर्ण अमरनाथ यात्रा सुनिश्चित करने के प्रयासों के तहत दक्षिण कश्मीर के पहलगाम तथा बालटाल मार्गो पर 24 बचाव दल और 35 श्वान दस्ते तैनात किए गए थे। सुरक्षा के इन दस्‍तों में जम्मू-कश्मीर सशस्त्र पुलिस, राज्य आपदा राहत बल और ऑक्सीजन सिलेंडर समेत सभी बचाव उपकरणों से लैस राष्ट्रीय आपदा मोचन बल के जवान तैनात थे। सशस्त्र पुलिस के आठ पर्वतीय बचाव दलों को यात्रा मार्ग के कठिन हिस्सों में महिलाओं और बुजुर्ग श्रद्धालुओं की मदद के लिए तैनात किया गया था। इसके अलावा कुल 12 हिमस्खलन बचाव दल, एसडीआरएफ के 11 दल, सीआरपीएफ और जम्‍मू कश्‍मीर पुलिस के कुल 61 हजार जवान पूरे यात्रा मार्ग पर एक अल्‍प दूरी से तैनात किए गए थे। इसके अलावा भी एनडीआरएफ के चार तलाशी एवं बचाव दलों को भी तैनात किया जाएगा। राष्ट्रीय राजमार्गो पर 24 घंटे गश्त के अलावा सुरक्षा के बहुआयामी इंतजाम थे। लेकिन पुख्‍ता खुफिया सूचना, चाक चौबंद सुरक्षा बंदोबस्‍त के बावजूद 10 जुलाई को आतंकवादियों ने अमरनाथ यात्रा पूरी करके लौट रहे श्रृद्धालुओं की बस पर हमला कर दिया जिसमें पांच महिलाओं समेत 7 तीर्थयात्रियों की तत्‍काल मौत हो गई। जबकि 5 सुरक्षाकर्मियों समेत 19 तीर्थ यात्री घायल हुए जिनमें पांच की हालात गंभीर बनी हुई है।

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कैसे हुआ हमला

amarnath-attack-1बाबा बर्फानी के दर्शन करके श्रीनगर से जम्मू की ओर जा रही गुजरात के 60 तीर्थयात्रियों से भरी एक बस संख्‍या जीजे 09 जेड 9976  जैसे ही रात करीब 8 बजकर 20 मिनट पर अनंतनाग में खानाबल के पास बटेंगू इलाके में पहुंची बाइक पर सवार होकर आए दो आतंकियों ने बस पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। पहली गोली बस की विंडस्‍क्रीन पर लगी जिससे वह चकनाचूर हो गया। ड्राईविंग सीट पर बैठा चालक सलीम शेख तुरंत समझ गया कि ये दहश्‍तगर्दो का हमला है। उसने सिर का नीचे झुकाया और गाडी को तेज गति से दौडाना शुरू किया और किसी तरह बस को अगले चौक तक पहुंचाया। लेकिन तब तक आतंकवादियों की ताबड़तोड़ गोलीबारी से बस की तमाम खिड़कियों के शीशे चकनाचूर हो चुके थे और पूरी बस में गोलियों के सुराख बन गए थे। बस में सवार कई लोगों को गोलिया लगी थी। चौक पर पहुंचते ही सुरक्षा बलों और रक्षा बचाव दलों ने बस को अपनी सुरक्षा में ले लिया और घायलों को अस्‍पताल पहुंचाने का काम शुरू की दिया।

जिस जगह आतंकियों ने श्रृद्धालुओं की बस पर हमला किया वहां और भी कई गाड़ियों खड़ी थी जिन पर गोलियां लगी।  हमले के दौरान आर्मी और पुलिस ने भी आतंकियों पर फायरिंग की। लेकिन वे क्रॉस फायरिंग करते हुए वहां से भाग निकले। प्रत्‍यक्ष दर्शियों ने उन्‍हें एक गली से भागते देखा जिससे अनुमान लगाया जा रहा है कि उनके साथ कम से कम दो स्‍थानीय आतंकी भी थे। जिन्‍होंने हमले के बाद बचकर सुरक्षित मार्ग से भागने में उनकी मदद की। हालांकि आइजी कश्मीर मुनीर अहमद खान ने कहा है कि आतंकियों का निशाना तीर्थयात्रियों की बस नहीं थी। आतंकियों ने वहां से गुजर रहे पुलिस वाहन पर हमला किया था। लेकिन संयोग से इसी दौरान बस भी वहां से गुजरी और गोलीबारी की चपेट में आ गई।

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दरअसल, यह बस गुजरात के बलसाड स्थित ओम ट्रैवल्स की थी । इसका चालक सलीम शेख है जो हर साल श्रृद्धालुओं को बाबा बर्फानी के दर्शन करवाने बलसाड़ से यात्रियों को लेकर कश्‍मीर आता था। हांलाकि हैरानी की बात ये है कि सख्‍त हिदायतों के बावजूद  इस बस का अमरनाथ श्राइन बोर्ड में रजिस्ट्रेशन नहीं था। सोमवार को बाबा बफार्नी के दर्शन कर इस बस के यात्री सुरक्षा दस्‍तों व अन्‍य गाडि़यों के साथ चली जम्‍मू के लिए चले। लेकिन शाम 4 बजे रास्‍ते में इस बस का टायर पंचर हो गया। जिसे ठीक करने में करीब दो घंटे लगे। इस कारण ये बस सिक्‍यूरिटी कॉनवॉय से अलग हो गई। नियमत: यात्रा में शामिल सभी बसों को शाम 7 बजे तक अपने बेस कैंप तक पहुंचने के निर्देश है लेकिन टायर पंचर के कारण ये बस वहां समय से नहीं पहुंच सकी और अन्‍य बसों से पिछड़ गई। और रात करीब 8.20 बजे ये हादसा हो गया। हालां‍कि जिस तरह के सुरक्षा इंतजाम थे उसमें ऐसी घटना

सुरक्षाबलों की तैयारी को मात दे गए आतंकी

इसी बस पर बरसाई थी आतंकियों ने गोलियां
इसी बस पर बरसाई थी आतंकियों ने गोलियां
बस का बहादुर ड्राईवर सलीम जिसने बचाई दर्जनों यात्रियों की जान
बस का बहादुर ड्राईवर सलीम जिसने बचाई दर्जनों यात्रियों की जान

पिछले कुछ समय से कश्‍मीर के अलग-अलग इलाकों खासतौर से दक्षिणी कश्‍मीर में सुरक्षा बल लगातार दहश्‍तगर्दो के खिलाफ बड़ा ऑपरेशन चला रहे थे। हर दिन आतकियों से सेना और पुलिस की मुठभेड़ हो रही थी। पाकिस्तानी सेना और आईएसआई बड़ी तादाद में भाड़े के आतंकियों को भारतीय इलाके में घुसपैठ कराने की साजिश में जुटे थे। सुरक्षाबलों भी इसका भरपूर जवाब दे रहे थे।  8 जुलाई को एक साल पहले मारे गए लश्‍कर कमांडर बुरहान वाणी के एनकाउंटर की बरसी को देखते हुए ये हमले लगातार तेज हो रहे थे। बरसी पर तो कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ जिससे सुरक्षा बलों ने राहत की सांस ली थी मगर अमरनाथ यात्रियों पर हुआ हमला बताता है कि आतंकियों की तैयारी सुरक्षाबलों से दो कदम आगे थी।

हुई चार बडी चूक

बस ने सुरक्षा नियम तोड़ा
श्राइन बोर्ड से रजिस्टर्ड नहीं थी गाड़ी
आतंकियों को पकड़ने में नाकामी
क्‍यों नहीं रोका गया बस को ?

हमले में 3-5 आतंकी हो सकते हैं शामिल!

हमले के बाद खुफिया सूत्रों ने बताया है की इस पूरे हमले में 3 से 5 लश्कर-ए-तैयब्बा के आतंकी शामिल थे। लश्कर-ए-तैयब्बा का आतंकी अबू इस्माइल इन आतंकियों के ग्रुप का नेतृत्व कर रहा था।

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पीएम मोदी से लेकर सीएम तक ने की निंदा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि शांतिपूर्ण अमरनाथ यात्रियों पर कायरतापूर्ण हमले पर दुख जताने के लिए शब्द नहीं हैं। उन्होंने कहा कि भारत ऐसे कायरतापूर्ण हमलों और घृणा के नापाक मंसूबों के आगे झुकने वाला नहीं है। पीएम ने जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल एन एन वोहरा और मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती से बात की और हरसंभव मदद का आश्वासन दिया। वहीं कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने अमरनाथ यात्रियों पर हुए हमले को लेकर दुख प्रकट किया है। सूचना मिलने के तुरंत बाद वे रात में ही अनंतनाग के एक सरकारी अस्‍पताल में घायलों से मिलने पहुंची । जहां उन्होंने कहा सभी घायलों से हाथ जोड़कर माफी मांगते हुए रूंधे गले से कहा कि इस घटना को लेकर हर कश्मीरी का सिर शर्म से झुक गया है। उन्‍होंने कहां मेरे पास इसकी निंदा करने के लिए कोई शब्द नहीं हैं। मुझे आशा है कि सुरक्षा बल और जम्मू कश्मीर पुलिस साजिशकर्ताओं को गिरफ्तार करके उनके खिलाफ कड़ी कार्वाई करेगी। साथ ही उन्होंने कहा कि हम अपराधियों को सजा दिलाने तक चुप नहीं बैठेंगे। वहीं अलगाववादी नेताओं ने इस आतंकवादी हमले की निंदा करते हुए कहा कि घटना कश्मीरी संस्कार के खिलाफ है. एक संयुक्त बयान में अलगाववादी हुर्यित नेता सैयद अली गिलानी, मीरवाइज उमर फारूक और यासिन मलिक ने सात अमरनाथ यात्रियों के मारे जाने पर शोक प्रकट किया। ये अलग बात है कि इस हमले की जिम्मेदारी उसी लश्कर-ए-तैयब्बा ने ली है जिससे अलगाववादी नेताओं को फंडिग मिलती है और वे उसके आका के दिशा निर्देश पर काम करते हैं।

हमले में मारे गए श्रद्धालुओं के नाम

  1. हसुबेन रतिला पटेल – वलसाड, गुजरात
    2. सुराखा बेन – वलसाड, गुजरात
    3. पटल लक्ष्मीबेन – वलसाड, गुजरात
    4. ऊषा मोहानला सोनकर
    5. ठाकुर निर्मलाबेन
    6. रतन जिना भाई पटेल
    7. पटेल लक्ष्मीबेन

7 साल पहले 27 लोग मारे गए थे
2000 में यात्रियों को पहलगाम में निशाना बनाया गया था। तब हुए हमले में 17 यात्रियों समेत 27 लोगों की मौत हुई थी। 36 घायल हो गए थे।

2007 में भी अमरनाथ यात्रियों की बस को निशाना बनाया गया था। उस हमले में कई लोग घायल हुए थे।

 

 

 

 

 

 

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