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‘धमकी से हम नहीं डरते, कश्मीर हम जरूर जाएंगे’

अखिल भारतीय इमाम संगठन का अमन की बात करना और घाटी में जाकर लोगों के बीच नफरत की जगह मोहब्बत का पैगाम ले जाने की तैयार करना राहत भरा है।

कश्मीर झुलस रहा है। आतंकी बुरहान वानी की मौत के बाद कश्मीर में हिंसा बेकाबू हो रही है। ऐसे में अखिल भारतीय इमाम संगठन का अमन की बात करना और घाटी में जाकर लोगों के बीच नफरत की जगह मोहब्बत का पैगाम ले जाने की तैयार करना राहत भरा है। लेकिन उनकी इस पहल पर कुछ लोग नाराज हैं। संगठन प्रमुख को धमकी भरे कई फोन लगातार आ रहे हैं। इसको लेकर संगठन के प्रमुख डॉ. इमाम उमर अहमद इलियासी से संध्या द्विवेदी की बातचीत

बुनियादी बात यह है कि हम हमेशा कश्मीर की बात करते हैं। कश्मीर पर सियासत खूब हुई। मगर हमने कभी कश्मीरियों की बात नहीं की। जब तक हम वहां के लोगों से नहीं जुड़ेंगे। उनके बीच नहीं जाएंगे। जरूरत है कश्मीरियों के बीच जाकर यह बताने की कि पूरा हिंदुस्तान उनके साथ है। बिना लोगों को अपने साथ जोड़े कश्मीर मुद्दा का हल नहीं निकलेगा।

सवाल-आप वहां मोहब्बत का पैगाम लेकर जा रहे हैं। मगर वहां तो नफरत की आग में कश्मीर जल रहा है। आपके लिए भी खतरा पैदा हो सकता है?

हां आज मेरे पास कई फोन आए। हमें हिदायत दी गई कि हम कश्मीर न आएं। अगर हम वहां गए तो हमारी मुखालफत की जाएगी। हमें धमकियां दी गईं। वहा गए तो ठीक नहीं होगा। मगर हम कहते हैं, हम अपने भारत के किसी भी हिस्से में बेखौफ जा सकते हैं। हम कश्मीर जाएंगे। और अगर अमन का पैगाम ले जाने में हमारी जान भी गई तो भी हमें फख्र होगा। कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है, और हम इस्लामी होने से पहले भारतीय हैं। जैसे हर हिंदू पहले भारतीय है। देश पहले धर्म बाद में आता है। मेरा मानना है कि कश्मीरी सबसे ज्यादा प्यार करने वाले लोग हैं। मेहमान नवाज हैं। जो आज मेरी मुखालफत भी कर रहे हैं वह भी वहां पहुंचने पर हमें गले लगाएंगे।

सवाल-आप वहां पर कैसे लोगों तक अपना संदेश पहुंचाएंगे?

हम मस्जिदों के इमामों से मिलेंगे। उनसे मस्जिदों के लाउडीस्पीकरों से अमन का संदेश पहुंचाने की गुजारिश करेंगे। रैली निकालेंगे। उन बेकसूर परिवारों से मिलेंगे जिनक लोग हिंसा में मारे गए।

सवाल-केंद्र मे भाजपा है। राज्य में पीडीपी के साथ भाजपा का गठजोड़ है। लोकसभा चुनाव में भाजप ने धारा 370 को प्रमुखता से अपने घोषणापत्र में दर्ज किया था। मगर अब तक कोई कदम नहीं उठाया?

देखिए वहां धारा 370 को आवाम भी खत्म कर सकती है। बिना जनमत संग्रह कराए इसे खत्म करना नमुमकिन है। कशमीर पर तमाल लोगों ने बात की। खूब सियासत भी हुई। अब जरूरी है कि कश्मीरियों से संवाद करें। चर्चा लोगों से हो। उन्हें एहसास दिलाएं कि वह भारत के हैं। वह भारतीय हैं। शिक्षा, रोजगार पहुंचाएं वहां। बिना लोगों के बीच भरोसा कायम किए हम कश्मीर से धारा 370 नहीं हटा सकते।

सवाल-अक्सर खबरें आती हैं कि वहां की मस्जिदों से देश विरोधी नारे लगाए जाते हैं। नफरत भरे भाषण दिए जाते हैं। ऐसे में वहीं की मस्जिदों से देश हित में, अमन की बातें करवाना क्या आसान होगा, जैसा कि आपने कहा?

देखिए हमें फिलहाल कोई ऐसी बात नहीं करनी चाहिए जिससे नफरत फैले। हमारी कोशिश अमन की है। और हम इसमें कामयाब होंगे। हमें भरोसा है।

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ओपिनियन पोस्ट एक राष्ट्रीय पत्रिका है जिसका उद्देश्य सही और सबकी खबर देना है। राजनीति घटनाओं की विश्वसनीय कवरेज हमारी विशेषज्ञता है। हमारी कोशिश लोगों तक पहुंचने और उन्हें खबरें पहुंचाने की है। इसीलिए हमारा प्रयास जमीन से जुड़ी पत्रकारिता करना है। जीवंत और भरोसमंद रिपोर्टिंग हमारी विशेषता है।
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