5वीं पारी की तैयारी पर भाजपा भारी

सतीश शर्मा
Sat, 16 Mar, 2019 13:05 PM IST

पिछले लगभग चार दशकों से राज्य पर एकछत्र राज करने वाले नवीन पटनायक लगातार पांचवीं बार अपनी सत्ता कायम रखने के लिए मैदान में उतरेंगे. उन्हें चुनौती देने के लिए कांग्रेस और भाजपा एक बार फिर कमर कस कर तैयार हैं.

चार चरणों में होने वाले चुनाव के लिए 11, 18, 23 एवं 29 अप्रैल की तारीख तय हुई है. मुख्यमंत्री नवीन पटनायक राज्य के सबसे लंबी अवधि तक मुख्यमंत्री रहने का कीर्तिमान बना चुके हैं. इस बार वह पांचवीं पारी खेलने के लिए तैयार हैं. उन्होंने दावा किया कि आगामी चुनाव में भी बीजद बहुत अच्छा प्रदर्शन करेगा. बीते पांच मार्च को अपने पिता एवं पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय बीजू पटनायक की 103री जयंती के अवसर पर पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए नवीन पटनायक ने कहा कि 2014 के चुनाव के समय हमने जनता से जो भी वादे किए थे, सत्ता में आने के बाद वे सभी वादे पूरे किए गए. इतना ही नहीं, बल्कि उस दिन स्थानीय समाचार पत्रों में छपे पूरे पृष्ठ के विज्ञापन में सरकार ने दावा किया कि आश्वासन सभी देते हैं, पर हमने अपने वादों को पूरा करके दिखाया. विज्ञापन में दावा किया गया कि राज्य में दस लाख हेक्टेयर भूमि में सिंचाई की व्यवस्था की गई. 19 साल पहले राज्य खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर नहीं था, पर अब ओडिशा अन्य राज्यों को खाद्यान्न आपूर्ति करने वाला राज्य बन गया है. राज्य में निवेश बढ़ा है. बीजू स्वास्थ्य कल्याण योजना एवं महिलाओं-किसानों के सशक्तिकरण के लिए उन्हें एक प्रतिशत ब्याज पर कर्ज देने समेत युवा सशक्तिकरण के कई कदम उठाए गए हैं. किसानों की मदद के लिए नवीन सरकार ने हाल में कालियानामक योजना शुरू की है, जिसका व्यापक प्रभाव पड़ा है.

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अपनी चौथी पारी में नवीन पटनायक ने एक खेल प्रेमी राजनीतिज्ञ होने की नई छवि बनाई. राज्य में एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप, विश्व कप हाकी चैंपियनशिपचैंपियंस हाकी ट्रॉफी प्रतियोगिता, एशियन रगबी चैंपियनशिप जैसी अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं के सफल आयोजनों और भारतीय हाकी की जिम्मेदारी उठाने के बाद नवीन पटनायक खेल संगठनों के सबसे प्रिय राजनेता बन गए. खेलों में उनके योगदान के लिए देश की प्रतिष्ठित अंग्रेजी खेल पत्रिका स्पोट्र्स स्टारने बीते 14 फरवरी को उन्हें खेल प्रोत्साहन के लिए श्रेष्ठ राज्यके रूप में पुरस्कृत किया. भुवनेश्वर देश में सर्वश्रेष्ठ खेल आयोजन स्थल के रूप में उभरा है. राज्य सरकार निजी कंपनियों के सहयोग से भुवनेश्वर में खेल प्रशिक्षण के उत्कृष्ट केंद्र स्थापित कर रही है. लोग भुवनेश्वर को भारत की खेल राजधानी का तमगा देने लगे हैं. यही नहीं, अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में पदक जीतने वाले ओडिया खिलाडिय़ों को दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. पिछले एशियन खेलों में दो रजत पदक जीतने वाली दुति चंद को तीन करोड़ और महिला हाकी में रजत पदक जीतने वाली चार ओडिया खिलाडिय़ों को एक-एक करोड़ रुपये दिए गए. इसके अलावा पटनायक ने इस बार एक नया महिला कार्ड चला है. उन्होंने आगामी लोकसभा चुनाव में पार्टी की ओर से एक तिहाई महिला प्रत्याशी उतारने का ऐलान किया है. आशय यह कि बीजद कुल 21 लोकसभा सीटों में से सात पर महिला उम्मीदवार उतारेगा. पिछली लोकसभा में बीजद की तीन महिला सांसद थीं. संभवत: पहली बार देश में किसी दल ने एक तिहाई टिकट महिलाओं को देने की विधिवत घोषणा की है. लेकिन, इससे बीजद में खलबली भी मची है, क्योंकि कुछ वर्तमान सांसदों के टिकट कटने तय हैं.

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सरकार की उपलब्धियां गिनाने के साथ नवीन पटनायक ने अपनी विफलताओं का ठीकरा हमेशा की तरह केंद्र सरकार के माथे पर फोड़ा है. यह बीजद का आजमाया हुआ पुराना नुस्खा है. किसानों को धान का न्यूनतम मूल्य देने की बात हो या छत्तीसगढ़ से महानदी का जल विवाद, इसके लिए वह केंद्र पर ओडिशा की अनदेखी करने का आरोप लगाते हैं. नवीन सरकार केंद्र द्वारा घोषित धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1750 रुपये प्रति क्विंटल के बजाय 2930 रुपये करने की मांग कर रही है. उसने पड़ोसी छत्तीसगढ़ सरकार की तरह अपनी ओर से कोई इजाफा नहीं किया है, लेकिन जुबानी जंग के जरिये किसान हितैषी होने का दावा करना चाहती है. केंद्र द्वारा राज्य की उपेक्षा करने का आरोप पुख्ता के लिए वह ओडिशा हक मांगता हैनामक अभियान चला रही है. अभियान के तहत कोयले की रॉयल्टी में वृद्धि से लेकर राज्य में रेलवे के विस्तारीकरण और मुनाफे में हिस्सा मांगा जा रहा है.

ऐसा नहीं है कि नवीन सरकार में घोटाले नहीं हुए. खान घोटाले, चिट फंड घोटाले, कोयला घोटाले, दाल घोटाले, किसानों द्वारा प्राइस-प्रेस्टीज-पेंशन को लेकर निरंतर आंदोलन, शिक्षकों का आंदोलन, हाईकोर्ट की बेंच को लेकर आंदोलन, कलिंग नगर में पुलिस द्वारा आदिवासियों की हत्या, दाना मांझी द्वारा पत्नी का शव ढोने की घटना, महिला प्रताडऩा की बढ़ती घटनाओं से सरकार की छवि मलिन हुई. कई मंत्रियों, विधायकों एवं सांसदों के आचरण से भी नवीन सरकार को शर्मिंदगी झेलनी पड़ी. अपनी छवि के प्रति अत्यंत संवेदनशील नवीन पटनायक ऐसे नेताओं के टिकट काटेंगे, यह तय है. 2009 में भाजपा के साथ अपना गठबंधन तोडऩे के बाद से नवीन पटनायक की लोकप्रियता निरंतर बढ़ी है. 2009 के आम चुनाव में बीजद ने लगभग 39 प्रतिशत मतों के साथ 103 विधानसभा सीटों और 14 लोकसभा सीटों पर विजय हासिल की थी. 2014 के चुनाव में उनकी लोकप्रियता और बढ़ गई. इन चुनाव में विधानसभा में बीजद की सीटें बढक़र 117 हो गईं और लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के बावजूद उसने २० सीटें जीत लीं. बीजद का वोट प्रतिशत भी 39 से बढक़र 43.4 हो गया.

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राज्य में विपक्षी दल के नेता-कार्यकर्ता बीजद में जाने को लालायित हैं. बीजद निवर्तमान अधिकरियों की पहली पसंद है. बीजद जहां कमजोर है, वहां वह किसी न किसी तरह मजबूत विपक्षी नेताओं को अपने पाले में ला रहा है. कई कांग्रेसी नेताओं ने हाथछोडक़र शंखबजाना शुरू भी कर दिया है. 2017 के त्रिस्तरीय पंचायती चुनाव में पहली बार भाजपा ने बीजद को कड़ी चुनौती दी थी, लेकिन उसके बाद बीजद ने अपनी स्थिति संभाल ली. आगामी चुनाव में लोकसभा सीटों पर भाजपा बीजद को चुनौती दे सकती है. पुलवामा आतंकी हमले और बदले में भारत द्वारा पाक में एयर स्ट्राइक करने से लोग मोदी के मुरीद हो गए हैं, जिसका फायदा भाजपा को मिल सकता है. वहीं विधानसभा चुनाव में अभी भी नवीन पटनायक की सत्ता पर आंच आने की संभावना नहीं दिख रही है. बीजद के पास जीत के लिए आज भी सबसे बड़ा कार्ड नवीन पटनायक की व्यक्तिगत छवि है. लेकिन, फैसला तो राज्य के तीन करोड़ १८ लाख मतदाता करेंगे और नतीजे 23 मई को सामने आएंगे.

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