न्यूज फ्लैश

कांग्रेस व एमएनएफ में सीधी टक्कर

गुलाम चिश्ती

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) मिजोरम विधानसभा का चुनाव कांग्रेस मुक्त पूर्वोत्तर की नीयत से लड़ रही है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव व पूर्वोत्तर के प्रभारी राम माधव और नार्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस (नेडा) के संयोजक डॉ. हिमंत विश्वशर्मा पहले ही ऐलान कर चुके हैं कि मिजोरम विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को सत्ता से बेदखल कर कांग्रेस मुक्त पूर्वोत्तर का सपना पूरा कर लिया जाएगा।
पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने यहां पार्टी का चुनाव अभियान शुरू कर दिया है। उन्होंने राज्य की सभी 40 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का एलान किया है। इससे भाजपा की चुनावी रणनीति साफ हो गई है। पहले कयास लगाए जा रहे थे कि भाजपा शायद कुछ सीटों पर ही चुनाव लड़े। पार्टी ने पहले ही कहा था कि वह राज्य में किसी के साथ चुनावी तालमेल नहीं करेगी। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने दावा किया है कि राज्य के लोग दिसंबर में नई सरकार के साथ क्रिसमस मनाएंगे। मिजोरम ईसाई बहुल राज्य है। उन्होंने कांग्रेस सरकार पर भाई-भतीजावाद व भ्रष्टाचार में डूबने का आरोप लगाते हुए कहा है कि अगले महीने होने वाले चुनाव में लोग उसे सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा देंगे। ध्यान रहे कि मिजोरम पूर्वोत्तर का अकेला ऐसा राज्य है जहां कांग्रेस सत्ता में है। कांग्रेस-मुक्त पूर्वोत्तर के अपने वादे के तहत भाजपा अबकी बार यहां से भी उसका पत्ता साफ करने की रणनीति बना रही है। इसी रणनीति के तहत पार्टी ने अकेले मैदान में उतरने और सभी सीटों पर चुनाव लड़ने का एलान किया है। चुनावी नतीजों के बाद वह नार्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक एलायंस (नेडा) में अपने सहयोगी और राज्य की प्रमुख विपक्षी पार्टी मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) के साथ हाथ मिला सकती है। दूसरी ओर त्रिकोणीय मुकाबले में अपनी कुर्सी बचाने के लिए कांग्रेस ने भी उम्मीदवारों की सूची में युवा चेहरों को तरजीह दी है। पार्टी ने अब तक 36 उम्मीदवारों की जो सूची जारी की है उसमें एक-तिहाई यानी 12 लोग पहली बार चुनाव मैदान में उतरेंगे। मुख्यमंत्री व पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ललथनहवला का दावा है कि सरकार के कामकाज के आधार पर लोग इस बार भी उन्हें ही सत्ता सौंपेंगे। भाजपा ने अपने चुनाव अभियान के तहत राज्य के पिछड़ेपन और सरकार के भ्रष्टाचार को ही प्रमुख मुद्दा बनाने का फैसला किया है। अमित शाह ने कहा कि राज्य में पनबिजली और पर्यटन के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। लेकिन कांग्रेस सरकार इसके दोहन में नाकाम रही है। दूसरी ओर मिजोरम में भगवा झंडा फहराने की कवायद में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि राज्य की जनता अगला क्रिसमस बीजेपी के राज में मनाएगी। उन्होंने कहा कि पार्टी सभी 40 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। अमित शाह ने कहा कि देश के कुछ राज्यों में कांग्रेस की सरकार है। उन्हें उम्मीद है कि राज्य की जनता कांग्रेस सरकार को इस बार मौका नहीं देगी।
उन्होंने मिजोरम की राजधानी आइजोल स्थित आर. डेंगथुआमा इंडोर स्टेडियम में बूथस्तरीय कार्यकर्ताओं की बैठक में कहा कि कार्यकर्ताओं के उत्साह को देखकर यह कहने में गुरेज नहीं है कि कांग्रेस की करारी हार होने जा रही है। राज्य की जनता कांग्रेस सरकार के भ्रष्टाचार से तंग है। केंद्र की तरफ से जो भी मदद भेजी जा रही है उसका सदुपयोग नहीं हो रहा है। अमित शाह गुवाहाटी में असम के पार्टी नेताओं और मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल से मुलाकात करने के बाद आए थे। उन्होंने कांग्रेस को सभी तरह के भ्रष्टाचारों का जनक बताया और इसके साथ ही विकास के लिए भाजपा को वोट देने के लिए कहा। भाजपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि मिजोरम में कांग्रेस सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई कई विकास योजनाओं को लागू नहीं किया है। शाह ने आइजोल में भाजपा के राज्य कार्यालय अटल भवन का भी उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि अगर भाजपा मिजोरम में सरकार बनाती है तो केंद्र सरकार के 100 से ज्यादा कार्यक्रमों को लागू किया जाएगा। मिजोरम की मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल दिसंबर 2018 में खत्म हो रहा है। बीजेपी पूर्वोत्तर में अपने पांव पसारने के लिए जी-जान से जुटी है। ऐसे में कांग्रेस के लिए मिजोरम को बचाना आसान नहीं होगा। दूसरी ओर नि:संदेह पूर्वोत्तर के छोटे-से पर्वतीय राज्य मिजोरम की मुख्यधारा की राजनीति में कोई खास अहमियत नहीं है। यहां विधानसभा की महज 40 सीटें हैं, लेकिन बावजूद इसके अगले महीने पांच राज्यों के लिए होने वाले विधानसभा चुनावों में अगर बीजेपी और कांग्रेस के लिए यह राज्य साख का सवाल बन गया है तो इसकी ठोस वजह है। इसी वजह से दस साल से यहां सत्ता में रही कांग्रेस और अबकी उसे बेदखल कर सत्ता में आने का सपना देखने वाली बीजेपी ने इस राज्य में भी पूरी ताकत लगा दी है। पूर्वोत्तर के छह राज्यों में बीजेपी या उसकी सहयोगी पार्टियों की सरकार है। अब अगर वह मिजोरम में अपनी सहयोगी मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) के साथ सत्ता में आ जाती है तो इलाके के सभी सातों राज्यों में उसकी सरकार बन जाएगी। इसके साथ ही कांग्रेस मुक्त पूर्वोत्तर का पार्टी का दावा हकीकत में बदल सकता है। दूसरी ओर, दो साल पहले तक त्रिपुरा को छोड़ कर पूर्वोत्तर के बाकी छह राज्यों में राज करने वाली कांग्रेस के पास अब बस यही राज्य बचा है। अगर यहां भी वह हार गई तो आजादी के बाद पहली बार ऐसा होगा जब इलाके के किसी राज्य में कांग्रेस की सरकार नहीं होगी। यही वजह है कि मिजोरम के विधानसभा चुनाव सत्तारूढ़ कांग्रेस के लिए अग्निपरीक्षा बन गए हैं। बीते 10 साल से यहां राज कर रही इस पार्टी की साख और वजूद अब दांव पर है। हाल में पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने विपक्षी मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) का दामन थाम लिया है, लेकिन बावजूद इसके कांग्रेस नेता राज्य में जीत की हैट्रिक लगाने का दावा कर रहे हैं। मुख्यमंत्री व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ललथनहवला कहते हैं कि एकाध नेताओं के इधर-उधर जाने से पार्टी की जीत की संभावनाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा। जाने वालों के मुकाबले दूसरे दलों से कांग्रेस में आने वालों की तादाद अधिक है। उनका दावा है कि अपने कामकाज के बलबूते कांग्रेस लगातार तीसरी बार राज्य में सरकार का गठन करेगी। राज्य की 40 विधानसभा सीटों के लिए 28 नवंबर को मतदान होना है। लगातार दस साल से सत्ता में रहने की वजह से कांग्रेस को अबकी बार प्रतिष्ठान-विरोधी लहर के अलावा भाई-भतीजावाद और भ्रष्टाचार के आरोपों से भी जूझना पड़ रहा है। इन समस्याओं की काट के लिए ही पार्टी ने उम्मीदवारों की सूची से कई निवर्तमान विधायकों का पत्ता साफ करते हुए एक दर्जन से ज्यादा नए चेहरों को जगह दी है। 2008 के विधानसभा चुनावों में जोरमथांगा की अगुवाई वाली एमएनएफ सरकार को हटा कर कांग्रेस सत्ता पर काबिज हुई थी। उस साल उसे 40 में से 32 सीटें मिली थीं जबकि एमएनएफ को महज तीन सीटों से ही संतोष करना पड़ा था। पांच साल बाद 2013 के चुनावों में कांग्रेस को 34 सीटें मिलीं तो एमएनएफ को पांच ही सीटें मिलीं थीं। ललथनहवला चार बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं और 2013 में अपने लगातार दूसरे कार्यकाल के लिए चुनाव लड़ रहे थे। मुख्यमंत्री ललथनहवला दो विधानसभा सीट (सेरचिप और हरांगतुर्जो ) पर चुनाव लड़े थे और दोनों ही सीटें जीत गए थे। दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी के महासचिव राम माधव ने एलान किया है कि मिजोरम में होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा अकेले चुनाव मैदान में उतरेगी, लेकिन समान विचारधारा वाली पार्टियों के साथ गठबंधन भी कर सकती है। राम माधव ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया था कि भाजपा सभी 40 विधानसभा सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी। राम माधव ने विपक्षी दलों की ओर से मिजो नेशनल फ्रंट को भाजपा का प्रॉक्सी बताए जाने को हास्यास्पद बताया। राम माधव ने कहा की भाजपा, मिजो नेशनल फ्रंट और नेशनल पीपुल्स पार्टी के खिलाफ चुनाव में अपने उम्मीदवार उतारेगी। हालांकि ये दोनों पार्टियां (नार्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायन्स) में भाजपा की सहयोगी हैं। 2016 में भाजपा ने उत्तर पूर्व के क्षेत्रीय दलों को मिलाकर एक राजनीतिक फ्रंट (नार्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायन्स) बनाया था। इसमें नागा पीपुल्स फ्रंट, सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट, पीपुल्स पार्टी आॅफ अरुणाचल, असम गण परिषद और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट शामिल हैं। राम माधव ने मिजोरम में पिछले दस साल से सत्ता में कांग्रेस की सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने तत्कालीन सरकार को अप्रभावी और भ्रष्टाचार में लिप्त बताया। मुख्यमंत्री ललथनहवला की सरकार ने राज्य में विकास के नाम पर कुछ भी नहीं किया है। उन्होंने कहा कि यदि मिजोरम में बीजेपी की सरकार बनती है तो राज्य में फोरलेन हाइवे बनाया जाएगा, जो मिजोरम को सड़क मार्ग से बांग्लादेश और म्यांमार से जोड़ेगा। प्रस्तावित हाइवे मिजोरम की अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच सुनिश्चित करेगा और व्यापार के लिए पूर्व-पश्चिम गलियारे खोल देगा। बताते चलें कि मिजोरम में अगले 28 नवंबर को 40 सीटों के लिए मतदान होगा और 11 दिसंबर को नतीजे आएंगे। 

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