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पड़ोस- ओली को चीन पसंद है

राकेश चन्द्र श्रीवास्तव/सचिन श्रीवास्तव

नेपाल-चीन से लगे दुर्गम पहाड़ी रास्तों के जरिये भारत विरोधी शक्तियां बेरोकटोक अपने मंसूबों को अंजाम दे रही हैं। सबसे बड़ी बात यह कि चीन भी नेपाल में घुसपैठ बढ़ाकर भारत की सुरक्षा को खतरा पैदा कर रहा है। यही वजह है कि उसने नेपाल को अपने चार बंदरगाहों के इस्तेमाल करने की इजाजत दे दी है। नेपाल ने भी चीन के साथ द्विपक्षीय रिश्तों को आगे बढ़ाते हुए अपने यहां बुनियादी औद्योगिक सुविधाओं के विकास के लिए 2.24 अरब डॉलर के आठ समझौते किए हैं। नेपाल पर चीन के दबाव और उसकी ओर नेपाल के झुकाव को इसी से समझा जा सकता है कि पुणे में 10 से 16 सितंबर 2018 तक चले बिम्सटेक (बंगाल की खाड़ी बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग उपक्रम) देशों के आतंकवाद विरोधी संयुक्त सैन्य अभ्यास में नेपाल शामिल नहीं हुआ, क्योंकि मेजबानी भारत कर रहा था। इसी प्रकार 17 से 28 सितंबर 2018 तक चीन द्वारा आयोजित संयुक्त सैन्य अभ्यास में नेपाल शामिल हो गया। नेपाल का भारत से इस प्रकार दूरी बनाना और चीन की गोद में जा बैठना भारतीय सुरक्षा के लिहाज से ठीक नहीं है।
नेपाल में वामगठबंधन को मिली जीत के बाद भारत विरोधी केपी शर्मा ओली 15 फरवरी 2018 को दूसरी बार नेपाल के 41वें प्रधानमंत्री बने। वह पहले 11 अक्टूबर 2015 से 3 अगस्त 2016 तक नेपाल के पीएम रह चुके हैं। पहली बार प्रधानमंत्री बनने पर उन्होंने पहले चीन की यात्रा की थी किन्तु इस बार 15 फरवरी 2018 को दूसरी बार पीएम बनने पर उन्होंने 7 अप्रैल 2018 को अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए भारत को चुना। दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले चीन की यात्रा और बाद में नेपाल की यात्रा की। नेपाल यात्रा से पहले पीएम मोदी की चीन यात्रा से डोकलाम विवाद के बाद तनातनी कम हुई। काठमांडू में 30 व 31 अगस्त 2018 को बिम्सटेक के लिए नेपाल गए प्रधानमंत्री मोदी का पिछले चार वर्षों में यह चौथा नेपाल दौरा था।
बे आॅफ बंगाल इनिशिएटिव फॉर मल्टी सेक्टोरल टेक्निकल एन्ड इकोनामिक कोआॅपरेशन (बिम्सटेक) की स्थापना वर्ष 1997 में हुई थी। दक्षिण एशिया में पाकिस्तान व मालदीव को छोड़कर अन्य सभी देश भारत, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और श्रीलंका और दक्षिण पूर्व एशिया के दो देशों म्यांमार और थाईलैंड का सहयोग संगठन है। इस क्षेत्र का आर्थिक और सामरिक महत्व तेजी से बढ़ रहा है। भारत के पड़ोस में कुछ शक्तियों की अनौपचारिक और निरंतर टकराव की स्थिति के कारण कई देश बिम्सटेक को प्राथमिकता दे रहे हैं। बिम्सटेक की 30 व 31 अगस्त 2018 को काठमांडू में इनके राष्ट्र प्रमुखों की दो दिवसीय बैठक के बाद जारी काठमांडू घोषणापत्र में आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को परोक्ष तौर पर नसीहत दी गई है।
उल्लेखनीय है कि आतंकवाद पर पाकिस्तान के रवैये को देखते हुए ही सार्क की पिछली बैठक रद्द हो गई थी। भारत चाहता है कि सार्क की जगह यह संगठन ही तेजी से आगे बढ़े। बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्ताव पर सभी देशों ने आतंकवाद के खिलाफ बिम्सटेक देशों का पुणे में 10 सितंबर से 16 सितंबर 2018 तक संयुक्त सैन्य अभ्यास करने पर सहमति जताई लेकिन सैन्य अभ्यास से दो दिन पूर्व इसमें शामिल न होने की बात कह कर नेपाल ने अपनी चीन के साथ जाने की प्रतिबद्धता दिखाते हुए सभी को चौंका दिया। पुणे में बिम्सटेक देशों के संयुक्त सैन्य अभ्यास में नेपाल शामिल नहीं हुआ है जबकि नेपाल और चीन की सेनाओं ने मिलकर 12 दिनों तक सैन्य अभ्यास किया जो चेंगदू में 17 से 28 सितंबर तक चला। नेपाल का ऐन मौके पर सैन्य अभ्यास से अलग होना भारत के लिए चिंता की बात है। नेपाल सरकार ने यह फैसला ऐसे समय में लिया, जब काठमांडू से नेपाली फौज भारत में पहले ही पहुंच चुकी थी। भारत ने नेपाल के बिम्सटेक देशों के सैन्य अभ्यास में शामिल न होने को लेकर उससे कड़ी नाराजगी जताई है।
भारत को अलग-थलग करने के लिए चीन ने नेपाल को लुभाना शुरू कर दिया है। इस क्रम में चीन ने अपने चार बंदरगाहों के इस्तेमाल करने की इजाजत नेपाल को दे दी है। नेपाल और चीन के अधिकारियों ने काठमांडू में पिछले 7 सितंबर को हुई एक बैठक में इस समझौते को अंतिम रूप दिया। इसके तहत नेपाल अब चीन के शेनजेन, लियानयुगांग, झाजियांग और तियानजिन बंदरगाह का इस्तेमाल कर सकेगा। इस समय नेपाल तीसरे देशों के साथ व्यापार करने के लिए कोलकाता और विशाखापटनम बंदरगाह का उपयोग करता है। माना जा रहा है कि भारत के एकाधिकार को समाप्त करने के लिए नेपाल चीन से नजदीकियां बढ़ा रहा है। अभी नेपाल आवश्यक वस्तुओं और र्इंधन के लिए काफी हद तक भारत पर निर्भर है। दूसरे देशों से व्यापार करने के लिए नेपाल भारत के बंदरगाहों का भी इस्तेमाल करता है। व्यापारिक गतिविधियों को लेकर नेपाल जिस तरह से चीन के करीब जा रहा है, उससे भारत से उसके रिश्तों में खटास आने की आशंका जाहिर की जा रही है।
चीन ने नेपाल में वर्ष 2017 में आठ अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया है। ओली ने पहले प्रधानमंत्री रहते हुए तिब्बत के रास्ते चीन और नेपाल के बीच रणनीतिक सम्पर्क बनाने के साथ दस समझौतों के माध्यम से अपने रिश्ते को मजबूत बनाया है। एशिया को यूरोप से जोड़ने वाली चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की महत्वाकांक्षी ‘वन बेल्ट वन रोड’ पहल में शामिल होने के लिए नेपाल ने चीन के साथ समझौता किया है जो भारत के लिए चिंताजनक है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को भरोसा दिलाया है कि वे सहयोग को बढ़ाएंगे। वहीं नेपाल ने चीन के साथ द्विपक्षीय रिश्तों को आगे बढ़ाते हुए अपने यहां पनबिजली, सीमेंट और अन्य बुनियादी औद्योगिक सुविधाओं के विकास के लिए 2.24 अरब डॉलर के आठ समझौते किए हैं। नेपाल के निवेश बोर्ड और चीन की कंपनी हुआशिन सीमेंट नारायणी प्रा. लि. के बीच हुए समझौते के तहत चीन की कंपनी नेपाल में प्रतिदिन तीन हजार टन सीमेंट उत्पादन के लिए 14.4 अरब रुपये का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) करेगी। नेपाल और चीन के बीच 4.6 करोड़ डॉलर के निवेश से ऊंचे पहाड़ी इलाकों में फलों और सब्जियों की विभिन्न किस्मों के उत्पादन के लिए फूड पार्क बनाने का भी समझौता किया गया। दोनों देश 164 मेगावाट क्षमता की नेपाल कालीगंडकी गॉर्ज जलविद्युत परियोजना के विकास पर भी सहमत हुए। इनके अलावा एक समझौता अभियांत्रिकी, खरीद, निर्माण एवं वित्तपोषण (ईपीसीएफ) आधार पर 40.27 मेगावाट क्षमता वाली सिउरी न्यादि जलविद्युत संयंत्र परियोजना के निर्माण के लिए किया गया।
भारत-नेपाल सीमा पर चार चीनी सूचना केंद्र व 20 चीनी अध्ययन केंद्र भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर हैं। नेपाल के रूपनदेही, लुम्बनी, झापा, सुनसरी, सरलाही, मौरंग, चितवन, परसा, बारा, सप्तारि जिलों में चीनी केंद्र चल रहे हैं। इन केंद्रों के माध्यम से चीन का भारत सीमा पर नजर रखने, नेपाल के निवासियों को भारत के खिलाफ भड़काने, सांस्कृतिक गतिविधियों के नाम पर मदरसों में चल रही संदिग्ध गतिविधियों को समर्थन देने की आशंका बेहद गोपनीय रिपोर्ट में जतायी गई है। यही नहीं, उत्तराखंड में चमोली से सटी सीमा पर चीनी सैनिकों की घुसपैठ का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। नेपाल के पहाड़ी क्षेत्र का अधिकांश भाग चीन से लगा हुआ है और ये क्षेत्र पूरी तरह से खुले हैं। नेपाल सीमा से लगी चीन सीमा के पास खास, ल्हासा की सीमा पूरी तरह से खुली है और इस सीमा से आम नेपाली चीन की बेरोकटोक यात्रा भी करते हैं। सीमा पार करने वाले की न तो नेपाल की सीमा में तलाशी की जाती है और न ही चीन में प्रवेश पर वहां की सरकार की ओर से तलाशी की कोई व्यवस्था है। आज चीन नेपाल में घुसपैठ बढ़ाकर भारत की सुरक्षा को खतरा पैदा कर रहा है।

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