झूठी खबरों के कारण पत्रकारों की साख घटी

ओपिनियन पोस्ट। 

फेक न्यूज़ के कारण लोकतन्त्र के इस चौथे पाये कि ईटें ढहने लगी हैं।  झूठी खबरों के कारण जनता में पत्रकारों की साख घटी है।

यह बात पाञ्चजन्य के संपादक हितेश शंकर ने गुरुवार को नई दिल्ली में झूठी खबरों के भ्रमजाल विषय पर आयोजित एक संगोष्ठी में कही। भारतीय जनसंचार संस्थान नई दिल्ली में मीडिया मंथन नाम से हुई इस संगोष्ठी का आयोजन पाञ्चजन्य ने किया था।

हिंदुस्तान टाइम्स की पूर्व पत्रकार आभा खन्ना ने बताया कश्मीरी  मीडिया पर वहाँ के आतंकवादी हावी हैं और उनकी बात वहाँ के मीडिया को  माननी पड़ती है। और वही से निकली झूठी खबरें दिल्ली का मेनस्ट्रीम मीडिया बगैर कोई जांच परख के सच की तरह दिखाता है। पूरे देश में कश्मीर के बारे में झूठ फैलाने की यह प्रक्रिया पिछले कई दशकों से चली आ रही है।

आभा खन्ना कई बार कश्मीर की जमीनी हकीकत को जानने के लिए वहाँ जा चुकी हैं और जाती रहती हैं। उन्होने बताया कि जम्मू कश्मीर के तीन हिस्से हैं: जम्मू, कश्मीर और लद्दाख। इसमे कश्मीर के पास सिर्फ 15 प्रतिशत जमीन है। शेष 85 प्रतिशत जम्मू और लद्दाख के हिस्से में है, जहां आम तौर से शांति है। कश्मीर की आम जनता गरीब पाकिस्तान के साथ नहीं जाना चाहती है।

भारतीय जनसंचार संस्थान के महानिदेशक के जी सुरेश ने आगाह किया कि पेड़ न्यूज़ भी एक तरह की फेक न्यूज़ है और  2019 के चुनाव के दौरान इन झूठी खबरों  की बाढ़ और तेज हो जाएगी। उन्होने सुझाव दिया कि पत्रकारिता शिक्षण में पेड न्यूज़ और फेक न्यूज़ के बारे में छात्रों को पढ़ाया जाना चाहिए।

मीडिया मंथन में अनुराग पुनेठा की बनाई एक फिल्म दर्शाया गया कि किस प्रकार यह झूठी खबर फैलाई गई कि दस रुपए का सिक्का जाली है। सेना का मनोबल तोड़ने के लिए भी झूठी खबरें फैलाई जाती हैं। ऐसा गुनाह  करने वाले पत्रकारों की आँख शर्म से नीची भी नहीं होती हैं।

संगोष्ठी में नेशनल यूनियन ऑफ जरनलिस्ट्स के महासचिव और लोकसभा टेलीविजन के मनोज वर्मा ने कहा कि फेक न्यूज़ रोकने के लिए सरकार जब कोई कदम उठती है तो उसका विरोध किया जाता है।

पाञ्चजन्य के प्रकाशक  भारत प्रकाशन (दिल्ली) लिमिटेड की ओर से नरेंद्र सेठी ने सभी आगंतुकों को धन्यवाद दिया।

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