सोशल-  क्या भारत को राम की सबसे ऊंची प्रतिमा की जरूरत है ?

निशा शर्मा।

गुजरात में दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा सरदार पटेल की बनी है। जिसके बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घोषणा की है कि अयोध्या में श्रीराम की प्रतिमा बनेगी जो ऊंचाई में सरदार पटेल की प्रतिमा से ऊंची होगी। ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी राज्य सरकार ने बनने वाली प्रतिमा की ऊंचाई की जानकारी साझा की हो। श्रीराम की प्रतिमा की घोषणा के बाद सोशल मीडिया पर मुद्दा काफी गर्माया हुआ है। लोग ऊंची प्रतिमा को लेकर तरह तरह की बातें कर रहे हैं। जिसमें एक मुद्दा यह भी उठा है कि क्या भारत को श्रीराम की सबसे ऊंची प्रतिमा की जरूरत है। इस सवाल के जवाब में सोशल मीडिया पर एक सज्जन लिखते हैं कि भारत एक स्मारकों का देश है, श्रीराम तो धार्मिक सभ्यता के आइकॉन हैं। श्रीराम की प्रतिमा तो भारत में अवश्य बननी चाहिए। यहां तक कि भारत के स्वतंत्रता आंदोलन ने भी राम राज्य को सम्मानित किया। ऐसे में श्रीराम की प्रतिमा को बनाने में देर नहीं होनी चाहिए।

वहीं कुछ लोगों का मानना है कि श्रीराम या किसी भी अन्य की प्रतिमा बनाने में पैसा खर्च करना व्यर्थ है। लोगों का मानना है कि जो पैसा श्रीराम की प्रतिमा बनाने में लगाया जा रहा है उस पैसे का इस्तेमाल सरकार को गरीब लोगों के पुनर्वास में, बच्चों की शिक्षा में, दवाखाने बनाने में, किसानों के लिए खर्च करना चाहिए।

सरकार का दायित्व बनता है कि वो निचले तबके के मेहनतकश लोगों की जरूरतों को पूरा करें और जो मुख्य धारा से कटे हुए लोग हैं उनको मुख्य धारा में लाने की कोशिश करें। किसी भी राजनेता जिन्होंने अपना अमूल्य जीवन राष्ट्र के नाम किया हो, को उचित सम्मान मिलना चाहिए। मगर उसके भी कई अनेक तरीके होते हैं। करदाताओं के हिस्से से एक पैसे का भी इस्तेमाल किसी विकास कार्य के अलावा कहीं अन्य जगह होता है तो ये राष्ट्र के लोगों के विकास में बाधक है।

वहीं एक से एक ऊंची प्रतिमा को बनाने को लेकर सोशल मीडिया पर मजाक भी बनाया जा रहा है। कुछ लोगों का कहना है कि सरदार पटेल की मूर्ति 181 मीटर ऊंची है। वहीं श्रीराम की मूर्ति 221 मीटर ऊंची होगी । अगर इसी तरह मूर्तियां बनती रहीं तो एक दिन हम बिना रॉकेट के आसमान में जा सकेंगे।

 

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